Supreme court judgement RTE एक्ट और मानदेय का अधिकार: “केंद्र का बहाना नहीं चलेगा” — राज्य की वैधानिक जिम्मेदारी पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट रेखा
Supreme court judgement गिरफ्तारी अपवाद है, नियम नहीं BNSS, 2023 की धारा 35(3) पर माननीय Supreme Court of India की निर्णायक व्याख्या और भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में नया संतुलन
Legal Article भारत मित्तल बनाम राजस्थान राज्य व अन्य (2026 (1) J.Cr.C. 1): चेक बाउंस मामलों में कंपनी के ‘समापन’ की स्थिति, निदेशक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और धारा 148 का संवैधानिक प्रश्न
Legal Article क्या दूसरी शादी कराने वाला पंडित भी उतना ही दोषी है जितना स्वयं द्विविवाह करने वाला व्यक्ति?
Supreme court judgement विवाह और गरिमा: क्या शिक्षा और मायके का सहारा पति को भरण-पोषण की जिम्मेदारी से मुक्त कर सकता है?
Supreme court judgement न्याय के द्वार पर मुख्यमंत्री: भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादा का एक नया अध्याय
Supreme court judgement पुलिस की ‘असीमित’ जांच शक्ति पर न्यायिक अंकुश: CrPC की धारा 173(8) और BNSS की धारा 193(9) की नई न्यायिक व्याख्या में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप
Legal Article जमानत का आधार: जब आरोपों में ‘विशिष्टता’ का अभाव हो — व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर उच्च न्यायालय का सशक्त रुख
High Court विरोध याचिका पर निर्णय की अंतिमता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक रुख और न्यायिक अनुशासन की पुनर्पुष्टि
Supreme court judgement समानता की भी सीमाएँ: ‘सोए हुए दावेदार’ दूसरों की जीत का लाभ नहीं ले सकते — सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
Legal Article उच्चतम न्यायालय का निर्णय: मंदिर ट्रस्ट ‘उद्योग’ नहीं — श्रम विवादों में न्याय और हर्जाने का संतुलन
BSA (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 6 – ‘एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्यों की सुसंगति’ (Res Gestae) :
Legal Article विधिक नैतिकता और सेवा विवाद: बंद हो चुके मामलों को पुनर्जीवित करने की प्रवृत्ति पर न्यायिक लगाम
High Court बुलडोजर न्याय पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तल्ख टिप्पणी : कानून के शासन और प्रशासनिक मनमानी के बीच संवैधानिक संघर्ष
BNS (भारतीय न्याय संहिता) भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 8: लिंग की नई परिभाषा और कानूनी समावेशिता का विस्तृत विश्लेषण
Legal Article सरकार बनाम जनआंदोलन: सोनम वांगचुक प्रकरण में “राष्ट्रीय सुरक्षा” और “संवैधानिक अधिकारों” के टकराव का विधिक विश्लेषण