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पुलिस द्वारा वकीलों को तलब करना न्याय प्रशासन की स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा: सुप्रीम कोर्ट

शीर्षक: पुलिस द्वारा वकीलों को तलब करना न्याय प्रशासन की स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस या जांच एजेंसियों को वकीलों को सीधे तलब करने की अनुमति दी जाती है, तो यह कानूनी पेशे की स्वायत्तता को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और न्याय प्रशासन की स्वतंत्रता को सीधा खतरा उत्पन्न करेगा।

न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि कानूनी पेशा केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है, और इस पेशे की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना न्याय व्यवस्था की नींव को कमजोर कर सकता है।

पीठ ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए कहा:

“जब कोई वकील किसी पक्षकार को सलाह देने के लिए उसके मामले से जुड़ा हो, मात्र पेशेवर भूमिका में हो, तो क्या जांच एजेंसी, अभियोजन एजेंसी या पुलिस उसे सीधे पूछताछ के लिए बुला सकती है?”

यह टिप्पणी उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका एक वकील द्वारा दायर की गई थी, जिसे उसके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में पुलिस द्वारा तलब किया गया था। गुजरात हाईकोर्ट ने 12 जून 2025 को वकील को जारी नोटिस रद्द करने से इंकार कर दिया था।

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में वकीलों की पेशेवर भूमिका और उनकी स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। वकीलों को तलब करना यदि मात्र इस आधार पर हो कि वे किसी आरोपी के सलाहकार हैं, तो यह न केवल अनुचित दबाव है, बल्कि इससे मुवक्किल और वकील के बीच गोपनीयता (client-attorney privilege) भी प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भारतीय न्याय प्रणाली में वकीलों की स्वतंत्र भूमिका को रेखांकित करती है और यह सुनिश्चित करती है कि वे बिना किसी दबाव या भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। अदालत का यह दृष्टिकोण न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।