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मिजोरम में पटाखे जलाने और रखने के लिए भी लेनी होगी अनुमति, बिना लाइसेंस बिक्री पर 2 साल की जेल, सरकारी कर्मचारियों को 1 लाख तक जुर्माना

मिजोरम में पटाखे जलाने और रखने के लिए भी लेनी होगी अनुमति, बिना लाइसेंस बिक्री पर 2 साल की जेल, सरकारी कर्मचारियों को 1 लाख तक जुर्माना

आइजोल। भारत में त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक समारोहों के दौरान पटाखे जलाना आम बात है। दीपावली से लेकर नए साल के जश्न तक आतिशबाजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। हालांकि, पटाखों से होने वाला ध्वनि और वायु प्रदूषण, आग लगने की घटनाएं तथा सुरक्षा संबंधी खतरे लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में मिजोरम सरकार ने पटाखों के इस्तेमाल, भंडारण और बिक्री को लेकर एक अलग कानून लागू किया है। इस कानून के माध्यम से राज्य में आतिशबाजी से जुड़ी गतिविधियों को नियंत्रित करने और बिना अनुमति पटाखों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार किया गया है।

मिजोरम सरकार द्वारा लागू किए गए ‘द मिजोरम रेगुलेशन ऑफ फायरवर्क्स एक्ट, 2026’ (The Mizoram Regulation of Fireworks Act, 2026) में पटाखे जलाने, अपने पास रखने और उनकी बिक्री करने के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित किए गए हैं। कानून की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब राज्य में डिप्टी कमिश्नर (Deputy Commissioner) की पूर्व अनुमति के बिना पटाखे जलाने, इस्तेमाल करने या अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी।

नए कानून में नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान किया गया है। बिना अनुमति पटाखों का इस्तेमाल करने पर तीन महीने तक की जेल या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, बिना आवश्यक लाइसेंस पटाखों की बिक्री करने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।

इस कानून में सरकारी कर्मचारियों के लिए भी विशेष दंड का प्रावधान बताया गया है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे छह महीने तक की जेल या एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

अगस्त 2026 में विधानसभा से पारित हुआ था कानून

मिजोरम सरकार ने पटाखों से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए इस कानून को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगस्त 2026 में विधानसभा ने इसे पारित किया और सितंबर 2026 में अधिसूचित कर दिया गया।

राज्य के गृह मंत्री के. सपदांगा ने शुक्रवार को आइजोल प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नए कानून के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल पटाखों पर प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि इनके इस्तेमाल, भंडारण और बिक्री को एक निर्धारित कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत लाना है।

इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में पटाखों से जुड़ी गतिविधियां अब पहले की तरह सामान्य नहीं रहेंगी। किसी व्यक्ति को अपने घर, दुकान या किसी आयोजन में पटाखों का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित अनुमति और कानूनी शर्तों का ध्यान रखना होगा।

यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पटाखों का इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। कई बार इनके अनुचित भंडारण और लापरवाही से इस्तेमाल के कारण आग लगने, संपत्ति को नुकसान पहुंचने और लोगों के घायल होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

पटाखे जलाने से पहले लेनी होगी डिप्टी कमिश्नर की अनुमति

नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान पटाखों के इस्तेमाल और उन्हें अपने पास रखने से संबंधित है। कानून के अनुसार, मिजोरम में डिप्टी कमिश्नर की पूर्व अनुमति के बिना कोई व्यक्ति पटाखे नहीं जला सकेगा और न ही उन्हें अपने पास रख सकेगा।

इसका अर्थ है कि केवल पटाखों की बिक्री को नियंत्रित करना ही सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तिगत इस्तेमाल को भी प्रशासनिक निगरानी के दायरे में लाया गया है।

आमतौर पर लोग त्योहारों के समय पहले से पटाखे खरीदकर घरों में रख लेते हैं और निर्धारित अवसर पर उनका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन नए कानून के बाद ऐसी गतिविधियों को भी निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार करना होगा।

डिप्टी कमिश्नर की अनुमति की व्यवस्था से प्रशासन को यह जानकारी रखने में मदद मिल सकती है कि राज्य में कहां और किस उद्देश्य से पटाखों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

हालांकि, इस व्यवस्था के व्यावहारिक क्रियान्वयन में कुछ सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। उदाहरण के लिए, अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या होगी, आवेदन कितने दिन पहले करना होगा और किन परिस्थितियों में अनुमति दी जाएगी? इन विषयों पर प्रशासनिक नियमों और संबंधित अधिसूचनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

धारा 3 और 4 का उल्लंघन करने पर तीन महीने की जेल

मिजोरम रेगुलेशन ऑफ फायरवर्क्स एक्ट, 2026 की धारा 3 और 4 का संबंध पटाखों के इस्तेमाल और उन्हें अपने पास रखने से है।

इन धाराओं का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर उसे अधिकतम तीन महीने तक की जेल या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कानून में जेल और जुर्माने का प्रावधान होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक मामले में अधिकतम सजा ही दी जाएगी। किसी भी मामले में आरोप, उपलब्ध साक्ष्य, अपराध की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी।

यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति पटाखे जलाता है या उन्हें अपने पास रखता है, तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला बन सकता है।

इस प्रावधान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार पटाखों के इस्तेमाल को केवल सामाजिक या प्रशासनिक विषय नहीं मान रही, बल्कि इसे कानून के उल्लंघन के रूप में भी देख रही है।

12 साल से कम उम्र के बच्चे के मामले में माता-पिता होंगे जिम्मेदार

नए कानून में बच्चों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने की स्थिति को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है।

यदि 12 वर्ष से कम उम्र का कोई बच्चा कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके कृत्य के लिए जुर्माने या सजा की जिम्मेदारी उसके माता-पिता अथवा अभिभावक पर डाली जा सकती है।

इस प्रावधान के पीछे बच्चों की सुरक्षा और अभिभावकों की जिम्मेदारी का विचार महत्वपूर्ण है। कम उम्र के बच्चे कई बार पटाखों के खतरों को ठीक से नहीं समझते। वे खेल-खेल में पटाखे जला सकते हैं या उन्हें असुरक्षित स्थानों पर रख सकते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में माता-पिता की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खतरनाक गतिविधियों से दूर रखें और उनकी निगरानी करें।

हालांकि, इस प्रावधान को लागू करते समय बच्चे की उम्र, घटना की परिस्थितियों और कानून में निर्धारित प्रक्रिया को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। केवल बच्चे द्वारा पटाखे जलाए जाने की जानकारी मिलने से स्वतः अभिभावक की दोषसिद्धि नहीं मानी जा सकती। संबंधित प्रावधानों के अनुसार जिम्मेदारी निर्धारित करने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।

बिना लाइसेंस पटाखे बेचने पर दो साल तक की जेल

नए कानून में पटाखों की बिक्री को लेकर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। पटाखों का कारोबार करने वाले दुकानदारों और व्यापारियों को निर्धारित लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होगा।

बिना आवश्यक लाइसेंस पटाखों की बिक्री करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। इस तरह की गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ मिजोरम रेगुलेशन ऑफ फायरवर्क्स एक्ट, 2026 की धारा 5 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।

धारा 5 का उल्लंघन करने पर दोषी को दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

इस प्रावधान का सीधा असर उन दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा, जो बिना वैध अनुमति पटाखों की खरीद-बिक्री करते हैं।

कई बार त्योहारों के समय अस्थायी दुकानें लगाकर पटाखों की बिक्री शुरू कर दी जाती है। कुछ व्यापारी बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बड़ी मात्रा में आतिशबाजी का सामान जमा कर लेते हैं। इससे आग लगने और विस्फोट जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

लाइसेंस व्यवस्था के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पटाखों की बिक्री केवल निर्धारित शर्तों का पालन करने वाले व्यक्तियों द्वारा ही की जाए।

एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884 के तहत भी हो सकती है कार्रवाई

पटाखों की बिक्री और भंडारण का मामला केवल मिजोरम के नए कानून तक सीमित नहीं है। भारत में विस्फोटक पदार्थों के निर्माण, कब्जे, इस्तेमाल और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही केंद्रीय कानून मौजूद है।

एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884 (Explosives Act, 1884) विस्फोटक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला महत्वपूर्ण कानून है। इसके अंतर्गत विस्फोटक पदार्थों के लाइसेंस, सुरक्षा और निर्धारित नियमों के पालन से संबंधित व्यवस्था की गई है।

मिजोरम के गृह मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि आवश्यक लाइसेंस के बिना पटाखों की बिक्री करने पर नए राज्य कानून के साथ-साथ एक्सप्लोसिव्स एक्ट, 1884 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

इसका मतलब है कि पटाखों का कारोबार करने वाले व्यक्ति को केवल राज्य सरकार के नियमों का ही नहीं, बल्कि लागू केंद्रीय कानूनों और उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों का भी पालन करना होगा।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यापारी बिना आवश्यक लाइसेंस पटाखों का भंडारण करता है या उनकी बिक्री करता है, तो मामले की परिस्थितियों के अनुसार उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

यहां यह समझना जरूरी है कि एक ही घटना में अलग-अलग कानूनों के प्रावधान लागू होने की स्थिति में संबंधित कानूनी शर्तों और दंड संबंधी नियमों का पालन करना होगा। किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए कानून के विरुद्ध दोहरी सजा नहीं दी जा सकती।

अपराध संज्ञेय और जमानती श्रेणी में रखे गए

गृह मंत्री के. सपदांगा ने बताया कि नए कानून के अंतर्गत आने वाले अपराध संज्ञेय (Cognizable) और जमानती (Bailable) श्रेणी में रखे गए हैं।

आपराधिक कानून में इन दोनों शब्दों का अपना अलग महत्व है।

संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) क्या होता है?

संज्ञेय अपराध वह होता है जिसमें पुलिस कानून के अनुसार बिना मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के मामले की जांच शुरू कर सकती है और निर्धारित परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी भी कर सकती है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) में संज्ञेय अपराधों से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसकी धारा 173 में संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने से संबंधित प्रावधान दिया गया है।

इसका उद्देश्य यह है कि गंभीरता की दृष्टि से संज्ञेय श्रेणी में रखे गए अपराधों की सूचना मिलने पर पुलिस कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सके।

जमानती अपराध (Bailable Offence) क्या होता है?

जमानती अपराध में आरोपी व्यक्ति को कानून के अनुसार जमानत प्राप्त करने का अधिकार होता है। यदि आरोपी जमानत देने के लिए निर्धारित शर्तों का पालन करता है, तो उसे जमानत दी जा सकती है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 478 में जमानती अपराधों में जमानत से संबंधित प्रावधान किया गया है।

इसलिए मिजोरम के नए कानून के तहत अपराधों को संज्ञेय और जमानती घोषित किए जाने का अर्थ यह है कि पुलिस निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकती है, जबकि आरोपी को जमानत के संबंध में कानूनी अधिकार भी उपलब्ध रहेंगे।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संज्ञेय अपराध होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को बिना कानूनी प्रक्रिया के दोषी मान लिया जाएगा। अपराध साबित करने के लिए साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए छह महीने की जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माना

मिजोरम सरकार के नए कानून में सरकारी कर्मचारियों को लेकर भी विशेष प्रावधान चर्चा का विषय बना हुआ है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी कानून के निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे छह महीने तक की जेल या एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए इस तरह का प्रावधान यह संकेत देता है कि कानून का पालन केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी पद पर कार्यरत व्यक्तियों से भी कानून के प्रति जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी होती है कि वे स्वयं कानून का पालन करें और अपने पद की गरिमा बनाए रखें। यदि कोई कर्मचारी निर्धारित प्रतिबंधों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, सरकारी कर्मचारी होने के आधार पर किसी व्यक्ति को स्वतः दोषी नहीं माना जा सकता। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित अपराध के तत्वों और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

पटाखों पर नियंत्रण के पीछे क्या है सरकार की मंशा?

पटाखों के इस्तेमाल पर नियंत्रण लगाने के पीछे कई व्यावहारिक कारण हो सकते हैं। आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं वायु की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इसके अलावा पटाखों से निकलने वाली तेज आवाज बच्चों, बुजुर्गों और ध्वनि के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

पटाखों के अनुचित भंडारण से आग लगने और विस्फोट का खतरा भी बना रहता है। यदि किसी दुकान या आवासीय क्षेत्र में बड़ी मात्रा में पटाखे असुरक्षित तरीके से रखे जाते हैं, तो दुर्घटना होने पर जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लाइसेंस, अनुमति और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

मिजोरम सरकार का नया कानून इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है। इसके माध्यम से सरकार पटाखों की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करने के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती है।

क्या हर राज्य में पटाखों के लिए एक जैसे नियम लागू हैं?

यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या मिजोरम का यह कानून पूरे देश में लागू होगा?

इसका जवाब है नहीं। मिजोरम रेगुलेशन ऑफ फायरवर्क्स एक्ट, 2026 राज्य का कानून है। इसके प्रावधान मिजोरम राज्य के क्षेत्र में लागू होंगे। दूसरे राज्यों में पटाखों से संबंधित नियम वहां लागू केंद्रीय कानूनों, राज्य सरकार के आदेशों, स्थानीय प्रशासनिक निर्देशों और न्यायालयों के आदेशों के अनुसार तय होते हैं।

उदाहरण के तौर पर, दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर न्यायालयों और प्रशासन द्वारा विशेष निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इसी तरह दूसरे राज्यों में भी प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

इसलिए मिजोरम के नए कानून को पूरे भारत में लागू प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आम नागरिकों और व्यापारियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

नए कानून के लागू होने के बाद मिजोरम में रहने वाले नागरिकों और पटाखों का कारोबार करने वाले व्यक्तियों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होगा।

पहली बात, पटाखे जलाने या अपने पास रखने से पहले डिप्टी कमिश्नर की अनुमति से संबंधित नियमों की जानकारी प्राप्त करें।

दूसरी बात, पटाखों की खरीद-बिक्री करने वाले व्यापारी आवश्यक लाइसेंस प्राप्त किए बिना कारोबार न करें।

तीसरी बात, पटाखों का भंडारण निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

चौथी बात, बच्चों को पटाखों से दूर रखने और उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी।

पांचवीं बात, सरकारी कर्मचारियों को भी कानून के प्रावधानों का पालन करना होगा। सरकारी पद पर कार्यरत होने से किसी व्यक्ति को कानूनी प्रतिबंधों से छूट नहीं मिलती।

इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार की आतिशबाजी से पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी आदेशों और अनुमति की शर्तों की जानकारी लेना आवश्यक होगा।

निष्कर्ष

मिजोरम रेगुलेशन ऑफ फायरवर्क्स एक्ट, 2026 राज्य में पटाखों के इस्तेमाल, भंडारण और बिक्री को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम है। इस कानून के तहत बिना अनुमति पटाखे जलाने या अपने पास रखने पर तीन महीने तक की जेल अथवा 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, बिना लाइसेंस पटाखों की बिक्री करने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।

इसके अलावा, 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में माता-पिता या अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। सरकारी कर्मचारियों के लिए छह महीने तक की जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माने की व्यवस्था इस कानून को और चर्चा में लाती है।

हालांकि, किसी भी कानून की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुमति और लाइसेंस की प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक हो। नागरिकों को भी यह समझना होगा कि त्योहारों की खुशी के साथ सार्वजनिक सुरक्षा और दूसरे लोगों के अधिकारों का ध्यान रखना जरूरी है।

आखिरकार, कानून का उद्देश्य लोगों की सामान्य गतिविधियों को अनावश्यक रूप से रोकना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए जिसमें किसी की खुशी दूसरे व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए खतरा न बने।

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संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।