दिल्ली-NCR में दिवाली पर पटाखे जलाने को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, लेकिन 300 मीटर के दायरे में रहेगा पूर्ण प्रतिबंध; जानिए नए नियम और सजा
दिवाली के त्योहार पर पटाखे जलाने को लेकर दिल्ली-NCR के लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। लंबे समय से पटाखों पर लगी पाबंदी के बीच अदालत ने इस बार कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इस छूट का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लोग अपनी मर्जी से कहीं भी और कभी भी पटाखे जला सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए तारीख, समय और स्थान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन और पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को ही निर्धारित समय के दौरान प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। इसके अलावा अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शिक्षण संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस जोन के आसपास पटाखे जलाने पर प्रतिबंध रहेगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 नवंबर 2026 से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पहले से लागू पूर्ण प्रतिबंध दोबारा प्रभावी हो जाएगा। यानी यह राहत केवल दो दिनों के लिए दी गई है। ऐसे में दिवाली मनाने की तैयारी कर रहे लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी होना जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है।
1. सुप्रीम कोर्ट ने किन तारीखों पर दी पटाखे जलाने की अनुमति?
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए पिछले कई वर्षों से पटाखों के इस्तेमाल पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लगाई जाती रही हैं। विशेष रूप से दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण प्रशासन और न्यायपालिका की ओर से सख्त कदम उठाए जाते हैं।
इस बार सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सीमित अवधि के लिए ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक:
- 7 नवंबर 2026: ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति।
- 8 नवंबर 2026: दिवाली के दिन भी ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे।
- 9 नवंबर 2026: पटाखों पर पहले से लागू पूर्ण प्रतिबंध दोबारा प्रभावी हो जाएगा।
इस फैसले से उन लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, जो दिवाली पर पटाखे जलाने की परंपरा को जारी रखना चाहते हैं। लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि त्योहार मनाने की स्वतंत्रता के नाम पर दूसरे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की छूट नहीं दी जा सकती।
2. पटाखे जलाने के लिए सुबह और रात का समय निर्धारित
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे जलाने के लिए दो निश्चित समय निर्धारित किए हैं। इन समय सीमाओं का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होगा।
सुबह का समय: सुबह 6 बजे से 7 बजे तक।
रात का समय: रात 8 बजे से 10 बजे तक।
इसका मतलब है कि 7 और 8 नवंबर को भी लोग पूरे दिन पटाखे नहीं जला सकेंगे। सुबह और रात के निर्धारित समय के अलावा पटाखे चलाना प्रतिबंधित रहेगा।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति सुबह 7:30 बजे या रात 10:30 बजे पटाखे जलाता है तो वह अदालत द्वारा निर्धारित समय सीमा का उल्लंघन करेगा।
समय निर्धारित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और शोर सीमित रखा जा सके। खासकर सुबह और रात के समय प्रदूषण तथा ध्वनि के प्रभाव को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।
इसलिए लोगों को यह समझना होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे जलाने की खुली छूट नहीं दी है, बल्कि कुछ घंटों की सशर्त अनुमति प्रदान की है।
3. अस्पतालों के 300 मीटर के दायरे में नहीं जला सकेंगे पटाखे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संवेदनशील स्थानों को लेकर है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के आसपास पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि अस्पतालों में पहले से बीमार लोग भर्ती रहते हैं। कई मरीज सांस संबंधी बीमारियों, हृदय रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे होते हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज उनके लिए परेशानी बढ़ा सकती है।
अदालत के निर्देश के अनुसार निम्नलिखित स्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर प्रतिबंध रहेगा:
1. सरकारी और निजी अस्पताल: सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों के आसपास पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे।
2. नर्सिंग होम: छोटे-बड़े सभी नर्सिंग होम के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
3. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के आसपास भी प्रतिबंध लागू रहेगा।
4. जिला स्वास्थ्य केंद्र: जिला स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों को भी इस प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है।
5. वृद्धाश्रम: बुजुर्गों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वृद्धाश्रमों के आसपास पटाखे जलाने पर रोक रहेगी।
6. अधिसूचित साइलेंस जोन: प्रशासन की ओर से घोषित सभी साइलेंस जोन में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
इन सभी स्थानों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र का पालन करना आवश्यक होगा।
4. स्कूल और कॉलेज भी होंगे नो-क्रैकर जोन
सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों को भी पटाखों से संबंधित प्रतिबंधों के दायरे में रखा है। इसका मतलब है कि स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
बच्चों और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को देखते हुए यह निर्देश महत्वपूर्ण है। कई बच्चे धुएं और तेज आवाज के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और आसपास रहने वाले लोगों को भी तेज आवाज के कारण परेशानी हो सकती है।
अदालत के निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों को भी नो-क्रैकर जोन के रूप में चिह्नित किया जाएगा।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि निर्धारित समय में ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति मिलने के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे। यानी समय की छूट का लाभ केवल उन्हीं स्थानों पर मिलेगा, जहां अदालत ने पटाखे जलाने की अनुमति दी है।
5. बाजार में मिलने वाला हर पटाखा ग्रीन पटाखा नहीं है
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों का निर्माण और बिक्री की जा सकेगी, जिन्हें संबंधित संस्थाओं से निर्धारित प्रमाणन प्राप्त है।
इसमें मुख्य रूप से दो संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है:
- CSIR-NEERI (राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान)।
- PESO (पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन)।
अदालत के अनुसार वैध प्रमाणन रखने वाले निर्माता 2 नवंबर से 6 नवंबर 2026 के बीच केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों का निर्माण कर सकेंगे, जो CSIR-NEERI की वेबसाइट पर स्वीकृत सूची में शामिल हैं।
इसका सीधा मतलब है कि दुकानदार केवल ग्रीन नाम लिखकर किसी सामान्य पटाखे को बेच नहीं सकते। पटाखे की वास्तविक पहचान और प्रमाणन महत्वपूर्ण होगा।
खरीदारों को भी पटाखे खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। केवल दुकान पर लगे बोर्ड या पैकेट पर लिखे ग्रीन क्रैकर के नाम पर भरोसा करने के बजाय प्रमाणित उत्पाद की पहचान सुनिश्चित करनी चाहिए।
6. बेरियम वाले पटाखों और लड़ियों पर भी प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ विशेष प्रकार के पटाखों को लेकर भी प्रतिबंध दोहराया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि बेरियम युक्त पटाखों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा CSIR-NEERI से ग्रीन पटाखे के रूप में स्वीकृत नहीं किए गए पटाखों की बिक्री और उपयोग भी प्रतिबंधित रहेगा।
इसके साथ ही पटाखों की लड़ियां, जिन्हें आम भाषा में लड़ी या पटाखों की माला कहा जाता है, उनके निर्माण और बिक्री पर भी रोक लगाई गई है।
यह प्रतिबंध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पटाखों की लड़ियों से एक साथ बड़ी संख्या में विस्फोट होते हैं। इससे ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण दोनों का स्तर बढ़ सकता है।
अदालत ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि दिल्ली-NCR में अवैध और सामान्य पटाखों की आपूर्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
इसलिए दुकानदारों और खरीदारों दोनों को यह ध्यान रखना होगा कि प्रतिबंधित पटाखों को ग्रीन पटाखों के नाम पर बाजार में नहीं बेचा जा सकता।
7. नो-क्रैकर जोन की पहचान के लिए लगाए जाएंगे बोर्ड
सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्रतिबंध लगाने तक ही अपने निर्देश सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि उनके पालन की जिम्मेदारी भी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी है।
अदालत ने निर्देश दिया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, शिक्षण संस्थानों और अधिसूचित साइलेंस जोन को नो-क्रैकर जोन के रूप में चिह्नित किया जाए।
इसके लिए संबंधित प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था करनी होगी।
प्रतिबंधित क्षेत्रों में सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि आम नागरिकों को पहले से पता चल सके कि किन स्थानों पर पटाखे जलाना प्रतिबंधित है।
इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि कोई व्यक्ति अनजाने में भी प्रतिबंधित क्षेत्र में पटाखे जलाकर नियमों का उल्लंघन न करे।
दिल्ली पुलिस के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस तथा संबंधित जिला प्रशासन को भी अपने-अपने क्षेत्रों में इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
8. नियम तोड़ने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसके आदेशों का पालन कराना संबंधित प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है।
यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय के बाहर पटाखे जलाता है, प्रतिबंधित क्षेत्र में पटाखे चलाता है या प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रश्न भी उठ सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ कौन-सी धारा लागू होगी और क्या दंड मिलेगा, यह उल्लंघन की प्रकृति और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
इसलिए यह मान लेना गलत होगा कि केवल दो दिन पटाखे जलाने की अनुमति मिलने से बाकी सभी प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं।
अदालत का उद्देश्य नियमों के दायरे में रहकर त्योहार मनाने की अनुमति देना है, न कि प्रदूषण फैलाने की खुली छूट देना।
9. 9 नवंबर से फिर लागू होगा पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध
इस पूरे आदेश का एक और महत्वपूर्ण पहलू 9 नवंबर 2026 से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 7 और 8 नवंबर को दी गई छूट अस्थायी है। 9 नवंबर से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पहले से लागू पूर्ण प्रतिबंध दोबारा प्रभावी हो जाएगा।
इसका अर्थ है कि 9 नवंबर के बाद ग्रीन पटाखे जलाने की भी अनुमति नहीं होगी।
इसलिए लोगों को यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि ग्रीन पटाखे होने के कारण उन्हें किसी भी तारीख को जलाया जा सकता है।
अदालत ने इस व्यवस्था के माध्यम से त्योहार की परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
10. दिल्ली-NCR के लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिवाली मनाने वाले लोगों को कुछ जरूरी बातें याद रखनी चाहिए।
- पटाखे केवल 7 और 8 नवंबर 2026 को ही जलाए जा सकेंगे।
- सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी।
- केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
- अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे।
- शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भी नो-क्रैकर जोन संबंधी प्रतिबंध का पालन करना होगा।
- बेरियम वाले और गैर-स्वीकृत पटाखों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
- पटाखों की लड़ियों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा।
- 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर प्रभावी हो जाएगा।
निष्कर्ष: त्योहार मनाएं, लेकिन दूसरों की सेहत का भी रखें ध्यान
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल पटाखे जलाने की अनुमति देने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा उद्देश्य भी है। दिवाली भारत का महत्वपूर्ण त्योहार है और इससे करोड़ों लोगों की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन त्योहार की खुशियां मनाते समय उन लोगों के स्वास्थ्य और सुविधाओं का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, जो प्रदूषण और शोर के कारण परेशानी झेलते हैं।
अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्ग, सांस की बीमारी से पीड़ित लोग और छोटे बच्चे पटाखों के धुएं तथा तेज आवाज से प्रभावित हो सकते हैं।
इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखों की अनुमति देते हुए संवेदनशील स्थानों पर सख्त प्रतिबंध लगाया है।
दिल्ली-NCR के लोगों को यह समझना होगा कि अदालत ने दो दिन की सशर्त राहत दी है, न कि सभी नियमों को समाप्त कर दिया है। इसलिए पटाखे खरीदने से लेकर उन्हें जलाने तक हर स्तर पर सावधानी बरतना जरूरी है।
दिवाली खुशियों का त्योहार है। इसे इस तरह मनाएं कि आपकी खुशी किसी दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शांति के लिए परेशानी न बने।
कानूनी संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट का 29 अक्टूबर 2026 का अंतरिम आदेश, मामला Arjun Gopal & Others v. Union of India & Others।
एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)
वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes
भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।
यह आलेख केवल शैक्षणिक, विधिक जागरूकता और अध्ययन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे आधिकारिक कानूनी सलाह न माना जाए। किसी भी वास्तविक मामले में संबंधित न्यायालय या विशेषज्ञ अधिवक्ता से परामर्श लें।