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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा, ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान से देशभर में आंदोलन की तैयारी

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा, ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान से देशभर में आंदोलन की तैयारी

       मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का विरोध अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को ‘इंडिया गठबंधन’ के नेता संसद भवन से निर्वाचन आयोग तक पैदल मार्च करेंगे। विपक्षी नेताओं ने इस मार्च को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है। गठबंधन के नेता सुबह करीब साढ़े दस बजे संसद परिसर में एकत्र होंगे। इसके बाद सुबह 11 बजे मकरद्वार से निर्वाचन आयोग की ओर मार्च किया जाएगा। वहां पहुंचकर विपक्षी नेता अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे और चुनाव आयोग से मतदाता सूची तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाब मांगेंगे।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर अपना विरोध और तेज करने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से आने वाले दिनों में राज्य स्तर पर बड़े अभियान की तैयारी की गई है। कांग्रेस ने इस अभियान को ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ नाम दिया है।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हट जाता है तो उसका सीधा असर उसके मतदान के अधिकार पर पड़ता है। पार्टी इसी मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।

सोमवार को कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से इस अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने का आह्वान किया। बैठक में यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि कांग्रेस आने वाले समय में निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगी।

राहुल गांधी ने कहा है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से नहीं हटते, तब तक कांग्रेस की यह मुहिम जारी रहेगी। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है और इसी विश्वास को लेकर पार्टी देशभर में अभियान चलाएगी।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली

विपक्ष ने अपने आंदोलन को केवल संसद और निर्वाचन आयोग तक सीमित रखने के बजाय इसे देशव्यापी स्वरूप देने की योजना बनाई है। इसके तहत आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी महारैली आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

कांग्रेस इस रैली में इंडिया गठबंधन में शामिल सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित करने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल केवल किसी एक राजनीतिक दल के मुद्दे नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े विषय हैं। इसलिए विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर इस मुद्दे पर सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने अपनी बात रखने की रणनीति बनाई गई है।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक रामलीला मैदान की रैली के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं होगा। पार्टी ने देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों तक इस अभियान को ले जाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से संपर्क करना और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की शिकायतों को सामने लाना है।

नवंबर के आखिर तक जारी रहेगा विरोध

कांग्रेस ने नवंबर के अंत तक विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। पार्टी नेताओं के मुताबिक आंदोलन को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा। जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाएगा।

संविधान दिवस के अवसर पर 25 और 26 नवंबर को उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से दिल्ली चलो यात्रा निकालने की भी योजना बनाई गई है। कांग्रेस का कहना है कि इन यात्राओं के जरिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

पार्टी का मानना है कि संविधान दिवस के मौके पर इस तरह का कार्यक्रम आयोजित करने से मताधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का मुद्दा जनता के बीच और मजबूती से रखा जा सकेगा।

बूथ स्तर तक पहुंचने की तैयारी

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बैठक के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि देश में अब तक करीब 13.50 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि इन आंकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक मतदाता सूची से हटाया गया प्रत्येक नाम किसी व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यानी इन आंकड़ों के पीछे करोड़ों लोगों की पहचान और उनके मतदान के अधिकार का सवाल जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अब बूथ स्तर तक जाएंगे। पार्टी का प्रयास होगा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके बारे में जानकारी जुटाई जाए और उन्हें दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया में मदद की जाए।

कांग्रेस ने इसके लिए राज्य स्तर पर विस्तृत सूची तैयार करने का दावा किया है। पार्टी के अनुसार छह से सात राज्यों से ब्लॉक स्तर की सूची भी प्राप्त हो चुकी है। इन सूचियों के आधार पर कांग्रेस कार्यकर्ता संबंधित मतदाताओं से संपर्क करेंगे।

घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे कार्यकर्ता

कांग्रेस के प्रस्तावित अभियान में घर-घर संपर्क को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। पार्टी कार्यकर्ता उन लोगों के घरों तक पहुंचेंगे, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायत सामने आई है।

कांग्रेस का कहना है कि केवल राजनीतिक मंचों पर भाषण देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए जमीन पर जाकर वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। पार्टी कार्यकर्ता मतदाताओं से जानकारी जुटाएंगे और यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि उनका नाम कब और किस कारण से मतदाता सूची से हटाया गया।

इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की रणनीति भी बनाई है। पार्टी का लक्ष्य है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जानकारी स्थानीय कार्यकर्ताओं तक पहुंचे और कार्यकर्ता लोगों की समस्याओं को पार्टी के सामने लाएं।

जिला स्तर पर भी होंगी बैठकें

कांग्रेस ने जिला स्तर पर भी संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने का निर्णय लिया है। पार्टी के अनुसार 8 नवंबर तक इंडिया गठबंधन की जिला स्तर पर बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इन बैठकों में स्थानीय स्तर पर मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों, चुनाव प्रक्रिया और संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि अभियान को प्रभावी बनाना है तो केवल शीर्ष नेतृत्व की सक्रियता पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी देनी होगी।

इसी क्रम में 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए जाने की योजना बताई गई है। कांग्रेस इन कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय प्रशासन और जनता के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रही है।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने निर्वाचन आयोग को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को ‘चिटिंग कमीशन’ तक कह दिया।

वेणुगोपाल का आरोप है कि चुनाव से जुड़े नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं और इससे देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे मुद्दों पर चुप नहीं बैठेगी।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं तो निर्वाचन आयोग को इस पर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रभावित नागरिकों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश

CEC को लेकर कांग्रेस का आंदोलन ऐसे समय में सामने आ रहा है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े कई मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब कांग्रेस इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

1 नवंबर की रामलीला मैदान की प्रस्तावित महारैली इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। यदि इंडिया गठबंधन के अधिकांश दल इसमें शामिल होते हैं तो विपक्षी एकता का एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी जा सकता है।

हालांकि इस पूरे विवाद में निर्वाचन आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत होती है। इसलिए कांग्रेस के आरोपों और चुनाव आयोग की ओर से दी जाने वाली सफाई के बीच वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी होगा।

10 अक्टूबर से शुरू होगा जमीनी अभियान

कांग्रेस की योजना के मुताबिक आने वाले दिनों में आंदोलन कई स्तरों पर चलेगा। ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन, जिला स्तर पर बैठकें, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और घर-घर संपर्क—इन सभी कार्यक्रमों को एक-दूसरे से जोड़कर अभियान को व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है।

पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में वह केवल आरोप लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रभावित लोगों तक पहुंचेगी। कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे मतदाताओं की जानकारी एकत्र करेंगे और उनके नाम वापस मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवश्यक प्रयास करेंगे।

यह अभियान कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पार्टी लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका से जुड़े सवाल उठा रही है। अब ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान के जरिए वह इस मुद्दे को सीधे आम मतदाता तक ले जाना चाहती है।

खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक

कांग्रेस की इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। बैठक में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश समेत कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अभियान शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा और पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच जाकर काम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

कांग्रेस का मानना है कि मतदाता सूची का मुद्दा सीधे आम नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। इसलिए पार्टी इसे केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा सवाल बता रही है।

अब आगे क्या?

फिलहाल विपक्ष की नजर मंगलवार को होने वाले संसद से निर्वाचन आयोग तक के मार्च पर है। इसके बाद 1 नवंबर की रामलीला मैदान की महारैली और नवंबर के अंत में संविधान दिवस के आसपास प्रस्तावित यात्राएं आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख गतिविधियां होंगी।

दूसरी ओर, कांग्रेस के ब्लॉक और बूथ स्तर के कार्यक्रमों से यह साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को केवल दिल्ली की राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहती। यदि पार्टी अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार घर-घर संपर्क और मतदाता सूची की जांच का अभियान चलाती है, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और व्यापक हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि निर्वाचन आयोग कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोपों पर क्या जवाब देता है और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के दावों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं। लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है। ऐसे में आने वाले सप्ताहों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ सार्वजनिक और संवैधानिक विमर्श का भी प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।