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राजपाल यादव की बढ़ी कानूनी मुश्किलें, 5 करोड़ जमा करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त;

राजपाल यादव की बढ़ी कानूनी मुश्किलें, 5 करोड़ जमा करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; 7 अक्टूबर को फिर सुनवाई

     Rajpal Yadav Supreme Court Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। करीब 9 करोड़ रुपये के कथित बकाया और चेक बाउंस से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता की ओर से अदालत के पहले के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत के तौर पर दी गई उस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित समय के भीतर पूरी रकम जमा नहीं की गई।

5 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत के सामने राजपाल यादव की ओर से केवल 50 लाख रुपये के भुगतान से जुड़ी जानकारी रखी गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सवाल किया कि जब अदालत ने दो सप्ताह का समय दिया था तो निर्धारित रकम जमा क्यों नहीं की गई।

मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है। इससे पहले अदालत ने राजपाल यादव को सरेंडर करने से अस्थायी राहत दी थी, लेकिन यह राहत कुछ शर्तों के साथ दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद वर्ष 2010 से जुड़ा बताया जा रहा है। उस समय राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का फैसला किया था। फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने दिल्ली की एक फर्म से करीब पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे।

फिल्म में राजपाल यादव खुद भी नजर आए थे। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद कथित तौर पर वह कर्ज की पूरी रकम समय पर वापस नहीं कर पाए।

समय बीतने के साथ मूल रकम पर ब्याज, अतिरिक्त शुल्क और अन्य देनदारियां जुड़ती गईं। इसके चलते विवादित रकम बढ़कर करीब नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसी वित्तीय विवाद ने आगे चलकर चेक बाउंस से जुड़े कानूनी मामलों का रूप ले लिया।

इस मामले में अदालतों में लंबे समय से कानूनी कार्यवाही चलती रही है और अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

चेक बाउंस मामले में कैसे बढ़ी मुश्किल?

किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा जारी किया गया चेक बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जाने के बाद यदि पर्याप्त राशि न होने या अन्य निर्धारित कारणों से बाउंस हो जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

राजपाल यादव से जुड़े विवाद में भी चेक बाउंस के मामले सामने आए। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि बकाया रकम का भुगतान नहीं किया गया। मामला आगे बढ़ते हुए अदालतों तक पहुंचा और राजपाल यादव को रकम जमा करने के निर्देश दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में अभिनेता को कुछ अंतरिम राहत दी थी। हालांकि, यह राहत बिना शर्त नहीं थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि राहत का लाभ जारी रखने के लिए उन्हें पांच करोड़ रुपये रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।

सितंबर की सुनवाई में मांगा गया था समय

15 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया अदालत में पेश हुए थे। उन्होंने अदालत से रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।

उनकी ओर से कहा गया कि अभिनेता के पास तत्काल पांच करोड़ रुपये उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन वह रकम जमा करने की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं।

वकील ने अदालत को यह भी बताया था कि राजपाल यादव के पास कुछ संपत्तियां हैं और उनकी मां के नाम भी अचल संपत्ति है। इन संपत्तियों को बेचकर या अन्य तरीके से धन की व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है।

अदालत से आग्रह किया गया था कि अभिनेता को कुछ और समय दिया जाए ताकि वह अदालत के आदेश का पालन कर सकें।

कोर्ट ने जताई थी उम्मीद कि अभिनेता वादे पर खरे उतरेंगे

सितंबर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को दो सप्ताह का समय दिया था। उस समय अदालत ने उनकी ओर से रखी गई भुगतान योजना पर भी सवाल किए थे।

अदालत ने यह संकेत दिया था कि अभिनेता को अदालत के निर्देशों का गंभीरता से पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर से अस्थायी राहत देते हुए पासपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया था।

उस समय अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि राहत की अवधि सीमित है और आगे की कार्रवाई भुगतान की शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी।

राजपाल यादव की ओर से कहा गया था कि वह कम से कम दो करोड़ रुपये का ड्राफ्ट लेकर अदालत में ठोस प्रस्ताव के साथ आ सकते हैं। उनका पक्ष था कि वह रकम की व्यवस्था करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

5 अक्टूबर की सुनवाई में केवल 50 लाख रुपये का मुद्दा

5 अक्टूबर को जब मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट के सामने आया तो अदालत को बताया गया कि राजपाल यादव की ओर से पांच करोड़ रुपये की अपेक्षित रकम जमा नहीं की गई है।

अदालत के सामने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी रखे जाने की बात सामने आई। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या यह भुगतान वास्तव में किया गया है और क्या दस्तावेज वास्तविक है।

सुनवाई के दौरान अदालत का रुख काफी सख्त नजर आया। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से भी अभिनेता द्वारा अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई गई।

शिकायतकर्ता पक्ष का कहना था कि कुल रकम करीब 7.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है और अदालत के आदेश का पालन न करने पर राजपाल यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘आपको पता होना चाहिए कि कब बोलना है’

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील और अदालत के बीच तीखी बातचीत भी हुई। अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब अभिनेता को स्पष्ट समय दिया गया था तो उसके भीतर आवश्यक रकम क्यों जमा नहीं की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह भी कहा गया कि अदालत के आदेश को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

अदालत ने यह संकेत दिया कि यदि किसी पक्ष को निर्धारित समय में भुगतान करने में कठिनाई थी तो उसे समय समाप्त होने से पहले उचित आवेदन देकर समय बढ़ाने की मांग करनी चाहिए थी।

यानी अदालत की नाराजगी सिर्फ रकम जमा न होने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इस बात को लेकर भी थी कि पहले से तय समय के दौरान अदालत से अतिरिक्त समय मांगने के लिए उचित प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।

बैंक बंद होने की दलील पर कोर्ट ने पूछा सवाल

राजपाल यादव की ओर से अदालत में यह सफाई दी गई कि बैंक कुछ दिनों तक बंद थे, जिसके कारण भुगतान में परेशानी हुई।

इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त सवाल किया। अदालत ने कहा कि अभिनेता को भुगतान करने के लिए पहले ही दो सप्ताह का समय दिया गया था। यदि किसी कारण से समय पर्याप्त नहीं था तो समय समाप्त होने से पहले अंतरिम आवेदन दाखिल करके अवधि बढ़ाने की मांग की जा सकती थी।

अदालत का सवाल मूल रूप से यही था कि जब पहले से पता था कि भुगतान करना है तो आखिरी समय तक इंतजार क्यों किया गया।

इस दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है और केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर राहत अनिश्चित समय तक जारी नहीं रह सकती।

पहले भी कोर्ट ने भरोसे को लेकर जताई थी चिंता

सितंबर की सुनवाई में भी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राजपाल यादव की ओर से किए जा रहे भुगतान संबंधी दावों पर भरोसे को लेकर टिप्पणी की थी।

अदालत ने यह संकेत दिया था कि अभिनेता का पिछला आचरण ऐसा नहीं रहा है जिससे अदालत को पूरी तरह भरोसा हो कि इस बार दिए गए आश्वासन का पालन निश्चित रूप से किया जाएगा।

इसी वजह से अदालत ने राहत देते समय कड़ी शर्तें लगाई थीं। पांच करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त इसी अंतरिम राहत का महत्वपूर्ण हिस्सा थी।

अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की कि अभिनेता बिना अदालत की अनुमति के देश से बाहर न जाएं। इसके लिए पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया था।

तीन महीने की जेल की सजा का भी संदर्भ

राजपाल यादव से जुड़े इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले तीन महीने की जेल की सजा सुनाए जाने का भी उल्लेख सामने आया है। हालांकि, बाद की कार्यवाही में उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी गई थी।

यह राहत भुगतान की शर्त से जुड़ी थी। इसलिए पांच करोड़ रुपये जमा न होने के कारण अब अभिनेता के सामने फिर से गंभीर कानूनी मुश्किल खड़ी हो गई है।

5 अक्टूबर की सुनवाई के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि अब अदालत को यह तय करना है कि राजपाल यादव द्वारा पहले दिए गए आश्वासन और भुगतान संबंधी निर्देशों का कितना पालन हुआ।

शिकायतकर्ता पक्ष ने क्या कहा?

शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि कुल बकाया रकम करीब 7.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। शिकायतकर्ता पक्ष ने मांग की कि अदालत के निर्देशों का पालन न करने के कारण राजपाल यादव को अवमानना का दोषी माना जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता की ओर से भुगतान में देरी और पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं होने को गंभीर मुद्दा बताया गया।

अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भुगतान के संबंध में तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि भुगतान अगले दिन तक हो जाना चाहिए और मामले को इसके बाद की सुनवाई के लिए तत्काल सूचीबद्ध किया जाए।

अब 7 अक्टूबर को क्या होगा?

इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होनी है। इस सुनवाई पर राजपाल यादव की ओर से यह स्पष्ट करना पड़ सकता है कि अदालत के आदेश के अनुसार रकम जमा करने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं।

यदि पांच करोड़ रुपये की शर्त पूरी नहीं हुई है तो अदालत उनकी अंतरिम राहत के संबंध में आगे निर्णय ले सकती है। वहीं, यदि भुगतान या भुगतान की विश्वसनीय व्यवस्था अदालत के सामने रखी जाती है तो उसका भी न्यायालय द्वारा परीक्षण किया जाएगा।

अभिनेता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब अदालत के विश्वास को बनाए रखना है। केवल आश्वासन के बजाय भुगतान या ठोस वित्तीय व्यवस्था का प्रमाण अदालत के सामने रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।

मामला सिर्फ अभिनेता की आर्थिक स्थिति का नहीं

यह मामला सिर्फ एक फिल्म अभिनेता के कर्ज या चेक बाउंस का विवाद नहीं रह गया है। इसमें अदालत के आदेशों के अनुपालन का प्रश्न भी जुड़ गया है।

किसी भी मुकदमे में जब अदालत किसी पक्ष को स्पष्ट समयसीमा और शर्तों के साथ राहत देती है तो उस शर्त का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि पक्षकार को समय पर अनुपालन करने में कठिनाई हो तो उसे अदालत के सामने समय रहते उचित आवेदन देना चाहिए।

राजपाल यादव के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का एक प्रमुख कारण यही दिखाई देता है कि दो सप्ताह का समय दिए जाने के बावजूद पांच करोड़ रुपये जमा नहीं किए गए और अतिरिक्त समय के लिए पहले से आवेदन नहीं किया गया।

लंबा खिंच चुका है विवाद

राजपाल यादव और दिल्ली की फर्म के बीच यह विवाद करीब डेढ़ दशक पुराना है। वर्ष 2010 में फिल्म निर्माण के लिए लिए गए कर्ज से शुरू हुआ विवाद अब कई कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरकर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है।

फिल्म के असफल होने के बाद कथित तौर पर कर्ज की रकम वापस करने में परेशानी हुई। इसके बाद ब्याज और अन्य देनदारियां जुड़ती गईं और रकम काफी बढ़ गई।

अब इस मामले में अदालत की नजर मुख्य रूप से यह देखने पर है कि अभिनेता अदालत के आदेशों का किस हद तक पालन करते हैं।

आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर

5 अक्टूबर की सुनवाई के बाद राजपाल यादव की कानूनी स्थिति पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रही है। अदालत ने पहले ही भुगतान की शर्त के साथ उन्हें सरेंडर से राहत दी थी। लेकिन निर्धारित समय में पूरी रकम जमा नहीं होने से उस राहत पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब 7 अक्टूबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। इस सुनवाई में अदालत अभिनेता की ओर से किए गए भुगतान, लंबित रकम और अदालत के पहले के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर विचार कर सकती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि करीब 9 करोड़ रुपये के इस पुराने वित्तीय विवाद ने राजपाल यादव के लिए एक बार फिर गंभीर कानूनी परेशानी खड़ी कर दी है। अदालत ने संकेत दे दिया है कि भुगतान के मामले में अब और ढिलाई स्वीकार करना आसान नहीं होगा। अगले आदेश से यह भी साफ हो सकता है कि अभिनेता को आगे राहत मिलती है या उन्हें पहले दिए गए निर्देश के अनुसार अगला कानूनी कदम उठाना पड़ेगा।

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संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।