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पुराना ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो गाड़ी हो सकती है जब्त, RC से PUC तक सेवाएं होंगी बंद: सुप्रीम कोर्ट

पुराना ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो गाड़ी हो सकती है जब्त, RC से PUC तक सेवाएं होंगी बंद: सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश

       अगर आपके वाहन पर लंबे समय से कोई ई-चालान (e-Challan) पेंडिंग है और आपने उसे यह सोचकर छोड़ रखा है कि कभी मौका मिलेगा तो भर देंगे, तो अब इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन से जुड़े करीब 14 साल पुराने मामले में ई-चालान की वसूली को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने साफ किया कि केवल हजारों-लाखों ई-चालान काट देना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल यह है कि उन चालानों के जरिए लगाए गए जुर्माने की वसूली कैसे की जा रही है। अदालत ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई, वाहनों की रैंडम चेकिंग और बकाया ई-चालान मिलने पर वाहन को जब्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

अदालत के आदेश का असर सिर्फ सड़क पर वाहन की चेकिंग तक सीमित नहीं रहेगा। बकाया ई-चालान वाले वाहनों के लिए RC से जुड़ी ऑनलाइन सेवाएं, फिटनेस सर्टिफिकेट, PUC और वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण जैसी सुविधाओं पर भी रोक लग सकती है। कई उल्लंघनों वाले मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण और मौजूदा लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने आखिर क्यों अपनाया इतना सख्त रुख?

मामला सड़क सुरक्षा से जुड़ी साल 2012 में दायर जनहित याचिका (PIL) से संबंधित है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट लगभग 14 वर्षों से सड़क सुरक्षा और मोटर व्हीकल कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी कर रहा है।

28 सितंबर 2026 के आदेश में अदालत के सामने ई-चालान से जुड़ा एक बड़ा आंकड़ा रखा गया। अदालत को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर समय-समय पर जारी ई-चालानों के संबंध में करीब 49,194.05 करोड़ रुपये की राशि वसूल की जानी थी। इनमें से लगभग 26,175.05 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी थी। यानी करीब 23,019 करोड़ रुपये की राशि अभी भी वसूली से जुड़ी हुई थी।

यही आंकड़ा अदालत की चिंता का बड़ा कारण बना।

कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस लगातार ई-चालान जारी करती रहे लेकिन उसके बाद जुर्माने की वसूली प्रभावी ढंग से न हो, तो केवल चालान काटने की प्रक्रिया से ट्रैफिक नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित होगा।

कोर्ट ने कहा- सिर्फ चालान काटना काफी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ई-चालान जारी करना प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा है।

अदालत के अनुसार हजारों और लाखों चालान जारी किए जा सकते हैं, लेकिन जब तक उनके जरिए लगाए गए जुर्माने की वसूली नहीं होती, तब तक कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का उद्देश्य पूरा नहीं होता।

यही वजह है कि अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करने पर जोर दिया है।

इसमें रैंडम चेकिंग सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

सड़क पर रैंडम चेकिंग, बकाया मिला तो वाहन जब्त करने के कदम

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वाहनों की रैंडम चेकिंग की जाए।

यदि जांच के दौरान किसी वाहन के खिलाफ जारी ई-चालान का भुगतान नहीं किया गया है, तो वाहन को जब्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

इसका मतलब यह है कि ई-चालान अब केवल मोबाइल पर आने वाला एक डिजिटल नोटिस भर नहीं रहेगा। अगर बकाया चालान का भुगतान नहीं किया गया तो वाहन मालिक को वास्तविक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि प्रत्येक मामले में लागू प्रक्रिया और जब्ती की कार्रवाई संबंधित कानूनी व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार होगी। इसलिए वाहन मालिकों को अपने लंबित चालानों की स्थिति समय रहते जांच लेना महत्वपूर्ण है।

RC से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं हो सकती हैं फ्रीज

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बकाया ई-चालान वाले वाहनों से संबंधित ऑनलाइन सेवाओं पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक संबंधित वाहन के Registration Certificate यानी RC से जुड़ी कुछ सेवाओं को रोका जा सकता है।

इनमें RC का नवीनीकरण, डुप्लीकेट RC जारी करना और वाहन मालिक के पते में बदलाव या अपडेट जैसी सेवाएं शामिल हैं।

इसका सीधा असर उन वाहन मालिकों पर पड़ सकता है जो लंबे समय से चालान को नजरअंदाज करते रहे हैं और अब वाहन से संबंधित कोई जरूरी दस्तावेजी काम कराना चाहते हैं।

गाड़ी बेचने या Ownership Transfer में भी आ सकती है परेशानी

अगर किसी वाहन पर पुराना ई-चालान बकाया है तो उसका असर वाहन बेचने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

अदालत ने ऐसे वाहनों को Parivahan portal पर blacklist करने और स्वामित्व हस्तांतरण (Ownership Transfer) पर रोक से संबंधित निर्देश दिए हैं।

इसका मतलब है कि वाहन मालिक बकाया चालान का भुगतान किए बिना वाहन को किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराने में परेशानी का सामना कर सकता है।

ऐसे में पुराना चालान केवल जुर्माने की रकम तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि वाहन के दस्तावेजी कामकाज पर भी असर डाल सकता है।

Fitness Certificate भी रुक सकता है

वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट भी महत्वपूर्ण दस्तावेज है। खासकर व्यावसायिक वाहनों के मामले में इसकी भूमिका और बढ़ जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक बकाया ई-चालान वाले संबंधित वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर भी रोक रहेगी, जब तक बकाया का निपटारा नहीं हो जाता।

इससे उन वाहन मालिकों के लिए समस्या बढ़ सकती है जो लंबे समय से पुराने चालानों को टालते रहे हैं।

PUC सर्टिफिकेट पर भी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने Pollution Under Control यानी PUC Certificate को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

बकाया ई-चालान वाले संबंधित वाहन के लिए अधिकृत केंद्रों को PUC प्रमाणपत्र जारी नहीं करने का निर्देश दिया गया है, जब तक संबंधित बकाया का भुगतान नहीं हो जाता।

इससे वाहन मालिक के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने की सामान्य प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

यानी एक लंबित चालान का असर अब केवल जुर्माना भरने तक सीमित नहीं रहेगा। वाहन से जुड़े कई जरूरी काम उससे जुड़ सकते हैं।

बार-बार नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केवल वाहन तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है।

बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में Driving Licence यानी DL के नवीनीकरण पर रोक और मौजूदा लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने 2026 में लागू केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के Rule 21(25) की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसके तहत एक साल की अवधि में पांच या उससे अधिक उल्लंघनों को सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हर एक पुराने चालान के साथ स्वतः लाइसेंस निलंबित हो जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित कड़े कदम विशेष रूप से कई उल्लंघनों वाले मामलों में महत्वपूर्ण होंगे।

देशभर में 49 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा क्यों अहम है?

ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों की पहचान और कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

CCTV कैमरों, स्पीड कैमरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से नियम उल्लंघन रिकॉर्ड किए जा सकते हैं। इससे पुलिस के लिए चालान जारी करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों ने यह दिखाया कि चालान जारी होने और जुर्माने की वास्तविक वसूली के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।

करीब 49,194.05 करोड़ रुपये की वसूली योग्य राशि और लगभग 26,175.05 करोड़ रुपये की वसूली का आंकड़ा इस अंतर को स्पष्ट करता है।

अदालत इसी कारण recovery mechanism को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

बिजली बिल से वसूली की चर्चा भी हुई, लेकिन यह लिखित आदेश में नहीं

सुनवाई के दौरान बकाया ई-चालान की रकम को बिजली बिल से जोड़कर वसूलने का सुझाव भी चर्चा में आया था। यह खबरों में प्रमुखता से सामने आया।

लेकिन एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है—28 सितंबर के लिखित आदेश में बिजली बिल के साथ ई-चालान जोड़ने की व्यवस्था शामिल नहीं है। लिखित आदेश में वाहन जब्ती, वाहन संबंधी ऑनलाइन सेवाओं पर रोक, PUC और फिटनेस से संबंधित प्रतिबंध, ब्लैकलिस्टिंग तथा कुछ मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी कार्रवाई जैसे उपाय दर्ज हैं।

इसलिए वाहन मालिकों को इस समय लिखित आदेश में दर्ज वास्तविक निर्देशों को ही आधार मानना चाहिए।

क्या पुराने चालान वाले हर वाहन की तुरंत जब्ती होगी?

इस आदेश को समझते समय यह फर्क भी महत्वपूर्ण है कि अदालत ने अधिकारियों को रैंडम चेकिंग और बकाया ई-चालान मिलने पर आवश्यक रूप से वाहन जब्त करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इसका मतलब यह नहीं समझना चाहिए कि देश की हर सड़क पर पुलिस हर ऐसे वाहन को बिना किसी प्रक्रिया के तुरंत उठाकर ले जाएगी।

कार्रवाई संबंधित वाहन, बकाया चालान, लागू नियमों और मौके की जांच के अनुसार होगी।

फिर भी आदेश का उद्देश्य स्पष्ट है—लंबे समय से बकाया ई-चालान को नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति को रोकना और recovery को वास्तविक बनाना।

2012 से चल रहा है मामला

इस पूरे विवाद की जड़ साल 2012 में दायर सड़क सुरक्षा संबंधी जनहित याचिका में है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की लंबे समय से निगरानी कर रहा है।

लगभग 14 वर्षों की निगरानी के बावजूद जब अदालत के सामने यह आंकड़ा आया कि हजारों करोड़ रुपये के चालान अभी भी वसूले जाने बाकी हैं, तो अदालत ने अधिकारियों के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उसके निर्देश केवल कागजों पर रह गए और जमीन पर उनका पालन नहीं हुआ तो आगे अदालत को ऐसे सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, जो अधिकारियों को पसंद नहीं आएंगे।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी बढ़ी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है।

इसके साथ ही अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक enforcement से संबंधित सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 28 अक्टूबर 2025 की SOP को लागू करने की दिशा में भी निर्देश दिए हैं। इसमें CCTV, speed cameras और speed guns जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की निगरानी और कार्रवाई का ढांचा शामिल है।

इससे आने वाले समय में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की पहचान और कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक डिजिटल हो सकती है।

वाहन मालिक अभी क्या करें?

जिन लोगों के वाहन पर पुराना चालान है, उनके लिए सबसे व्यावहारिक कदम यही है कि वे पहले अपने वाहन का e-Challan status जांचें।

यदि कोई वैध बकाया चालान दिखाई देता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निपटाना बेहतर है। यदि किसी चालान को लेकर आपत्ति है या वह गलत तरीके से जारी हुआ है तो संबंधित कानूनी/प्रशासनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सबसे बड़ी गलती यह होगी कि केवल इसलिए चालान को नजरअंदाज किया जाए क्योंकि अभी तक पुलिस ने वाहन नहीं रोका है।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद बकाया चालान की वसूली को केवल डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर छोड़ देने के बजाय जमीन पर कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके ऊपर लंबे समय से ई-चालान लंबित हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि ट्रैफिक नियमों का डिजिटल रिकॉर्ड बना देना ही पर्याप्त नहीं है; उसके बाद लगाए गए जुर्माने की वसूली भी प्रभावी तरीके से होनी चाहिए।

अब रैंडम वाहन चेकिंग के दौरान बकाया ई-चालान मिलने पर वाहन को जब्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा RC की कुछ सेवाएं, फिटनेस सर्टिफिकेट, PUC और Ownership Transfer जैसी सुविधाएं भी प्रभावित होंगी। कई उल्लंघनों वाले मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण और निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है।

देशभर में करीब 49,194.05 करोड़ रुपये के ई-चालान की वसूली का आंकड़ा इस समस्या का पैमाना बताता है। सुप्रीम कोर्ट ने अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की है।

इसलिए अगर आपके वाहन पर पुराना चालान लंबित है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी स्थिति जांचना और कानून के अनुसार उसका निपटारा करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

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संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।