गंगा एक्सप्रेस-वे पर मछली पकड़ने जा सकते हैं? अखिलेश यादव ने सरकार पर कसा तंज, चुनाव आयोग को लेकर भी उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) और सरकार की नीतियों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुए सरकार पर विपक्षी आवाजों को दबाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में बने एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जब सरकार कमजोर होती है तो वह अन्याय का सहारा लेती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के जाने का समय आने पर लोगों पर मुकदमे लगाए जाते हैं और दबाव बनाया जाता है। उनके बयान ऐसे समय आए हैं जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने कहा कि देश की जनता और राजनीतिक दल चुनाव आयोग तथा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है और इन संस्थाओं पर लोगों का भरोसा बना रहना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के माध्यम से चुनाव जीतने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि ये आरोप राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर अपनी प्रक्रियाओं और कानूनी व्यवस्था का हवाला दिया गया है। हाल के दिनों में SIR को लेकर विपक्ष और आयोग के बीच विवाद जरूर तेज हुआ है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन भी हुए हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए थे।
जंतर-मंतर और लखनऊ के प्रदर्शनों का भी जिक्र
अखिलेश यादव ने दिल्ली के जंतर-मंतर और लखनऊ में हुए प्रदर्शनों तथा प्रदर्शनकारियों की हिरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि जो लोग संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें बधाई दी जानी चाहिए।
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे।
लखनऊ में भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। 2 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और विधानसभा की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
यहां यह समझना जरूरी है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोप और चुनाव आयोग की ओर से दिए गए जवाब अलग-अलग दावे हैं। किसी राजनीतिक आरोप को न्यायिक या आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
‘सरकार कमजोर होती है तो अन्याय करती है’
अखिलेश यादव ने अपने बयान में सरकार पर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब किसी सरकार के जाने का समय आता है तो वह कथित तौर पर मुकदमों और दबाव का इस्तेमाल करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता जरूरी है। उनके अनुसार यदि जनता के मन में चुनावी व्यवस्था को लेकर संदेह पैदा होता है तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास प्रभावित हो सकता है।
अखिलेश यादव के ये बयान राजनीतिक आरोपों की श्रेणी में आते हैं। इन दावों के समर्थन में उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का उल्लेख किया है।
महात्मा गांधी और 2 अक्टूबर का भी जिक्र
2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर अखिलेश यादव ने गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों का उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा पर गांधी के विचारों को नहीं मानने का आरोप लगाया।
उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या और उससे जुड़ी विचारधारा का जिक्र करते हुए भाजपा पर राजनीतिक हमला बोला। यह बयान भी उनके राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा है। गांधी की हत्या के मामले में ऐतिहासिक रूप से नाथूराम गोडसे को दोषी ठहराया गया था और अदालत ने उसे सजा दी थी। इसलिए राजनीतिक दलों या विचारधाराओं के बारे में लगाए गए व्यापक आरोपों को उनके संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
गांधी जयंती के दिन उनके विचारों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस होना कोई नई बात नहीं है। अलग-अलग दल गांधी के विचारों और उनकी विरासत को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से प्रस्तुत करते रहे हैं।
अब चर्चा में आया गंगा एक्सप्रेस-वे
अखिलेश यादव ने केवल चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर ही हमला नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेस-वे को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्टार्टअप और डिजिटल इंडिया से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सरकार के विकास कार्यों पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि बारिश के दौरान एक्सप्रेस-वे पर पानी भरने और गड्ढे बनने की स्थिति सामने आई है। इसी संदर्भ में उन्होंने गंगा एक्सप्रेस-वे पर तंज कसते हुए कहा कि यदि इसी तरह पानी बरसता रहा तो वहां मछली पकड़ने जाया जा सकता है।
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी उस घटना के संदर्भ में थी, जिसमें लगातार बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेस-वे के उन्नाव क्षेत्र में एक स्थान पर जलभराव दिखाई दिया और कुछ लोगों को पानी में जाल डालकर मछली पकड़ते हुए देखा गया।
गंगा एक्सप्रेस-वे पर वास्तव में क्या हुआ था?
सितंबर के अंतिम सप्ताह में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गंगा एक्सप्रेस-वे के सोनिक-बशीरतगंज क्षेत्र के आसपास लगातार बारिश के बाद जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। वायरल वीडियो में कुछ स्थानीय लोग पानी में जाल डालकर मछली पकड़ते दिखाई दिए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह जलभराव गंगा एक्सप्रेस-वे के एक्जिट टोल प्लाजा तथा आसपास की सर्विस रोड के क्षेत्र में देखा गया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसी के बाद एक्सप्रेस-वे की जलनिकासी तथा निर्माण गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
हालांकि किसी एक स्थान पर बारिश के बाद जलभराव होने की घटना से पूरे एक्सप्रेस-वे की निर्माण गुणवत्ता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए तकनीकी जांच, जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति, निर्माण मानकों और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट देखना जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी UPEIDA की आधिकारिक वेबसाइट पर गंगा एक्सप्रेस-वे से संबंधित परियोजना दस्तावेज और प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध हैं।
करीब 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजना
गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश की प्रमुख एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में शामिल है। इसकी लंबाई मेरठ से प्रयागराज तक बताई जाती है और परियोजना की लागत करीब 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। ऐसे बड़े बुनियादी ढांचे की परियोजना से लोगों को तेज आवागमन, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद रहती है।
इसी कारण जब एक्सप्रेस-वे के किसी हिस्से में बारिश के बाद जलभराव की तस्वीर सामने आती है तो स्वाभाविक रूप से उसकी गुणवत्ता और ड्रेनेज सिस्टम पर चर्चा शुरू हो जाती है। विपक्ष को सरकार पर हमला करने का राजनीतिक मुद्दा मिलता है, जबकि सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए यह सवाल उठता है कि जलनिकासी व्यवस्था ने उस स्थिति में किस तरह काम किया।
अखिलेश के बयान ने फिर गरम की राजनीतिक बहस
अखिलेश यादव का ‘मछली पकड़ने’ वाला तंज सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि गंगा एक्सप्रेस-वे को उत्तर प्रदेश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।
विपक्ष अक्सर सरकार के विकास कार्यों की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठाता रहा है। दूसरी ओर सरकार की ओर से एक्सप्रेस-वे और हाईवे नेटवर्क को उत्तर प्रदेश के विकास तथा कनेक्टिविटी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में किसी स्थान पर जलभराव की घटना राजनीतिक बहस का विषय बनना स्वाभाविक है।
लेकिन इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पहलुओं को समझना जरूरी है। पहला पहलू यह है कि बारिश के बाद एक स्थान पर जलभराव हुआ और लोगों के मछली पकड़ने का वीडियो सामने आया। दूसरा पहलू यह है कि इस घटना को लेकर एक्सप्रेस-वे की निर्माण गुणवत्ता पर राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। पहला तथ्य मीडिया रिपोर्टों में दर्ज घटना है, जबकि दूसरा राजनीतिक व्याख्या और आरोप का विषय है।
चुनाव आयोग से लेकर एक्सप्रेस-वे तक, निशाने पर सरकार
अखिलेश यादव के हालिया बयान से साफ है कि उन्होंने एक ही बातचीत में कई राजनीतिक मुद्दों को उठाया। एक तरफ उन्होंने चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सामने रखा, तो दूसरी तरफ सरकार की कानून-व्यवस्था और कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए। इसके बाद उन्होंने एक्सप्रेस-वे और बारिश के दौरान जलभराव को लेकर सरकार पर व्यंग्य किया।
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे बयान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकते हैं। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची का मुद्दा पहले से ही विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बहस का विषय बना हुआ है। वहीं विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता भी चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा रहती है।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो अलग-अलग मुद्दों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। चुनाव आयोग को लेकर उन्होंने निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर उठ रहे विपक्षी सवालों को दोहराया, जबकि गंगा एक्सप्रेस-वे पर जलभराव की घटना को लेकर सरकार पर व्यंग्य किया।
गंगा एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से में बारिश के बाद जलभराव और लोगों के मछली पकड़ने का वीडियो सामने आया था। इसी घटना को आधार बनाकर अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसे एक्सप्रेस-वे पर पानी बरसने के बाद मछली पकड़ने जाया जा सकता है।
अब इस घटना का वास्तविक तकनीकी कारण क्या था, जलनिकासी व्यवस्था में कोई कमी थी या असाधारण बारिश के कारण अस्थायी जलभराव हुआ—इसका निष्कर्ष तकनीकी जांच और संबंधित विभाग की रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकता है। राजनीतिक बयान इस घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रिया जरूर सामने ला रहे हैं, लेकिन अंतिम तथ्यात्मक तस्वीर के लिए आधिकारिक जांच और तकनीकी जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।
एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)
वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes
भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।
यह आलेख केवल शैक्षणिक, विधिक जागरूकता और अध्ययन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे आधिकारिक कानूनी सलाह न माना जाए। किसी भी वास्तविक मामले में संबंधित न्यायालय या विशेषज्ञ अधिवक्ता से परामर्श लें।