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10 साल बाद शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ, 70 हजार शिक्षकों को मिलेगा लाभ

UP Teacher Promotion: 10 साल बाद शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ, 70 हजार शिक्षकों को मिलेगा लाभ

         उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति यानी Promotion की प्रक्रिया अब आगे बढ़ने जा रही है। करीब दस वर्षों से प्रमोशन की उम्मीद लगाए बैठे हजारों शिक्षकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभाग ने अब जिलों में वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से प्रदेश के सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को शिक्षकों की Seniority List तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से तय समयसीमा के भीतर यह सूची तैयार करके परिषद कार्यालय को भेजी जाएगी। इसके बाद नवंबर से पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू किए जाने की तैयारी है।

बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया से प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक संख्या वरिष्ठता सूची, स्वीकृत पदों और विभागीय नियमों के अनुसार अंतिम रूप से स्पष्ट होगी।

2016 के बाद से प्रमोशन का इंतजार

परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को अब आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। वर्ष 2016 के बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इस दौरान कई शिक्षक अपनी सेवा अवधि पूरी करते हुए वरिष्ठ पदों के लिए पात्रता की स्थिति में पहुंच गए। लेकिन अलग-अलग कारणों से पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसका असर शिक्षकों के सेवा-करियर के साथ-साथ विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ा।

अब बेसिक शिक्षा परिषद ने जिलों से वरिष्ठता संबंधी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके बाद पात्र शिक्षकों की सूची तैयार कर पदोन्नति के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तीन सप्ताह में तैयार होगी वरिष्ठता सूची

बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जिला स्तर पर Seniority List तैयार करने के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है। परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी के मुताबिक, जिलों को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार करने का काम जल्द पूरा करना होगा।

निर्देश के अनुसार करीब तीन सप्ताह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। इसके बाद सभी जिलों को तैयार सूची 23 अक्टूबर तक परिषद कार्यालय भेजनी होगी।

वरिष्ठता सूची किसी भी पदोन्नति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें शिक्षक की नियुक्ति की तारीख, सेवा अवधि, पद, संबंधित संवर्ग और अन्य आवश्यक सेवा विवरणों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए सूची तैयार करते समय विभाग को रिकॉर्ड का मिलान भी करना होगा।

शिक्षकों के लिए यह चरण इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रमोशन की आगे की प्रक्रिया इसी सूची के आधार पर आगे बढ़ेगी।

नवंबर से शुरू हो सकती है पदोन्नति प्रक्रिया

विभागीय तैयारियों के अनुसार वरिष्ठता सूची मिलने के बाद नवंबर महीने से पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। इसका मतलब यह है कि अक्टूबर में जिलों में जरूरी रिकॉर्ड तैयार करने और वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने का काम किया जाएगा, जबकि नवंबर से पात्र शिक्षकों को पदोन्नति देने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

हालांकि किसी भी शिक्षक के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल वरिष्ठता सूची में नाम होना अपने आप प्रमोशन की अंतिम गारंटी नहीं है। पदोन्नति के दौरान विभागीय नियम, रिक्त पद, पात्रता, आरक्षण से संबंधित प्रावधान और अन्य आवश्यक शर्तों को भी देखा जाएगा।

यानी वरिष्ठता सूची प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन अंतिम पदोन्नति विभागीय नियमों के अनुसार ही होगी।

किन शिक्षकों को मिल सकता है प्रमोशन?

परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति अलग-अलग पदों पर की जाती है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक अध्यापकों को पदोन्नति के बाद प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक अथवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर अवसर मिल सकता है।

इसी तरह प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों को उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नति दिए जाने की व्यवस्था है।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल शिक्षकों को पदोन्नति देना नहीं है, बल्कि विद्यालयों में लंबे समय से खाली या अपेक्षित प्रशासनिक पदों को भरना भी है।

यदि पदोन्नति की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी होती है तो इसका असर विद्यालयों के संचालन पर भी दिखाई दे सकता है।

करीब 70 हजार शिक्षकों को मिल सकता है लाभ

प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या लाखों में है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 3.30 लाख परिषदीय शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से इस बार लगभग 70 हजार शिक्षकों को पदोन्नति प्रक्रिया का लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह संख्या काफी बड़ी है। यही वजह है कि जिला स्तर पर वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों की नजरें विभाग के अगले आदेशों पर टिकी हुई हैं।

हालांकि अंतिम संख्या जिलेवार उपलब्ध पदों और पात्र शिक्षकों के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में शिक्षकों को विभाग की ओर से जारी होने वाली अंतिम सूची और आदेश का इंतजार करना होगा।

RTE के तहत प्रधानाध्यापक पदों का प्रावधान

विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों की आवश्यकता विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर भी जुड़ी हुई है। शिक्षा का अधिकार यानी Right to Education (RTE) Act के प्रावधानों के तहत विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुपात के अनुसार शिक्षकों और प्रधानाध्यापक के पदों का निर्धारण किया जाता है।

प्राथमिक विद्यालयों में निर्धारित छात्र संख्या के आधार पर प्रधानाध्यापक का पद स्वीकृत होता है। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी छात्र संख्या के अनुसार प्रधानाध्यापक पद की व्यवस्था होती है।

इसी पद संरचना को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। जहां स्वीकृत पद उपलब्ध होंगे, वहां नियमों के अनुसार पात्र शिक्षकों को पदोन्नति देने की कार्रवाई की जाएगी।

वरिष्ठता सूची में गलती हुई तो क्या होगा?

शिक्षकों के लिए वरिष्ठता सूची का महत्व काफी अधिक है। यदि किसी शिक्षक का नाम गलत क्रम में दर्ज होता है या सेवा संबंधी रिकॉर्ड में कोई त्रुटि रहती है तो इसका असर उसकी पदोन्नति पर पड़ सकता है।

इसलिए जिला स्तर पर तैयार होने वाली सूची को लेकर शिक्षक भी अपने सेवा अभिलेखों की जानकारी पर नजर रख सकते हैं। नियुक्ति की तारीख, पद, सेवा अवधि और अन्य रिकॉर्ड में किसी प्रकार की विसंगति होने पर विभागीय स्तर पर उसका निराकरण कराया जाना महत्वपूर्ण होगा।

पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ विभाग की ओर से आपत्तियों और दावों के संबंध में भी आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं। ऐसे में शिक्षकों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और विभागीय आदेशों पर ध्यान देना होगा।

लंबे समय से मांग कर रहे थे शिक्षक संगठन

शिक्षकों के प्रमोशन का मुद्दा लंबे समय से शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति नहीं होने से बड़ी संख्या में शिक्षक एक ही पद पर सेवा करते रहे।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की ओर से भी इस मामले में खुशी जाहिर की गई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह और प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया है।

संगठन की ओर से कहा गया है कि शिक्षक काफी समय से प्रमोशन की मांग कर रहे थे। लंबे इंतजार के बाद प्रक्रिया शुरू होने से शिक्षकों को राहत मिलेगी।

संगठन ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार भी व्यक्त किया है।

प्रमोशन से विद्यालयों को भी मिलेगा फायदा

पदोन्नति को सामान्य तौर पर शिक्षक के व्यक्तिगत सेवा लाभ के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका सीधा संबंध विद्यालयों की व्यवस्था से भी है।

किसी विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद लंबे समय तक खाली रहने पर प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी दूसरे शिक्षक या प्रभारी प्रधानाध्यापक के ऊपर आ सकती है। इससे विद्यालय के दैनिक प्रशासन, रिकॉर्ड, विद्यार्थियों की व्यवस्था और विभागीय कामकाज पर अतिरिक्त जिम्मेदारी पड़ती है।

यदि पदोन्नति के माध्यम से प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति होती है तो विद्यालयों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बेहतर वितरण हो सकता है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की उपलब्धता बढ़ने से शिक्षण व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव पदोन्नति के बाद होने वाले स्थानांतरण और तैनाती की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

शिक्षकों में बढ़ी उम्मीद

प्रमोशन की खबर सामने आने के बाद उन शिक्षकों की उम्मीद बढ़ी है जो लंबे समय से विभागीय प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे। खासकर वे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि काफी अधिक हो चुकी है, उनके लिए वरिष्ठता सूची और आगामी पदोन्नति प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दस वर्षों का इंतजार किसी भी कर्मचारी के लिए लंबा समय होता है। इस दौरान कई शिक्षकों की सेवा संबंधी परिस्थितियां भी बदल चुकी हैं। ऐसे में अब विभाग के सामने चुनौती यह भी होगी कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से और निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा किया जाए।

जिला स्तर पर वरिष्ठता सूची तैयार होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी कि किस जिले में कितने शिक्षक पदोन्नति के दायरे में आ रहे हैं और कितने स्वीकृत पद उपलब्ध हैं।

अक्टूबर में पूरी होगी तैयारी, नवंबर में कार्रवाई की उम्मीद

पूरी प्रक्रिया को मोटे तौर पर देखें तो अक्टूबर महीना रिकॉर्ड और वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। जिलों को निर्धारित समय के भीतर सूची तैयार करके परिषद कार्यालय भेजनी है।

23 अक्टूबर तक सूची भेजे जाने के बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद नवंबर से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।

इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। शिक्षकों की निगाहें अब वरिष्ठता सूची, जिलेवार रिक्त पदों और पदोन्नति से जुड़े अगले विभागीय आदेश पर रहेंगी।

अभी शिक्षकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

शिक्षकों को फिलहाल सबसे पहले अपने सेवा संबंधी रिकॉर्ड की जानकारी सही रखना चाहिए। वरिष्ठता सूची जारी होने पर उसमें अपना नाम, वरिष्ठता क्रम और अन्य विवरण ध्यान से देखना उपयोगी होगा।

यदि विभाग की ओर से आपत्ति या संशोधन का अवसर दिया जाता है तो निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया जा सकता है।

साथ ही शिक्षकों को सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा परिषद और अपने जिला कार्यालय से जारी आधिकारिक आदेशों पर भरोसा करना चाहिए।

क्योंकि पदोन्नति की अंतिम स्थिति केवल विभागीय आदेश और नियमों के आधार पर ही तय होगी।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए लंबे समय बाद पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की खबर महत्वपूर्ण है। वर्ष 2016 के बाद से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों के बीच अब उम्मीद जगी है कि वरिष्ठता सूची तैयार होने के बाद प्रक्रिया वास्तव में आगे बढ़ेगी।

बेसिक शिक्षा परिषद ने जिलों को वरिष्ठता सूची तैयार करने और उसे निर्धारित समय में परिषद कार्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। 23 अक्टूबर तक सूची भेजे जाने और नवंबर से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी शिक्षकों के लिए इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

करीब 70 हजार शिक्षकों को संभावित रूप से इसका लाभ मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि वास्तविक लाभार्थियों की संख्या जिलेवार पदों, पात्रता और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की प्रशासनिक तैयारी शुरू हो चुकी है। अब वरिष्ठता सूची के बाद आने वाले विभागीय आदेश यह तय करेंगे कि किस शिक्षक को किस पद पर और किस स्थान पर पदोन्नति मिलेगी।

यदि पूरी प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती है, तो नवंबर का महीना उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित पदोन्नति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।

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संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।