SIR को लेकर चुनाव आयोग के 13 बड़े फैसले: अब घर जाकर दस्तावेज लेंगे BLO, दिल्ली-महाराष्ट्र में बढ़ी दावा-आपत्ति की समय-सीमा
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और देशभर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर 26 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहे। आयोग की ओर से बैठक के बाद SIR, मतदाताओं की सुविधा, आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और डिजिटल सिस्टम से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों तथा स्पष्टीकरणों की जानकारी दी गई।
बैठक ऐसे समय हुई है जब SIR की प्रक्रिया और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज है। आयोग ने अपने स्तर पर कई प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित करने की बात कही है। खास तौर पर उन मतदाताओं को राहत देने का निर्णय महत्वपूर्ण है जिन्हें ‘unmapped’ या ‘logical discrepancy’ जैसे कारणों से नोटिस जारी हुए हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेज जमा करने के लिए मतदाता को हर स्थिति में ERO या AERO कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। BLO घर जाकर दस्तावेज प्राप्त कर उन्हें डिजिटल सिस्टम पर अपलोड करेंगे।
बैठक से पहले एजेंडा और बाद में मिनट्स जारी करने की व्यवस्था
आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब आयोग की बैठकों के लिए Agenda पहले से circulate किया जाएगा और बैठक की कार्यवाही के Minutes जारी किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आयोग की निर्णय प्रक्रिया को अधिक संस्थागत और व्यवस्थित बनाना है। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि किसी बैठक में किन विषयों पर विचार किया गया और उन पर क्या निर्णय हुआ।
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके निर्णयों का सीधा संबंध देश की चुनावी प्रक्रिया से होता है। ऐसे में बैठक की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयोग ने अधिकारियों की जवाबदेही से संबंधित कुछ अन्य प्रशासनिक निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें अधिकारियों की APAR समय पर पूरा करने और विदेश यात्रा से पहले आयोग की अनुमति लेने जैसे विषय शामिल हैं।
SIR में ‘Unmapped’ मतदाताओं को बड़ी राहत
बैठक में SIR से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक उन मतदाताओं को लेकर है जिन्हें unmapped records अथवा logical discrepancies के आधार पर नोटिस मिला है।
अब ऐसे मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने के लिए अनावश्यक रूप से चुनाव कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित Booth Level Officer (BLO) मतदाता के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे।
इसके बाद दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जाएगा और संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) उन्हें देखकर आगे की कार्रवाई करेंगे। व्यक्तिगत सुनवाई की आवश्यकता केवल ऐसे मामलों में होगी, जहां ERO उसे आवश्यक समझे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ऐसी सुनवाई ऑनलाइन किए जाने की व्यवस्था भी की गई है।
इसका व्यावहारिक असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्हें SIR के दौरान किसी रिकॉर्ड के मेल न खाने या पुराने रिकॉर्ड से mapping नहीं होने के कारण नोटिस मिला है। खासकर बुजुर्ग, दिव्यांग, मजदूर या ऐसे लोग जिन्हें चुनाव कार्यालय तक पहुंचने में परेशानी होती है, उनके लिए घर पर दस्तावेज लेने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
BLO की भूमिका और बढ़ेगी
SIR की पूरी प्रक्रिया में BLO जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पहले भी आयोग ने SIR के दौरान BLOs को घर-घर जाकर Enumeration Forms के वितरण और संग्रह का काम सौंपा था। ECI के अनुसार SIR प्रक्रिया में BLO स्तर पर बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी जुड़े हैं।
अब नोटिस प्राप्त करने वाले कुछ मतदाताओं के दस्तावेज घर से एकत्र करने की जिम्मेदारी भी BLO की भूमिका को और महत्वपूर्ण बनाती है।
ECI के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET में भी BLO से सीधे संपर्क की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आयोग ने जनवरी 2026 में ECINET को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया था, जिसमें मतदाता सेवाओं के साथ BLO से संपर्क और अन्य चुनावी सेवाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।
बेघर, मजदूर और गरीब मतदाताओं के लिए विशेष कैंप
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि ऐसे वर्गों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए जो सामान्य परिस्थितियों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
इसमें रैन बसेरों में रहने वाले बेघर लोग, मजदूर, गरीब और अन्य वंचित वर्ग शामिल हैं। इनके लिए विशेष कैंप और हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला स्तर पर District Election Officers (DEOs) को इस दिशा में आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि केवल इसलिए कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रह जाए क्योंकि वह दस्तावेज जमा करने या चुनाव कार्यालय तक पहुंचने में सक्षम नहीं था।
छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान यदि किसी पात्र नागरिक का नाम छूट गया है तो उसके लिए नाम शामिल कराने की प्रक्रिया बंद नहीं हो जाती।
आयोग के अनुसार SIR पूरा होने के बाद भी पात्र नागरिक Continuous Updation के माध्यम से संबंधित ERO के समक्ष नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहली बार मतदान करने वाले युवा भी इस प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। संबंधित CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
गोवा में भी छूटे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए BLO द्वारा घर-घर जाकर Form-6 से संबंधित कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली में 30 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां
SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर दिल्ली के मतदाताओं के लिए भी बदलाव किया गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
इससे उन मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा जिन्हें अपने नाम, दस्तावेज या मतदाता सूची में दर्ज विवरण को लेकर आपत्ति या दावा दाखिल करना है।
महाराष्ट्र में भी बढ़ी समय-सीमा
महाराष्ट्र के लिए भी SIR की समय-सीमा में बदलाव किया गया है।
अब वहां दावे और आपत्तियां 12 अक्टूबर 2026 तक दाखिल की जा सकेंगी। इनके निपटारे की अंतिम समय-सीमा 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
इस फैसले से उन मतदाताओं को अतिरिक्त अवसर मिलेगा जिन्हें निर्धारित अवधि में अपने दावे या आपत्तियां दाखिल करने में कठिनाई हुई है।
अधिकारियों की APAR समय-सीमा तय
आयोग ने प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की Annual Performance Appraisal Report (APAR) को लेकर भी निर्देश दिया है।
इसके अनुसार अधिकारियों की APAR प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक पूरी किए जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
APAR सरकारी अधिकारियों की सेवा संबंधी महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। इसे समय पर पूरा करने का उद्देश्य अधिकारियों के कार्य का निर्धारित प्रक्रिया के तहत मूल्यांकन सुनिश्चित करना है।
विदेश यात्रा के लिए आयोग की पूर्व अनुमति
आयोग ने अपने अधिकारियों की विदेश यात्रा को लेकर भी प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट किया है।
निर्देश के अनुसार चुनाव आयोग से संबंधित अधिकारियों के लिए विदेश यात्रा से पहले पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसका संबंध आयोग के प्रशासनिक नियंत्रण और अधिकारियों की जवाबदेही से जोड़ा गया है।
ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवैधानिक संस्था से जुड़े अधिकारी आधिकारिक दायित्वों और प्रशासनिक अनुमति की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें।
कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग की सफाई
बैठक में उस पत्र को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया गया जिसे आयोग की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे जाने की चर्चा हुई थी।
आयोग ने कहा कि यह पत्र किसी चुनावी नीति अथवा ECI के IT Division से संबंधित नीतिगत निर्णय के संबंध में नहीं था। आयोग के स्पष्टीकरण के मुताबिक मामला प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए एक अधिकारी के कामकाज और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से संबंधित था।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि IT Division की निगरानी से संबंधित अधिकार वापस लेने की बात सही नहीं थी।
SIR का फैसला सर्वसम्मति से लेने का दावा
बैठक के बाद आयोग ने SIR को लेकर उठे सवालों के बीच अपने फैसले की प्रक्रिया पर भी स्थिति स्पष्ट की।
आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 को देशभर में SIR कराने का निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से लिया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि SIR और उससे संबंधित तकनीकी व्यवस्थाओं से जुड़े अंतिम निर्णय तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर मीडिया में अलग-अलग रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। इन रिपोर्टों में अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ मामलों में लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया था। दूसरी ओर आयोग ने कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत सामने आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा
आयोग ने यह भी बताया कि 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं।
साथ ही आयोग ने कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम SIR के दौरान छूट गए हैं, उन्हें नाम शामिल कराने का अवसर उपलब्ध रहेगा। इसके लिए संबंधित राज्यों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह व्यवस्था खास तौर पर उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनका नाम किसी कारणवश संशोधित मतदाता सूची में नहीं आ पाया।
ECINet के लिए विशेषज्ञ समिति
चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
ECINet के रोल-बेस्ड एक्सेस और उससे जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें IIT और IIIT के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
इसका उद्देश्य डिजिटल सिस्टम में अलग-अलग अधिकारियों की भूमिका और उनके access rights की समीक्षा करना है, ताकि प्रत्येक अधिकारी को उसकी जिम्मेदारी के अनुसार ही सिस्टम तक पहुंच मिले।
ECI पहले ही ECINET को चुनाव संबंधी विभिन्न सेवाओं के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित कर चुका है। आयोग के अनुसार इसमें 40 से अधिक ऐप और पोर्टल से संबंधित सेवाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।
नए IT प्रोजेक्ट बिना समीक्षा के लागू नहीं होंगे
आयोग ने IT से संबंधित नए प्रोजेक्ट को लेकर भी प्रक्रिया तय की है।
अब कोई नया IT Project या Portal सीधे लागू नहीं किया जाएगा। पहले उसे Committee of Officers (COO) के सामने रखा जाएगा। आवश्यक चर्चा और समीक्षा के बाद ही आगे की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होगी।
इससे तकनीकी परियोजनाओं के संबंध में प्रशासनिक और तकनीकी समीक्षा को संस्थागत रूप देने की कोशिश दिखाई देती है।
ECI के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी प्रक्रिया में डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति, BLO से संपर्क और मतदाता सूची से संबंधित कई सेवाएं अब डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
26 सितंबर की बैठक के फैसलों को एक साथ देखें तो इनमें तीन प्रमुख क्षेत्र दिखाई देते हैं—SIR में मतदाताओं की सुविधा, आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली में प्रक्रिया की स्पष्टता और IT व्यवस्था की समीक्षा।
मतदाताओं के लिए सबसे प्रत्यक्ष बदलाव BLO द्वारा घर जाकर दस्तावेज लेने की व्यवस्था है। इससे नोटिस प्राप्त करने वाले कई मतदाताओं को कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
दूसरी ओर बैठक का एजेंडा पहले साझा करने और मिनट्स जारी करने की व्यवस्था आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को अधिक दस्तावेजीकृत बनाने की दिशा में कदम है।
IT के क्षेत्र में विशेषज्ञ समिति और नए प्रोजेक्ट के लिए Committee of Officers की समीक्षा का उद्देश्य तकनीकी निर्णयों में अतिरिक्त संस्थागत निगरानी सुनिश्चित करना है।
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग की 26 सितंबर 2026 की बैठक में SIR से संबंधित प्रक्रिया, मतदाताओं की सुविधा, अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही और डिजिटल चुनावी ढांचे को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश सामने आए हैं। खास तौर पर घर-घर दस्तावेज संग्रह, विशेष सहायता कैंप, छूटे मतदाताओं के लिए अभियान और दिल्ली-महाराष्ट्र में दावा-आपत्ति की बढ़ी समय-सीमा सीधे मतदाताओं से जुड़े फैसले हैं।
नोट: SIR से संबंधित तारीखों और प्रक्रियाओं में राज्यवार बदलाव संभव हैं। मतदाताओं को अपने राज्य के Chief Electoral Officer/ECI की आधिकारिक सूचना के आधार पर अंतिम समय-सीमा और प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।
एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)
वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes
भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।
यह आलेख केवल शैक्षणिक, विधिक जागरूकता और अध्ययन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे आधिकारिक कानूनी सलाह न माना जाए। किसी भी वास्तविक मामले में संबंधित न्यायालय या विशेषज्ञ अधिवक्ता से परामर्श लें।