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गाजा में युद्ध के बीच महिलाओं और बच्चियों पर बढ़ी हिंसा, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न के मामलों में तेज इजाफा

गाजा में युद्ध के बीच महिलाओं और बच्चियों पर बढ़ी हिंसा, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न के मामलों में तेज इजाफा

गाजा में जारी युद्ध, लगातार विस्थापन, भोजन और जरूरी सामान की कमी के बीच महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा का संकट और गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की सितंबर 2026 में जारी रिपोर्ट में बाल और जबरन विवाह, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा तथा महिलाओं को जरूरी संसाधनों से वंचित किए जाने के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच दर्ज बाल और जबरन विवाह के मामलों में 123 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

UNFPA की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट “I Want to Feel Safe Again: Women’s Voices From Displacement Camps in Khan Younis and Gaza City” में गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं के अनुभवों को शामिल किया गया है। इन महिलाओं से दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान 16 समूह चर्चाओं के माध्यम से बातचीत की गई थी। रिपोर्ट का उद्देश्य युद्ध और विस्थापन के बीच महिलाओं तथा लड़कियों के सामने पैदा हो रहे लैंगिक हिंसा के जोखिमों को समझना है।

UNFPA के अनुसार, महिलाओं और लड़कियों के सामने मौजूद जोखिम केवल युद्ध क्षेत्र या सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं हैं। विस्थापन शिविरों की भीड़, निजता का अभाव, आर्थिक संकट, परिवारों का बिखरना, स्कूलों का बंद होना और जरूरी सेवाओं की कमी ने कई स्तरों पर उनकी असुरक्षा बढ़ाई है।

बाल और जबरन विवाह के मामलों में 123 प्रतिशत वृद्धि

UNFPA के सितंबर 2026 के आकलन के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच गाजा में रिपोर्ट किए गए बाल और जबरन विवाह के मामलों में 123 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। संयुक्त राष्ट्र संस्था ने इस वृद्धि को भूख, गरीबी, आय के साधनों की कमी, विस्थापन और शिक्षा के बाधित होने जैसी परिस्थितियों से जोड़ा है।

रिपोर्ट में सामने आए कुछ मामलों में परिवारों ने आर्थिक मजबूरी और असुरक्षा के कारण कम उम्र की लड़कियों की शादी करा दी। एक मामले में 14 वर्षीय लड़की की शादी दो बोरी आटे के बदले किए जाने की जानकारी दी गई। यह घटना इस बात को सामने लाती है कि जब परिवारों के सामने भोजन और सुरक्षित रहने की समस्या खड़ी हो जाती है, तो बच्चों की सुरक्षा और भविष्य भी गंभीर जोखिम में आ जाते हैं।

UNFPA ने इससे पहले अप्रैल 2026 में भी चेतावनी दी थी कि गाजा में युद्ध और विस्थापन के बीच बाल विवाह को कुछ परिवार जीवित रहने की रणनीति के रूप में देखने लगे हैं। संस्था के अनुसार, कई जगहों पर विस्थापन, असुरक्षा, शिक्षा का टूटना और देखभाल करने वाले परिवार के सदस्यों की मौत ने किशोरियों की स्थिति को और कमजोर किया है।

यौन हिंसा के मामलों में भी तेजी

गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं को लेकर भी UNFPA ने गंभीर स्थिति दर्ज की है। अप्रैल से जून 2026 के बीच रिपोर्ट किए गए यौन हिंसा के मामलों में जनवरी से मार्च की तुलना में 61 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इसी अवधि में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ दर्ज कुल लैंगिक हिंसा के मामलों में भी 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल-जून के दौरान दर्ज लैंगिक हिंसा के मामलों में जरूरी संसाधनों, अवसरों और सेवाओं से वंचित किया जाना सबसे बड़ी श्रेणियों में रहा। भावनात्मक हिंसा और शारीरिक हमले के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आए।

हालांकि, इन आंकड़ों को गाजा में हिंसा की वास्तविक कुल संख्या नहीं माना जा सकता। UNFPA के पिछले विश्लेषणों में भी बताया गया है कि यौन हिंसा के अनेक मामले सामाजिक बदनामी, प्रतिशोध के डर, सेवाओं की जानकारी की कमी और कमजोर न्याय व्यवस्था के कारण रिपोर्ट नहीं हो पाते।

विस्थापन शिविरों में भी सुरक्षित नहीं महिलाएं

UNFPA से बातचीत के दौरान महिलाओं ने बताया कि यौन हिंसा के मामले केवल घरों में ही नहीं बल्कि टेंट, स्कूलों में बनाए गए अस्थायी आश्रयों, गलियों और अन्य स्थानों पर भी सामने आए।

विस्थापन शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों का सीमित स्थान में रहना महिलाओं के लिए निजता और सुरक्षा दोनों की समस्या बन गया है। कई परिवारों को ऐसे स्थानों में रहना पड़ रहा है जहां अलग-अलग सदस्यों के लिए निजी जगह उपलब्ध नहीं है।

रिपोर्ट में एक महिला ने बताया कि उसके पति ने बच्चों के सामने यौन संबंध बनाने की मांग की। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे गंभीर चोटें आईं। बाद में उसके साथ स्कूल के बाथरूम में भी जबरन यौन संबंध बनाए गए।

UNFPA का कहना है कि वैवाहिक यौन हिंसा को केवल युद्ध के बाद पैदा हुई समस्या नहीं माना जा सकता, लेकिन युद्ध और विस्थापन की परिस्थितियों ने इसके जोखिम को बढ़ाने वाली परिस्थितियां पैदा की हैं।

रेप के बाद पीड़िताओं पर शादी का दबाव

रिपोर्ट में कुछ ऐसे मामलों का भी उल्लेख है जिनमें यौन हिंसा की पीड़ित महिलाओं और लड़कियों पर सामाजिक बदनामी से बचने तथा परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखने के नाम पर शादी करने का दबाव डाला गया।

कुछ मामलों में कथित तौर पर पीड़िता की शादी आरोपी या किसी दूसरे व्यक्ति से कराने की कोशिश की गई। एक महिला ने बताया कि स्कूल में बलात्कार की घटना सामने आने के अगले ही दिन उसी स्थान पर शादी और समारोह आयोजित किया गया।

ऐसे मामलों में पीड़िता को न्याय और चिकित्सा सहायता देने के बजाय सामाजिक दबाव के तहत विवाह की ओर धकेलना उसकी स्थिति को और जटिल बना सकता है।

दिव्यांग लड़कियों के सामने अतिरिक्त खतरा

रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को विशेष रूप से संवेदनशील समूह के रूप में सामने रखा गया है। UNFPA के अनुसार, ऐसी महिलाओं को हिंसा से बचने, घटना की जानकारी देने और सहायता सेवाओं तक पहुंचने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

एक मामले में एक दिव्यांग लड़की लगभग सात घंटे तक लापता रही। घर लौटने पर वह रो रही थी, लेकिन परिवार ने उसके व्यवहार को डर का परिणाम समझा। लगभग दो महीने बाद उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई और बाद में पता चला कि उसके साथ यौन हिंसा हुई थी।

एक अन्य मामले में ऐसी 20 वर्षीय महिला के यौन उत्पीड़न की जानकारी दी गई है जिसे बातचीत और परिस्थितियों को समझने में कठिनाई होती थी।

माता-पिता की मौत के बाद नाबालिग लड़कियों की शादी

युद्ध के कारण माता-पिता या देखभाल करने वाले लोगों को खो चुकी नाबालिग लड़कियों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।

रिपोर्ट में एक महिला ने बताया कि उसके परिवार से जुड़ी 14 और 15 वर्ष की दो लड़कियों ने युद्ध में अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उनके चाचाओं ने दोनों की शादी करा दी।

बताया गया कि चाचा उनकी जिम्मेदारी और खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं थे। ऐसे हालात में दोनों लड़कियों का विवाह कम उम्र में कर दिया गया।

युद्ध में परिवार के सदस्यों की मौत और विस्थापन के कारण बच्चों की देखभाल करने वाली पारिवारिक व्यवस्था कमजोर हुई है। इससे विशेष रूप से उन लड़कियों के सामने जोखिम बढ़ता है जो अपने माता-पिता या स्थायी अभिभावक को खो चुकी हैं।

घर की चारदीवारी में भी बढ़ी हिंसा

गाजा में महिलाओं के लिए हिंसा का खतरा केवल बाहरी परिस्थितियों तक सीमित नहीं है। UNFPA की रिपोर्ट में घरेलू हिंसा के मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

महिलाओं ने बताया कि घर तबाह होने, रोजगार खत्म होने, गरीबी, लगातार विस्थापन और भविष्य की अनिश्चितता ने परिवारों के भीतर तनाव बढ़ाया है। कुछ महिलाओं के अनुसार, पहले अपेक्षाकृत शांत रहने वाले पति भी आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण आक्रामक व्यवहार करने लगे।

एक महिला ने बताया कि युद्ध से पहले उसका पति उस पर गुस्सा नहीं करता था। लेकिन घर और संपत्ति खोने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आया और वह पत्नी तथा बच्चों पर अपना गुस्सा निकालने लगा।

UNFPA के अप्रैल-जून 2026 के विश्लेषण में भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक हिंसा तथा संसाधनों से वंचित करना भी लैंगिक हिंसा की प्रमुख श्रेणियों में शामिल रहा।

भोजन और मानवीय सहायता पर भी नियंत्रण

गाजा में भोजन और जरूरी सामान की कमी के बीच महिलाओं ने सहायता सामग्री और आर्थिक मदद पर नियंत्रण को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई हैं।

कुछ महिलाओं ने बताया कि उनके पति मानवीय सहायता के रूप में मिलने वाले पैसे या सामान पर नियंत्रण रखते हैं। एक महिला के अनुसार, उसे फोन पर मिलने वाले राहत संबंधी संदेश तक मिटाने पड़ते हैं क्योंकि उसे डर रहता है कि पति को सहायता की जानकारी मिलने पर वह उसे और बच्चों को मिलने वाली मदद रोक सकता है।

कुछ मामलों में महिलाओं ने यह भी बताया कि परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने के बजाय पति पैसे सिगरेट या नशे जैसी चीजों पर खर्च कर देते हैं। विरोध करने पर महिलाओं के साथ मारपीट की जाती है।

UNFPA के विश्लेषण में जरूरी संसाधनों, अवसरों और सेवाओं से वंचित करना लगातार रिपोर्ट की जाने वाली लैंगिक हिंसा की प्रमुख श्रेणी रही है।

हिंसा के बावजूद घर लौटने की मजबूरी

कई महिलाएं घरेलू हिंसा से बचने के लिए अपना घर छोड़ना चाहती हैं, लेकिन सुरक्षित आश्रय, आर्थिक साधनों और बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की कमी उन्हें वापस उसी वातावरण में जाने के लिए मजबूर करती है।

रिपोर्ट में एक महिला ने बताया कि उसका पति उसे पीटता था, गालियां देता था और यौन हिंसा करता था। जब पति को उसके द्वारा मदद लेने की कोशिश का पता चला तो उसने महिला को बांध दिया और बाल पकड़कर घसीटा।

गंभीर चोटों के बावजूद महिला बाद में पति के पास लौट गई। उसके सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उसके पास रहने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं था और वह अपने बच्चों से अलग होकर कहीं नहीं जाना चाहती थी।

यह स्थिति बताती है कि हिंसा से बाहर निकलने के लिए केवल शिकायत दर्ज कराने की सुविधा पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित आवास, आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं, कानूनी मदद और बच्चों की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं भी आवश्यक होती हैं।

भीड़भाड़ ने बढ़ाया पारिवारिक तनाव

विस्थापन शिविरों में रहने की परिस्थितियां भी महिलाओं और बच्चों के लिए परेशानी बढ़ा रही हैं। एक छोटे टेंट में कई लोगों के रहने से निजी जीवन लगभग समाप्त हो जाता है।

रिपोर्ट में परिवार के सदस्यों के बीच बढ़ते तनाव के कई उदाहरण दिए गए हैं। महिलाओं ने भाइयों द्वारा बहनों के साथ मारपीट और बुजुर्ग महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं की जानकारी दी।

एक महिला ने बताया कि पड़ोस के टेंट में एक व्यक्ति अपनी बुजुर्ग मां को इसलिए पीटता था क्योंकि वह बिस्तर गीला कर देती थीं और परिवार के लिए डायपर खरीदना महंगा था।

ऐसी घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि युद्ध का असर केवल प्रत्यक्ष हिंसा तक सीमित नहीं रहता। भोजन, पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं, आवास और निजी स्थान की कमी परिवारों के भीतर तनाव को बढ़ा सकती है।

रिपोर्ट किए गए मामलों में वृद्धि के पीछे एक और कारण

UNFPA ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामलों की संख्या बढ़ने का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि वास्तविक घटनाओं में उसी अनुपात में वृद्धि हुई है। रिपोर्ट किए गए मामलों में बढ़ोतरी के पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि महिलाओं और लड़कियों के लिए सहायता सेवाओं और सुरक्षित स्थानों की पहुंच कुछ हद तक बढ़ी है।

UNFPA के अनुसार, गाजा में लगभग 500 विस्थापन स्थलों पर रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच आसान नहीं है। Women and Girls Safe Spaces कई महिलाओं के लिए हिंसा की जानकारी देने और

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संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।