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वैष्णो देवी मंदिर में 550 करोड़ की चांदी पर जांच जारी, कोर्ट ने जांच अधिकारी को दिया और समय

वैष्णो देवी मंदिर में 550 करोड़ की चांदी पर जांच जारी, कोर्ट ने जांच अधिकारी को दिया और समय; 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

       जम्मू। माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई चांदी को लेकर उठे गंभीर सवालों की जांच अभी जारी है। जम्मू की अदालत ने मामले की पड़ताल कर रहे जांच अधिकारी को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध स्वीकार कर लिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े बड़ी मात्रा में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच बाकी है। इन सभी सामग्रियों का आपस में मिलान करने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।

यह मामला जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अधिवक्ता दीपक शर्मा की शिकायत के आधार पर चल रहा है। शिकायत में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई लगभग 20 टन चांदी के संबंध में कथित मिलावट, अदला-बदली, चोरी, गबन और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे आरोपों की व्यापक जांच की मांग की गई है। शिकायत में इस चांदी का अनुमानित मूल्य करीब 550 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच हो रही है और अदालत ने इन्हें अंतिम रूप से सत्यापित नहीं किया है।

मामले में अब अदालत ने जांच अधिकारी को और समय दे दिया है। अगली सुनवाई के लिए 10 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल जांच एजेंसी को उपलब्ध रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक तथा दस्तावेजी सामग्री की विस्तृत पड़ताल पूरी करने का अवसर मिलेगा।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह विवाद उस समय सामने आया जब श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की ओर से वर्षों से जमा चांदी के चढ़ावे को आगे की प्रक्रिया के लिए सरकारी मिंट भेजे जाने की खबर सामने आई।

रिपोर्टों के मुताबिक करीब 20 टन चांदी या चांदी के रूप में दर्ज चढ़ावे को पिघलाने और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया था। इसके बाद परीक्षण से संबंधित रिपोर्टों में कथित तौर पर चांदी की मात्रा उम्मीद से काफी कम होने की बात सामने आई। विभिन्न रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि सामग्री में वास्तविक चांदी की मात्रा लगभग 5 से 6 प्रतिशत के आसपास थी और बाकी सामग्री में अन्य धातुएं शामिल थीं।

यही वह बिंदु था जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।

अगर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई सामग्री को चांदी के रूप में दर्ज किया गया था और बाद में उसमें बड़ी मात्रा में दूसरी धातुओं की मौजूदगी सामने आई, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि ऐसा अंतर पैदा कैसे हुआ।

क्या श्रद्धालुओं ने ऐसी वस्तुएं चढ़ाईं जिन्हें चांदी समझा गया था? क्या बाजार से ही मिलावटी या नकली सामग्री खरीदकर मंदिर में चढ़ाई गई? या फिर चढ़ावे के मंदिर की निगरानी में आने के बाद किसी स्तर पर उसमें बदलाव हुआ?

फिलहाल यही वे सवाल हैं जिनका जवाब जांच के जरिए तलाशा जा रहा है।

अधिवक्ता दीपक शर्मा ने क्या आरोप लगाए?

इस मामले में अधिवक्ता दीपक शर्मा की ओर से शिकायत दाखिल की गई है। उन्होंने पुलिस और जांच एजेंसियों से पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

शिकायत में कथित तौर पर चांदी के चढ़ावे में मिलावट, असली और नकली सामग्री की अदला-बदली, चोरी या पिलफरेज, गबन और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे पहलुओं की जांच की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि बड़ी मात्रा में चढ़ावे में ऐसी सामग्री मिली जो अपेक्षित मात्रा में चांदी नहीं थी, तो उसकी पूरी सप्लाई चेन और custody chain की जांच होनी चाहिए।

यानी जांच सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं रहनी चाहिए कि सामग्री में कितनी चांदी थी। यह भी देखा जाना चाहिए कि वह सामग्री श्रद्धालु से मंदिर तक कैसे पहुंची, मंदिर में उसे किस तरह प्राप्त किया गया, उसका वजन कैसे किया गया, रिकॉर्ड में क्या दर्ज हुआ, उसे कहां रखा गया और फिर सरकारी मिंट तक पहुंचाने के दौरान किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी रही।

इसी वजह से मामले में दस्तावेजी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जांच अधिकारी ने और समय क्यों मांगा?

मामले की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी ने अदालत के समक्ष वस्तुस्थिति रिपोर्ट पेश करते हुए जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।

जांच अधिकारी के मुताबिक मामले में दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री काफी मात्रा में है। ऐसे में केवल रिकॉर्ड इकट्ठा करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक रिकॉर्ड का दूसरे रिकॉर्ड से मिलान करना जरूरी है।

उदाहरण के लिए चांदी के चढ़ावे से जुड़े स्टॉक रजिस्टर, इन्वेंट्री रिकॉर्ड, वजन संबंधी रिकॉर्ड, भंडारण का विवरण, परिवहन दस्तावेज, परीक्षण या assay रिपोर्ट और सरकारी मिंट से संबंधित रिकॉर्ड को एक-दूसरे से मिलाना होगा।

इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी महत्वपूर्ण हो सकती है। फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि चढ़ावे की सामग्री को किस स्थान पर रखा गया, उसे किसने संभाला और वह कब एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाई गई।

अदालत के सामने जांच अधिकारी का कहना था कि अंतिम रिपोर्ट देने से पहले इन सभी सामग्रियों की विस्तृत जांच और cross-verification आवश्यक है।

अदालत ने जांच अधिकारी को क्या कहा?

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने जांच अधिकारी द्वारा बताए गए कारणों को देखते हुए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध स्वीकार कर लिया।

अदालत ने यह माना कि रिपोर्ट में बताए गए तथ्यों और जांच की आवश्यकता को देखते हुए जांच को आगे बढ़ाने के लिए और समय दिया जाना उचित है।

अब मामले की अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी।

इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को सही मान लिया है। अदालत का वर्तमान आदेश जांच को पूरा करने के लिए समय देने से संबंधित है। आरोपों की वास्तविकता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।

सीसीटीवी फुटेज क्यों बन सकती है अहम कड़ी?

इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

किसी भी बहुमूल्य धातु के मामले में यह पता लगाना जरूरी होता है कि सामग्री किसके कब्जे में कब रही। कानूनी भाषा में इसे broadly chain of custody कहा जाता है।

यदि किसी रिकॉर्ड में एक निश्चित मात्रा दर्ज है और बाद में दूसरी जगह भेजी गई सामग्री में अलग स्थिति सामने आती है, तो जांच एजेंसी को दोनों रिकॉर्ड के बीच की पूरी कड़ी देखनी होगी।

सीसीटीवी फुटेज से भी यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सामग्री को किस स्थान पर रखा गया था और उसके साथ कौन-कौन से लोग संपर्क में आए।

हालांकि केवल सीसीटीवी फुटेज से पूरे मामले का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं होगा। फुटेज को रिकॉर्ड, वजन, स्टॉक और परिवहन दस्तावेजों के साथ जोड़कर देखना होगा।

यही कारण है कि जांच अधिकारी ने अदालत से अतिरिक्त समय मांगा है।

चांदी के रिकॉर्ड की जांच भी होगी

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वह रिकॉर्ड हो सकता है जिसमें चढ़ावे की प्राप्ति और उसके रखरखाव का विवरण दर्ज होता है।

जांचकर्ता यह देख सकते हैं कि श्रद्धालुओं से प्राप्त सामग्री का वजन किस प्रकार दर्ज किया गया था। उसे किस तारीख को स्टोर किया गया, कितनी मात्रा किस स्थान पर भेजी गई और सरकारी मिंट तक पहुंचने के समय दस्तावेजों में कितनी मात्रा दर्ज थी।

अगर अलग-अलग स्तरों पर दर्ज आंकड़ों में अंतर मिलता है तो जांच का दायरा उस अंतर के कारणों तक पहुंच सकता है।

इसी तरह मिंट में हुए परीक्षण और melting process से जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे। किस नमूने का परीक्षण हुआ, उसकी composition क्या थी और परीक्षण किस प्रक्रिया के तहत किया गया—इन सवालों का जवाब भी जांच के लिए जरूरी हो सकता है।

क्या श्रद्धालुओं ने नकली चांदी चढ़ाई थी?

यह इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील सवाल है और फिलहाल इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

मामले की शिकायत में यह संभावना भी उठाई गई है कि श्रद्धालुओं को बाजार में ऐसी वस्तुएं बेची गई हों जिन्हें चांदी का बताया गया हो, लेकिन वे वास्तव में मिलावटी या अन्य धातुओं से बनी हों।

दूसरी संभावना यह है कि यदि मंदिर के रिकॉर्ड में सामग्री को चांदी के रूप में दर्ज किया गया था तो उसके बाद की custody chain की जांच की जाए।

यानी अभी किसी एक संभावना को सच मान लेना उचित नहीं होगा।

जांच का उद्देश्य ही यह पता लगाना है कि कथित विसंगति की वास्तविक वजह क्या थी।

कैडमियम की मौजूदगी ने बढ़ाए सवाल

मामले से संबंधित पहले की रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि परीक्षण की गई सामग्री में कैडमियम और अन्य धातुओं की मौजूदगी पाई गई। कैडमियम का इस्तेमाल कुछ औद्योगिक और धातु संबंधी प्रक्रियाओं में होता है, लेकिन इसकी कथित मौजूदगी ने इस मामले में अलग सवाल खड़े किए हैं।

शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर सामग्री के स्रोत और निर्माण प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

यदि बड़ी मात्रा में एक जैसी composition वाली सामग्री अलग-अलग समय पर मंदिर तक पहुंची थी, तो जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या उसका कोई समान स्रोत था।

लेकिन यहां भी किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण और दस्तावेजी साक्ष्य आवश्यक होंगे।

मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था भी जांच के दायरे में

इस विवाद के बाद मंदिर में सोने-चांदी जैसे कीमती चढ़ावे को संभालने की व्यवस्था भी चर्चा में आई है।

रिपोर्टों के अनुसार मंदिर में आने वाले कीमती धातु के चढ़ावे को अलग-अलग चरणों में वजन, रिकॉर्ड और सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसके बाद उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाता है।

जांच एजेंसी के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रक्रियाओं के दौरान कौन-कौन से रिकॉर्ड बनाए गए और क्या सभी रिकॉर्ड एक-दूसरे से मेल खाते हैं।

यदि किसी चरण पर कोई विसंगति मिलती है तो उसी चरण पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

मामले में अभी FIR का सवाल भी महत्वपूर्ण

इस विवाद की शुरुआत में शिकायतकर्ता ने पुलिस के समक्ष प्राथमिकी दर्ज करने और व्यापक जांच की मांग की थी। पहले की अदालती कार्यवाही में भी इस बात को लेकर सवाल उठे कि शिकायत पर किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई। जुलाई में अदालत ने Crime Branch के जांच अधिकारी को संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

बाद की कार्यवाही में अदालत ने भौतिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया था। अगस्त में अदालत ने विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी थी।

इससे स्पष्ट है कि अदालत पूरे मामले में जांच की प्रगति और साक्ष्यों के संरक्षण को गंभीरता से देख रही है।

श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा मामला

वैष्णो देवी मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी सवाल का महत्व केवल आर्थिक नहीं होता।

लोग अपनी श्रद्धा से मंदिर में सोना, चांदी और अन्य वस्तुएं चढ़ाते हैं। इसलिए यदि किसी चढ़ावे की गुणवत्ता या मात्रा को लेकर सवाल उठता है तो उसकी पारदर्शी जांच जरूरी हो जाती है।

इसी वजह से इस मामले में दस्तावेजी रिकॉर्ड और वैज्ञानिक परीक्षण दोनों महत्वपूर्ण होंगे। केवल आरोप या अनुमान के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

अगर आरोप सही पाए गए तो क्या होगा?

यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी स्तर पर जानबूझकर चढ़ावे में मिलावट, चोरी, अदला-बदली या गबन किया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लागू आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है।

लेकिन इसके लिए पहले जांच एजेंसी को ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे।

उसे यह स्थापित करना होगा कि कथित अपराध हुआ, किस स्तर पर हुआ, उसमें कौन शामिल था और आर्थिक या आपराधिक लाभ किसे मिला।

यदि इसके विपरीत जांच में यह सामने आता है कि चढ़ाई गई वस्तुएं श्रद्धालुओं या दुकानदारों की ओर से ही ऐसी थीं जिनमें वास्तविक चांदी कम थी, तो जांच का निष्कर्ष अलग हो सकता है।

इसीलिए मौजूदा चरण में सबसे महत्वपूर्ण चीज वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच है।

10 अक्टूबर की सुनवाई पर रहेगी नजर

अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 10 अक्टूबर है। तब तक जांच अधिकारी को दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की जांच आगे बढ़ानी होगी।

अदालत यह देख सकती है कि जांच में अब तक क्या प्रगति हुई और किन बिंदुओं पर अभी और पड़ताल की जरूरत है।

यदि जांच एजेंसी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की स्थिति में होती है तो आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। यदि जांच अभी अधूरी रहती है तो अदालत परिस्थितियों के अनुसार आगे की दिशा तय कर सकती है।

निष्कर्ष

माता वैष्णो देवी मंदिर के चांदी चढ़ावे से जुड़ा यह मामला फिलहाल जांच के चरण में है। शिकायत में लगभग 20 टन चांदी के चढ़ावे में कथित मिलावट, अदला-बदली, चोरी और गबन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं और इसकी अनुमानित कीमत करीब 550 करोड़ रुपये बताई गई है। इन आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।

जम्मू की अदालत ने जांच अधिकारी को यह देखते हुए अतिरिक्त समय दिया है कि मामले में बड़ी मात्रा में दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की जांच बाकी है। सीसीटीवी फुटेज, स्टॉक और इन्वेंट्री रिकॉर्ड, वजन और भंडारण से संबंधित दस्तावेज, परिवहन रिकॉर्ड, परीक्षण रिपोर्ट और सरकारी मिंट से जुड़े कागजात को आपस में मिलाना जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

इस मामले की असली तस्वीर तभी सामने आएगी जब जांच एजेंसी यह स्पष्ट कर पाएगी कि कथित अंतर आखिर पैदा कहां हुआ—क्या चढ़ावे की वस्तुएं शुरुआत से ही शुद्ध चांदी नहीं थीं या फिर मंदिर की custody में आने के बाद किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई।

फिलहाल अदालत ने जांच को पूरा करने के लिए समय दिया है और 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। ऐसे में अब सबकी नजर जांच एजेंसी की अगली रिपोर्ट और उन दस्तावेजी तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर रहेगी, जिनसे इस पूरे विवाद की वास्तविकता सामने आ सकती है।

संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।