BRICS सम्मेलन के दौरान बदली कनाट प्लेस की तस्वीर, साफ-सुथरे और अतिक्रमण मुक्त बाजार ने लौटाई पुरानी चमक; व्यापारियों को अब फिर से अतिक्रमण लौटने की चिंता
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में जब दुनिया के कई बड़े देशों के नेता और विदेशी प्रतिनिधि BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे, तब राजधानी के कई प्रमुख इलाकों की तस्वीर सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग नजर आई। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर साफ-सफाई तक, प्रशासन ने दिल्ली को व्यवस्थित और बेहतर रूप में पेश करने के लिए व्यापक तैयारियां कीं। इसी दौरान ऐतिहासिक कनाट प्लेस यानी सीपी का बदला हुआ स्वरूप भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
दिल्ली के दिल के रूप में पहचाने जाने वाले कनाट प्लेस में सम्मेलन के दौरान अतिक्रमण, अवैध रेहड़ी-पटरी, भिखारियों और खुले में रहने वाले बेघर लोगों की मौजूदगी काफी कम दिखाई दी। सड़कों और बाजार के आसपास का इलाका अधिक खुला, साफ और व्यवस्थित नजर आया। लंबे समय से यहां कारोबार कर रहे दुकानदारों और रेस्त्रां संचालकों के लिए यह नजारा किसी पुराने दौर की याद जैसा था।
व्यापारियों का कहना है कि कनाट प्लेस की पहचान केवल दुकानों और रेस्त्रां से नहीं है। इसकी असली खूबसूरती इसकी वास्तुकला, खुले बरामदे, चौड़ी गलियां, व्यवस्थित बाजार और शांत वातावरण में रही है। जब यहां रास्तों पर अवैध कब्जे और अनियंत्रित रेहड़ी-पटरी बढ़ती है तो न केवल बाजार की सुंदरता प्रभावित होती है, बल्कि ग्राहकों और पर्यटकों के लिए आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है।
BRICS सम्मेलन के दौरान जब यह सब काफी हद तक नियंत्रित दिखाई दिया, तो व्यापारियों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। विदेशी मेहमानों ने भी दिल्ली के इस प्रसिद्ध बाजार का दौरा किया, खरीदारी की और आसपास के स्थानीय रेस्त्रां में भारतीय व्यंजनों का आनंद लिया। रविवार को भी बाजार में इसी तरह का माहौल दिखाई देने की बात सामने आई।
हालांकि, इस बदली तस्वीर के साथ व्यापारियों के मन में एक सवाल भी खड़ा हो गया है—क्या सम्मेलन खत्म होने के बाद कनाट प्लेस फिर उसी पुराने हालात में लौट जाएगा?
यही आशंका अब स्थानीय कारोबारियों के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है।
कुछ दिनों में बदल गई बाजार की पूरी तस्वीर
कनाट प्लेस दिल्ली के उन स्थानों में शामिल है जहां हर दिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले पर्यटक और विदेशी नागरिक पहुंचते हैं। यहां बड़े ब्रांडों के शोरूम से लेकर छोटे कारोबार, रेस्त्रां, कैफे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं।
सामान्य दिनों में बाजार के आसपास फुटपाथों और पैदल चलने वाली जगहों पर रेहड़ी-पटरी वालों की मौजूदगी अक्सर दिखाई देती है। कई जगहों पर अनधिकृत तरीके से सामान बेचने वालों की वजह से पैदल यात्रियों के लिए जगह कम पड़ जाती है।
व्यापारियों का आरोप है कि समय के साथ यह समस्या बढ़ती गई है। कई बार कार्रवाई होने के बाद भी कुछ समय बीतने पर वही स्थिति दोबारा दिखाई देने लगती है।
लेकिन BRICS सम्मेलन के दौरान प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के कारण बाजार का स्वरूप बदल गया। सड़कों पर पहले की तुलना में कम भीड़ और अधिक खुली जगह दिखाई दी। फुटपाथों पर अव्यवस्था कम हुई और पूरे इलाके में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस बदलाव ने स्थानीय कारोबारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यदि कुछ दिनों में इतना बड़ा परिवर्तन संभव है तो सामान्य दिनों में भी इस व्यवस्था को क्यों नहीं बनाए रखा जा सकता।
व्यापारियों को याद आया 80 का दशक
कनाट प्लेस में लंबे समय से कारोबार कर रहे कई व्यापारियों के लिए यह दृश्य नया नहीं था। उनका कहना है कि आज से कई दशक पहले सीपी की पहचान ही अलग थी।
1980 के दशक में कनाट प्लेस को दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित और व्यवस्थित बाजारों में गिना जाता था। दुकानों के सामने अपेक्षाकृत अधिक खुली जगह रहती थी। लोग आराम से बरामदों और सड़कों के आसपास घूमते हुए खरीदारी करते थे। बाजार में आने वाले पर्यटकों के लिए भी यहां घूमना अपने आप में एक अनुभव माना जाता था।
समय के साथ दिल्ली की आबादी बढ़ी, शहर का विस्तार हुआ और बाजारों में भीड़ बढ़ती गई। इसके साथ फुटपाथों पर कारोबार और अनधिकृत गतिविधियों का विस्तार भी हुआ।
व्यापारियों का मानना है कि समस्या केवल सौंदर्य से जुड़ी नहीं है। जब पैदल चलने की जगह कम होती है तो ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है। कई बार वाहनों और पैदल यात्रियों के बीच भी परेशानी पैदा होती है।
यही वजह है कि सम्मेलन के दौरान साफ और खुला सीपी देखकर पुराने कारोबारी उस दौर को याद कर रहे हैं, जब कनाट प्लेस को दिल्ली की पहचान के तौर पर देखा जाता था।
विदेशी मेहमानों के लिए भी बना आकर्षण
BRICS सम्मेलन के दौरान दिल्ली में मौजूद विदेशी प्रतिनिधियों के लिए कनाट प्लेस भी आकर्षण का केंद्र रहा। ऐतिहासिक वास्तुकला, बाजार, भारतीय खान-पान और खरीदारी के विकल्पों के कारण सीपी हमेशा से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है।
सम्मेलन के दौरान जब बाजार अपेक्षाकृत व्यवस्थित और साफ दिखाई दिया तो विदेशी मेहमानों को घूमने और खरीदारी करने में भी सुविधा हुई।
स्थानीय रेस्त्रां संचालकों के लिए भी यह एक खास मौका था। विदेशी मेहमानों को भारतीय व्यंजन परोसना और दिल्ली के खान-पान से परिचित कराना उनके लिए व्यवसाय के साथ-साथ शहर की संस्कृति को प्रस्तुत करने का अवसर भी था।
किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शहर की छवि केवल सम्मेलन स्थल से नहीं बनती। विदेशी प्रतिनिधि जब होटल से बाहर निकलते हैं, बाजारों में जाते हैं, ऐतिहासिक स्थान देखते हैं और स्थानीय दुकानों या रेस्त्रां में पहुंचते हैं, तो उनके अनुभव से ही शहर की वास्तविक तस्वीर बनती है।
इसी वजह से सीपी का साफ-सुथरा और व्यवस्थित रूप दिल्ली के लिए भी सकारात्मक संदेश माना गया।
कारोबारियों को खुशी के साथ सता रहा डर
सम्मेलन के दौरान मिली इस व्यवस्था से स्थानीय व्यापारियों को खुशी तो हुई, लेकिन यह खुशी पूरी तरह चिंता से मुक्त नहीं है।
व्यापारियों को डर है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय मेहमान वापस जाएंगे और सम्मेलन की विशेष व्यवस्था समाप्त होगी, वैसे ही अतिक्रमण और अवैध वेंडिंग की समस्या फिर से बढ़ सकती है।
उनका सवाल सीधा है—अगर प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पूरे इलाके को व्यवस्थित रखा है, तो वही व्यवस्था आम दिनों में क्यों नहीं जारी रह सकती?
व्यापारियों का कहना है कि कनाट प्लेस को किसी खास आयोजन के समय ही नहीं, बल्कि पूरे साल व्यवस्थित रखा जाना चाहिए।
इसका फायदा केवल दुकानदारों को नहीं होगा। इससे पैदल चलने वाले लोगों, पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और दिल्ली आने वाले अन्य लोगों को भी सुविधा मिलेगी।
हाईकोर्ट के आदेश का भी हवाला
व्यापारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि उनके अनुसार कनाट प्लेस में हॉकिंग और वेंडिंग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश पहले से मौजूद हैं।
व्यापारियों का तर्क है कि जब किसी इलाके के संबंध में अदालत का आदेश मौजूद है, तो उसके पालन को लगातार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि बीच-बीच में कार्रवाई करने के बजाय ऐसी स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे अवैध अतिक्रमण दोबारा जगह न बना सके।
यहां एक दूसरी चुनौती भी है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में रेहड़ी-पटरी और छोटे विक्रेताओं का सवाल केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए छोटे स्तर पर सामान बेचते हैं।
इसलिए प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सार्वजनिक स्थानों और पैदल मार्गों को अतिक्रमण से मुक्त रखने के साथ-साथ वैध और नियोजित वेंडिंग के लिए उचित व्यवस्था भी बनाई जाए।
व्यापारियों की मांग मुख्य रूप से अनधिकृत कब्जे और अव्यवस्थित वेंडिंग को रोकने की है। वहीं प्रशासन के लिए जरूरी होगा कि कार्रवाई स्पष्ट नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो।
NDTA ने उठाया मुद्दा
कनाट प्लेस के व्यापारियों का प्रमुख संगठन नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहा है।
संगठन की ओर से संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया गया है कि BRICS सम्मेलन के दौरान जिस तरह कनाट प्लेस का स्वरूप बदला, उसे केवल कुछ दिनों की व्यवस्था बनाकर न छोड़ा जाए।
व्यापारियों ने उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस और NDMC के साथ-साथ स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज तथा स्थानीय विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की है।
व्यापारियों का कहना है कि कनाट प्लेस दिल्ली की पहचान है और इसकी प्रतिष्ठा बनाए रखना केवल व्यापारियों की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधियों को मिलकर स्थायी समाधान तलाशना होगा।
सिर्फ कार्रवाई से नहीं बनेगी बात
कनाट प्लेस को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने के लिए केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती यह है कि कार्रवाई के बाद दोबारा वही स्थिति पैदा न हो।
अक्सर बड़े आयोजनों के दौरान विशेष अभियान चलाए जाते हैं। सड़कें खाली कराई जाती हैं, फुटपाथ साफ कराए जाते हैं और बाजारों में अतिरिक्त निगरानी की जाती है। लेकिन आयोजन समाप्त होने के कुछ समय बाद यदि निगरानी कमजोर पड़ जाए तो स्थिति फिर बदल सकती है।
इसलिए स्थानीय व्यापारियों की मांग है कि नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए।
यदि किसी स्थान पर अवैध कब्जा लगातार हो रहा है तो उसकी वजह भी समझनी होगी। क्या वहां पर्याप्त वैध वेंडिंग स्थान नहीं हैं? क्या नियम स्पष्ट नहीं हैं? क्या कार्रवाई नियमित नहीं होती? या फिर कार्रवाई के बाद निगरानी की कमी रह जाती है?
इन सवालों का समाधान किए बिना समस्या बार-बार सामने आ सकती है।
पैदल यात्रियों के लिए भी जरूरी है खुली जगह
कनाट प्लेस में बढ़ता अतिक्रमण केवल दुकानदारों का मुद्दा नहीं है। इसका सीधा असर पैदल चलने वाले लोगों पर भी पड़ता है।
बाजार में आने वाला ग्राहक अगर दुकान तक आसानी से नहीं पहुंच पाता या फुटपाथ पर चलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती तो उसका अनुभव खराब हो सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और दिव्यांग लोगों के लिए यह समस्या और गंभीर हो सकती है। पैदल रास्ते जितने व्यवस्थित होंगे, बाजार उतना ही लोगों के अनुकूल बनेगा।
इसके अलावा अतिक्रमण कम होने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी आवाजाही आसान हो सकती है।
कनाट प्लेस जैसे व्यस्त बाजार में सार्वजनिक स्थान का सही इस्तेमाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
सुंदरता के साथ कारोबार भी जुड़ा है
किसी बाजार की सुंदरता केवल देखने के लिए नहीं होती। उसका सीधा संबंध कारोबार से भी होता है।
एक साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित बाजार में ग्राहक अधिक समय तक रुक सकता है। पर्यटक आराम से घूम सकता है और दुकानदार के पास ग्राहक को आकर्षित करने के बेहतर अवसर होते हैं।
कनाट प्लेस की ऐतिहासिक पहचान को देखते हुए यहां यह बात और महत्वपूर्ण हो जाती है।
यदि दिल्ली आने वाला विदेशी पर्यटक सीपी में साफ-सुथरे फुटपाथ, व्यवस्थित बाजार और बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं देखता है, तो उसके मन में राजधानी की सकारात्मक छवि बनती है।
इसके उलट अगर उसे रास्तों पर अतिक्रमण, गंदगी और अव्यवस्था दिखाई देती है तो इसका असर पूरे शहर की छवि पर पड़ सकता है।
BRICS सम्मेलन ने इस अंतर को कुछ दिनों के लिए बहुत स्पष्ट रूप से सामने ला दिया।
अब असली परीक्षा सम्मेलन के बाद
BRICS सम्मेलन के दौरान कनाट प्लेस की बदली तस्वीर ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है। अगर प्रशासन किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए कुछ दिनों में बाजार को व्यवस्थित कर सकता है, तो क्या वही प्रयास पूरे साल जारी रखा जा सकता है?
व्यापारियों की उम्मीद इसी सवाल से जुड़ी है।
वे चाहते हैं कि सम्मेलन के दौरान दिखाई गई व्यवस्था को अस्थायी अभियान न माना जाए, बल्कि इसे स्थायी व्यवस्था में बदला जाए।
इसके लिए नियमित सफाई, फुटपाथों की निगरानी, यातायात प्रबंधन, अवैध कब्जे पर कार्रवाई और वैध वेंडिंग की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।
साथ ही व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों के बीच टकराव की स्थिति से बचने के लिए संवाद भी आवश्यक है। नियम सभी के लिए स्पष्ट हों और उनका पालन समान रूप से हो, तभी लंबे समय तक समाधान संभव होगा।
कनाट प्लेस की पुरानी पहचान लौटाने की मांग
कनाट प्लेस केवल एक व्यावसायिक बाजार नहीं है। यह दिल्ली के इतिहास और शहरी पहचान का हिस्सा है। इसकी गोलाकार संरचना, सफेद कॉलोनियल शैली की इमारतें, दुकानों के बरामदे और केंद्रीय पार्क इसे दूसरे बाजारों से अलग बनाते हैं।
इसलिए व्यापारियों की इच्छा है कि इसकी पहचान फिर से मजबूत हो।
BRICS सम्मेलन के दौरान लोगों ने जिस साफ और व्यवस्थित सीपी को देखा, उसने यह साबित कर दिया कि बाजार को बेहतर स्वरूप देना संभव है। अब सवाल केवल इतना है कि इस व्यवस्था को कितने समय तक कायम रखा जा सकता है।
व्यापारियों के लिए यह केवल दुकानों के सामने की जगह का सवाल नहीं है। उनके लिए यह बाजार की प्रतिष्ठा, ग्राहकों की सुविधा और आने वाले समय के कारोबार से जुड़ा विषय है।
निष्कर्ष: कुछ दिनों की चमक नहीं, स्थायी बदलाव चाहिए
BRICS सम्मेलन ने दिल्ली को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक बड़ा अवसर दिया। इस दौरान कनाट प्लेस का जो स्वरूप सामने आया, उसने स्थानीय कारोबारियों और आम लोगों को भी यह महसूस कराया कि ऐतिहासिक बाजार को यदि नियमित रूप से साफ, सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तो उसकी पुरानी चमक वापस लाई जा सकती है।
विदेशी मेहमानों की मौजूदगी के दौरान सीपी में खरीदारी और खान-पान का माहौल व्यापारियों के लिए उत्साह बढ़ाने वाला रहा। लेकिन अब उनकी नजर सम्मेलन के बाद की स्थिति पर है।
सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं कुछ दिनों की यह व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म न हो जाए और सड़कें तथा फुटपाथ फिर से अतिक्रमण की चपेट में न आ जाएं।
व्यापारियों का संदेश साफ है—कनाट प्लेस को केवल अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत के समय सुंदर नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि दिल्ली के आम नागरिकों और कारोबारियों के लिए भी पूरे साल वैसा ही रखा जाना चाहिए।
अगर प्रशासन, स्थानीय निकाय, पुलिस, जनप्रतिनिधि और व्यापारिक संगठन मिलकर लगातार निगरानी और स्पष्ट व्यवस्था बनाते हैं, तो कनाट प्लेस की ऐतिहासिक पहचान को लंबे समय तक बचाया जा सकता है।
BRICS सम्मेलन खत्म हो जाएगा, विदेशी मेहमान भी लौट जाएंगे, लेकिन कनाट प्लेस यहीं रहेगा। अब असली सवाल यही है कि सम्मेलन के दौरान दिखाई दी साफ-सुथरी और अतिक्रमण मुक्त दिल्ली की तस्वीर केवल याद बनकर रह जाएगी या राजधानी के इस ऐतिहासिक बाजार की स्थायी पहचान फिर से बन पाएगी।