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बिस्किट के पैकेट पर MRP से ज्यादा वसूले 104 रुपये, उपभोक्ता आयोग ने Flipkart और विक्रेता को दिया झटका

बिस्किट के पैकेट पर MRP से ज्यादा वसूले 104 रुपये, उपभोक्ता आयोग ने Flipkart और विक्रेता को दिया झटका

आगरा उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, अतिरिक्त रकम 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश; मानसिक उत्पीड़न और वाद खर्च के लिए भी देने होंगे 5 हजार रुपये

     आगरा। ऑनलाइन खरीदारी के दौर में उपभोक्ताओं को सामान की कीमत में छूट और आकर्षक ऑफर का भरोसा देकर खरीदारी के लिए प्रेरित किया जाता है। लेकिन कई बार डिलीवरी के बाद सामने आने वाली कीमत और ग्राहक से वसूली गई रकम में अंतर उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। ऐसा ही एक मामला आगरा में सामने आया, जहां बिस्किट के पैकेट की कीमत को लेकर विवाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम तक पहुंच गया।

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े विवाद में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, आगरा के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट कंपनी तथा बाज्यमार डॉट कॉम को आदेश दिया कि उपभोक्ता से कीमत से अधिक वसूली गई 104 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए।

आयोग ने केवल अतिरिक्त वसूली गई रकम लौटाने का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि उपभोक्ता को हुए मानसिक उत्पीड़न और मुकदमे में हुए खर्च को देखते हुए 5 हजार रुपये अलग से अदा करने का भी आदेश दिया है।

यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदते हैं और पैकेट पर अंकित कीमत, ऑफर तथा अंतिम भुगतान राशि के बीच अंतर को लेकर अक्सर असमंजस में रहते हैं।

गांव तेहू निवासी मनोज कुमार ने दाखिल किया था वाद

यह मामला आगरा जिले के बरहन क्षेत्र के गांव तेहू निवासी मनोज कुमार से जुड़ा है। मनोज कुमार ने उपभोक्ता आयोग में वाद दायर करते हुए ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उनसे अधिक रकम वसूले जाने की शिकायत की थी।

वादी के अनुसार, उन्होंने 3 सितंबर 2023 को फ्लिपकार्ट की वेबसाइट पर जाकर दो पैकेट मालकिस्ट क्रैकर बिस्किट बुक किए थे। ऑनलाइन ऑर्डर करते समय उन्होंने कुल 286 रुपये का भुगतान किया था।

ऑर्डर के दौरान उन्हें यह बताया गया था कि उत्पाद की अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP (Maximum Retail Price) पर छूट दी जा रही है और इसी कारण उन्हें कम कीमत में सामान उपलब्ध कराया जाएगा। ग्राहक के लिए यह एक सामान्य ऑनलाइन खरीदारी का हिस्सा था। उन्होंने कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर भरोसा करते हुए ऑर्डर कर दिया।

इसके बाद निर्धारित तारीख पर सामान उनके पास पहुंचा।

8 सितंबर को हुई बिस्किट की डिलीवरी

वादी ने आयोग को बताया कि उन्हें बिस्किट के पैकेट की डिलीवरी 8 सितंबर 2023 को मिली। सामान मिलने के बाद जब उन्होंने पैकेट और उस पर अंकित कीमत की जांच की तो उन्हें वसूली गई राशि को लेकर आपत्ति हुई।

उनका आरोप था कि उनसे पैकेट पर अंकित MRP के मुकाबले अधिक रकम ली गई थी। इतना ही नहीं, पैकेट पर छपे मूल्य को लेकर भी उन्हें संदेह हुआ। वादी के मुताबिक पैकेट पर अंकित प्रिंट स्क्रैच था, जिससे कीमत संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से देखना भी आसान नहीं था।

सामान मिलने के बाद मनोज कुमार ने इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी को दोबारा देखा और वहां उत्पाद से संबंधित विवरण की जांच की।

इसी दौरान उन्हें उत्पाद के संबंध में एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

प्रोमो पैक पर 10 रुपये की छूट की जानकारी

मनोज कुमार के अनुसार, वेबसाइट पर जांच करने पर पता चला कि यह प्रोमो पैक था और इस पर 10 रुपये की छूट भी उपलब्ध थी। इसके अलावा बिस्किट के प्रत्येक पैकेट का मूल्य 50 रुपये अंकित था।

वादी का कहना था कि वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी और वास्तविक रूप से उनसे वसूली गई रकम के बीच अंतर था। उन्हें लगा कि जिस कीमत पर सामान उपलब्ध कराया जाना चाहिए था, उससे अधिक रकम उनसे ली गई है।

इसके बाद उन्होंने मामले को कंपनी के सामने उठाने का फैसला किया।

शिकायत पर समाधान का भरोसा मिला, लेकिन रकम वापस नहीं हुई

मनोज कुमार ने इस संबंध में फ्लिपकार्ट की वेबसाइट के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद कंपनी की ओर से मामले को निर्धारित समय में हल करने का भरोसा दिया गया।

वादी के मुताबिक कंपनी ने उन्हें 13 सितंबर 2023 तक समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया था। इससे उन्हें उम्मीद थी कि अतिरिक्त वसूली गई रकम वापस कर दी जाएगी और विवाद वहीं समाप्त हो जाएगा।

लेकिन तय समय बीतने के बाद भी उन्हें रकम वापस नहीं मिली।

मनोज कुमार का कहना था कि उन्होंने कंपनी की ओर से समाधान की प्रतीक्षा की, लेकिन न तो फ्लिपकार्ट की ओर से अतिरिक्त राशि लौटाई गई और न ही संबंधित विक्रेता कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक कार्रवाई की गई।

इसके बाद उपभोक्ता ने विधिक रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।

विधिक नोटिस का भी नहीं मिला जवाब

वादी के अनुसार, उन्होंने कंपनी और संबंधित विक्रेता को विधिक नोटिस भी भेजा। नोटिस के माध्यम से उन्होंने अपनी शिकायत का समाधान करने और अधिक वसूली गई रकम वापस करने की मांग की।

लेकिन उनके मुताबिक विधिक नोटिस का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। जब कंपनी की ओर से समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मनोज कुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, आगरा की शरण ली।

आयोग में वाद दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार किया गया।

उपभोक्ता आयोग ने अतिरिक्त वसूली को गंभीरता से लिया

उपभोक्ता आयोग के सामने मुख्य विवाद यह था कि ग्राहक से उत्पाद की वास्तविक कीमत की तुलना में अधिक रकम वसूली गई या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए उपभोक्ता को किस प्रकार राहत दी जानी चाहिए।

उपभोक्ता संरक्षण कानून का मूल उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को वस्तु या सेवा खरीदते समय अनुचित व्यापार व्यवहार, गलत जानकारी या अनुचित वसूली का सामना न करना पड़े।

ऑनलाइन खरीदारी के मामलों में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ग्राहक सामान खरीदने से पहले वेबसाइट पर दिखाई गई जानकारी पर निर्भर रहता है। वह दुकान की तरह उत्पाद को अपने हाथ में लेकर उसकी पैकेजिंग और कीमत की तत्काल जांच नहीं कर सकता।

आयोग ने मामले में उपभोक्ता की शिकायत पर विचार करते हुए फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट कंपनी और बाज्यमार डॉट कॉम को अतिरिक्त वसूली गई 104 रुपये की रकम 9 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया।

मानसिक उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च की भी भरपाई

आयोग का फैसला केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई तक सीमित नहीं रहा। उपभोक्ता को शिकायत के समाधान के लिए कंपनी से संपर्क करना पड़ा, शिकायत दर्ज करनी पड़ी, विधिक नोटिस भेजना पड़ा और अंततः उपभोक्ता आयोग में वाद दाखिल करना पड़ा।

इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया।

इस तरह आयोग के आदेश का सीधा असर संबंधित कंपनियों पर दो स्तर पर पड़ा। पहला, उपभोक्ता से अधिक वसूली गई रकम वापस करनी होगी और उस पर 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। दूसरा, उपभोक्ता को मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी में हुए खर्च के लिए 5 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

यह उपभोक्ता विवादों में एक महत्वपूर्ण पहलू है। किसी ग्राहक से यदि गलत तरीके से राशि वसूली जाती है तो नुकसान केवल उस अतिरिक्त रकम तक सीमित नहीं माना जाता। शिकायत के समाधान के लिए उपभोक्ता को जो समय, प्रयास और मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है, उसे भी उचित परिस्थितियों में राहत का आधार बनाया जा सकता है।

MRP का मतलब क्या है?

ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए MRP यानी Maximum Retail Price को समझना बेहद जरूरी है। किसी पैकेज्ड वस्तु पर निर्माता या पैकर की ओर से अधिकतम खुदरा कीमत अंकित होती है।

सामान्य स्थिति में खुदरा विक्रेता किसी पैकेज्ड वस्तु को उस पर अंकित MRP से अधिक कीमत पर नहीं बेच सकता। हालांकि यदि किसी उत्पाद पर वैध छूट या ऑफर दिया जा रहा है तो उपभोक्ता को MRP से कम कीमत पर सामान मिल सकता है।

यही कारण है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय ग्राहक को केवल वेबसाइट पर दिखाई गई कीमत पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। सामान मिलने के बाद पैकेट पर अंकित MRP, मात्रा, पैक का प्रकार और अन्य विवरण की भी जांच करना उपयोगी होता है।

ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आज के समय में बिस्किट, साबुन, तेल, कॉस्मेटिक, घरेलू सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद तक ऑनलाइन खरीदे जा रहे हैं। ऐसे में ग्राहक के लिए कुछ सामान्य सावधानियां काफी उपयोगी हो सकती हैं।

सबसे पहले ऑर्डर करते समय वेबसाइट पर दिखाई गई product price और MRP को ध्यान से देखना चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर discount या promotional offer दिया जा रहा है तो उसकी जानकारी का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखा जा सकता है।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि डिलीवरी मिलने के बाद पैकेट को फेंकने से पहले उस पर अंकित MRP और अन्य जरूरी विवरण देख लें। यदि कीमत से संबंधित कोई विवाद हो तो पैकेट, invoice और ऑनलाइन ऑर्डर का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए।

तीसरी बात यह है कि शिकायत करने पर कंपनी की ओर से मिलने वाले ईमेल, SMS, complaint number और customer-care बातचीत के रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखा जाए।

यदि कंपनी समस्या का समाधान नहीं करती है तो उपभोक्ता के पास उपभोक्ता आयोग जाने का कानूनी विकल्प मौजूद है।

केवल 104 रुपये का मामला नहीं, उपभोक्ता अधिकार का सवाल

पहली नजर में यह विवाद केवल 104 रुपये की अतिरिक्त वसूली से जुड़ा दिखाई दे सकता है। लेकिन उपभोक्ता कानून के नजरिए से ऐसे मामलों का महत्व रकम से कहीं अधिक होता है।

यदि किसी ग्राहक से छोटी रकम भी गलत तरीके से वसूली जाती है और वह बिना शिकायत किए उसे छोड़ देता है, तो ऐसी व्यवस्था में गलत व्यापारिक व्यवहार को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए शिकायत करता है और आयोग मामले पर फैसला देता है तो इससे अन्य ग्राहकों में भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आती है।

उपभोक्ता आयोगों का उद्देश्य केवल बड़ी रकम वाले विवादों का समाधान करना नहीं है। रोजमर्रा की खरीदारी से जुड़े छोटे विवाद भी उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था के दायरे में आते हैं।

पैकेजिंग और कीमत में पारदर्शिता जरूरी

इस मामले से ऑनलाइन कंपनियों और विक्रेताओं के लिए भी एक संदेश जाता है। ग्राहक को उत्पाद की कीमत के बारे में स्पष्ट और सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। वेबसाइट पर एक कीमत दिखाई जाए और ग्राहक से दूसरी रकम ली जाए तो विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

इसी तरह पैकेट पर MRP या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी अस्पष्ट, खराब या छपी हुई स्थिति में हो तो ग्राहक के लिए परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए उत्पाद की पैकेजिंग और मूल्य संबंधी जानकारी स्पष्ट होना भी उपभोक्ता हित का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री करने वाली कंपनियों और विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना होता है कि उत्पाद से संबंधित जानकारी ग्राहक को भ्रमित करने वाली न हो।

आयोग के फैसले से ऑनलाइन खरीदारों को क्या सीख मिलती है?

आगरा के इस मामले की सबसे बड़ी सीख यही है कि ग्राहक को किसी भी छोटी रकम के विवाद को लेकर अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटना चाहिए। यदि ग्राहक को लगता है कि उससे गलत तरीके से अधिक पैसा लिया गया है तो सबसे पहले संबंधित कंपनी से शिकायत करनी चाहिए।

शिकायत का रिकॉर्ड रखना चाहिए और कंपनी की ओर से दिए गए आश्वासन की तारीख भी नोट करनी चाहिए। समाधान न होने पर विधिक नोटिस और उपभोक्ता आयोग का रास्ता अपनाया जा सकता है।

मनोज कुमार ने भी पहले कंपनी से शिकायत की, समाधान का इंतजार किया, विधिक नोटिस भेजा और जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

आयोग के आदेश के बाद अब संबंधित कंपनियों को अतिरिक्त वसूली गई रकम 104 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटानी होगी। इसके अलावा 5 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे।

फैसला ऑनलाइन कारोबार के लिए भी अहम संदेश

ई-कॉमर्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ग्राहक घर बैठे सामान मंगा रहे हैं और अधिकांश खरीदारी वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर दिखाई गई जानकारी के आधार पर कर रहे हैं। ऐसे में कीमत, discount, MRP और final payable amount में पारदर्शिता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।

आगरा के इस उपभोक्ता विवाद में रकम भले ही बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन मामला यह बताता है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर छोटी राशि के विवाद में भी कानूनी राहत हासिल कर सकता है।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम का यह आदेश इस बात की याद दिलाता है कि उपभोक्ता से वस्तु की कीमत के संबंध में गलत या अनुचित वसूली होने पर केवल शिकायत करना ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर कानूनी मंच पर भी अपनी बात मजबूती से रखी जा सकती है।

मनोज कुमार के मामले में आयोग ने कंपनियों को अतिरिक्त वसूली की रकम ब्याज समेत लौटाने के साथ मानसिक उत्पीड़न और वाद व्यय की भरपाई का भी निर्देश दिया है। अब यह फैसला उन ग्राहकों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जो ऑनलाइन खरीदारी के दौरान MRP, discount और उनसे ली गई वास्तविक रकम में अंतर पाए जाने पर शिकायत करने से अक्सर बचते हैं।