PNB के करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के नकली नोट: NIA ने बैंक मैनेजर को दबोचा, अब खुलेगा बड़े नेटवर्क का राज
बैंक के अंदर इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने से मचा हड़कंप, NIA खंगाल रही 111 करोड़ की करेंसी खेप और नेपाल कनेक्शन
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से मिले 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने बैंक के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अमित कुमार के रूप में हुई है, जो जगाधरी करेंसी चेस्ट के मैनेजर रह चुके हैं और मामले में नामजद प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं।
अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब जांच एजेंसियां केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं हैं कि करेंसी चेस्ट में नकली नोट कैसे पहुंचे, बल्कि यह भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था। सबसे अहम सवाल यह है कि यदि नकली नोट बैंक के आधिकारिक करेंसी चेस्ट तक पहुंच गए थे, तो क्या उनमें से कुछ नोट बैंक की शाखाओं, एटीएम या दूसरे वैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से आगे भी पहुंच चुके थे?
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि नकली करेंसी किसी सड़क किनारे, किसी तस्कर के पास या सीमा पार करते हुए नहीं मिली। इतनी बड़ी मात्रा में कथित जाली नोट बैंक के करेंसी चेस्ट के भीतर पाए गए। इससे बैंकिंग व्यवस्था की आंतरिक सुरक्षा और करेंसी हैंडलिंग प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
करेंसी चेस्ट के अंदर मिले 17.29 करोड़ के नकली नोट
मामला 29 अगस्त 2026 को सामने आया, जब सहारनपुर के सदर बाजार थाना क्षेत्र में स्थित PNB के करेंसी चेस्ट में नकली नोट होने की जानकारी मिली। शुरुआती जांच में नकली नोटों की कीमत करीब 7.40 करोड़ रुपये बताई गई थी, लेकिन जांच और ऑडिट आगे बढ़ने के साथ बरामद नकली करेंसी का आंकड़ा बढ़ता गया और यह करीब 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
रिपोर्टों के अनुसार, ऑडिट के दौरान बड़ी संख्या में 500 रुपये के नकली नोटों के बंडल मिले। इसके बाद बैंक अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं। फोरेंसिक टीम ने करेंसी चेस्ट से साक्ष्य जुटाए और रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का एक अधिकृत बैंकिंग परिसर के अंदर मिलना अपने आप में असामान्य है। इसलिए जांच का मुख्य केंद्र यही बन गया कि आखिर ये नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे।
NIA ने PNB मैनेजर अमित कुमार को किया गिरफ्तार
मामले में बड़ी कार्रवाई तब हुई जब NIA ने अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह मामले में नामजद आरोपियों में शामिल थे और गिरफ्तारी से पहले फरार बताए जा रहे थे। उन्हें चंडीगढ़ से पकड़ा गया और बाद में विशेष NIA अदालत में पेश किया गया। एजेंसी ने उन्हें आगे की जांच के लिए उत्तर प्रदेश ले जाने के उद्देश्य से ट्रांजिट रिमांड मांगी थी।
अमित कुमार की गिरफ्तारी को जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि वह उस समय करेंसी चेस्ट से जुड़े अधिकारियों में शामिल थे। अब जांच एजेंसियां उनके संपर्कों, बैंकिंग रिकॉर्ड, फोन कॉल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
हालांकि, किसी आरोपी की गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में वास्तविक भूमिका अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय होगी।
बैंक के तीन अधिकारी जांच के घेरे में
प्रारंभिक जांच के दौरान PNB के तीन अधिकारियों की भूमिका सामने आई थी। इनमें रवि कुमार कांसे, सुशील कुमार और अमित कुमार के नाम बताए गए हैं। बैंक ने शुरुआती जांच के बाद तीनों अधिकारियों को निलंबित किया था।
पुलिस ने तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किए थे। इसकी एक वजह यह आशंका बताई गई कि आरोपी देश छोड़कर नेपाल की ओर जा सकते हैं। हालांकि, नेपाल से किसी आपराधिक नेटवर्क के संबंध की अभी तक कोई अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां फिलहाल इसे जांच के एक संभावित एंगल के रूप में देख रही हैं।
पुलिस की SIT और क्राइम ब्रांच ने अधिकारियों से जुड़े परिसरों की तलाशी भी ली थी। तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। इनकी जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों के बीच किस प्रकार का संपर्क था और करेंसी से संबंधित गतिविधियों में किसकी क्या भूमिका हो सकती है।
111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप ने बढ़ाई जांच की चिंता
जांच में सामने आया एक और महत्वपूर्ण पहलू 111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप से जुड़ा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, 6 जुलाई को सहारनपुर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जयपुर कार्यालय के लिए करीब 111 करोड़ रुपये की करेंसी भेजी गई थी। इस खेप में 500 रुपये के नोटों की लगभग 1,900 गड्डियां और 200 रुपये के नोटों की करीब 800 गड्डियां शामिल थीं।
अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बड़ी रकम की गिनती, पैकिंग, सीलिंग और भेजने की पूरी प्रक्रिया किस तरह हुई थी। इसी क्रम में यह सवाल भी जांच के दायरे में है कि करेंसी की इस पूरी आवाजाही के दौरान कथित नकली नोटों ने किस स्तर पर करेंसी चेन में प्रवेश किया।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि खेप की पैकिंग और हैंडलिंग से जुड़ी प्रक्रिया में पार्ट-टाइम हाउसकीपर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां अब बैंक के रिकॉर्ड और कर्मचारियों की गतिविधियों को आपस में जोड़कर पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही हैं।
CCTV फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा
मामले की शुरुआती जांच में CCTV फुटेज भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, फुटेज में पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को करेंसी बंडलों से नोट निकालते हुए देखा गया था। यह पहलू जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब यह पता लगाने की कोशिश होगी कि करेंसी चेस्ट के भीतर नोटों की हैंडलिंग किस तरीके से हुई और उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
हालांकि किसी CCTV फुटेज में किसी व्यक्ति की मौजूदगी या नोटों को संभालना अपने आप में पूरे अपराध की पुष्टि नहीं करता। जांच एजेंसियों को यह साबित करना होगा कि संबंधित गतिविधि का वास्तविक उद्देश्य क्या था और उसका 17.29 करोड़ रुपये की कथित नकली करेंसी से क्या संबंध है।
क्या नकली नोट बैंक की शाखाओं और ATM तक पहुंचे?
यही सवाल अब पूरे मामले की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
यदि नकली नोट केवल करेंसी चेस्ट के अंदर तक सीमित थे, तो मामला मुख्य रूप से करेंसी चेस्ट की आंतरिक प्रक्रिया और कथित हेरफेर तक सीमित रह सकता है। लेकिन अगर जांच में यह सामने आता है कि कुछ नकली नोट बैंक की दूसरी शाखाओं, ATM या अन्य माध्यमों से बाहर चले गए थे, तो मामले का दायरा काफी बड़ा हो सकता है।
NIA यह पता लगाने में जुटी है कि करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की आवाजाही किस प्रकार हुई। इसके लिए बैंक के रिकॉर्ड, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, करेंसी मूवमेंट रजिस्टर, CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कितनी नकली करेंसी बैंकिंग सिस्टम से बाहर गई। जांच एजेंसी भी इसी सवाल का जवाब तलाश रही है।
नेपाल कनेक्शन की भी पड़ताल
मामले में संभावित नेपाल कनेक्शन की चर्चा ने जांच को एक और दिशा दे दी है।
तीनों अधिकारियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जाने के पीछे उनके देश छोड़ने की आशंका भी बताई गई थी। सहारनपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नेपाल सीमा से जुड़े संपर्कों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन यहां यह बात साफ समझना जरूरी है कि अभी तक किसी नेपाल-आधारित नेटवर्क से इन अधिकारियों का संबंध साबित नहीं हुआ है। NIA और पुलिस केवल इस संभावना की जांच कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क सीमा के आसपास या सीमा पार सक्रिय किसी व्यक्ति या समूह से तो नहीं थे।
जांच में फोन रिकॉर्ड, यात्रा विवरण, बैंक लेन-देन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिलने वाली जानकारी इस पहलू पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
NIA ने 3 सितंबर को अपने हाथ में लिया मामला
मामले की शुरुआत स्थानीय पुलिस से हुई थी। 29 अगस्त को सहारनपुर के सदर बाजार थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 178 के तहत कार्रवाई शुरू हुई।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA ने जांच अपने हाथ में ली और 3 सितंबर 2026 को केस को अपने स्तर पर री-रजिस्टर किया। NIA के मुताबिक उसका उद्देश्य कथित नकली करेंसी से जुड़ी पूरी साजिश का पता लगाना, अन्य आरोपियों की भूमिका सामने लाना और नकली नोटों के स्रोत तथा उनकी आवाजाही की कड़ी को समझना है।
BNS की धारा 178 में क्या है प्रावधान?
नकली करेंसी से जुड़े अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता में अलग प्रावधान हैं। BNS की धारा 178 नकली सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट की जालसाजी से संबंधित है। इस अपराध में गंभीर सजा का प्रावधान है, जिसमें आजीवन कारावास या अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना शामिल हो सकता है।
इसके अलावा BNS की धारा 179 नकली नोट को असली बताकर इस्तेमाल करने, धारा 180 नकली नोट रखने और धारा 181 नकली करेंसी बनाने के लिए उपकरण या सामग्री रखने से संबंधित है। RBI भी इन प्रावधानों को नकली नोटों से जुड़े अपराधों के संदर्भ में स्पष्ट करता है।
इसलिए यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर नकली नोटों को असली के रूप में चलाने, रखने या उनकी व्यवस्था करने में भूमिका निभाई, तो मामले में संबंधित कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
बैंकिंग सिस्टम के लिए क्यों गंभीर है यह मामला?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यही है कि कथित नकली करेंसी एक बैंक के करेंसी चेस्ट में मिली।
करेंसी चेस्ट सामान्य नकदी रखने की कोई सामान्य जगह नहीं होती। यहां बड़ी मात्रा में मुद्रा की प्राप्ति, गिनती, सुरक्षित रखरखाव और आगे भेजने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है। ऐसे स्थान पर भारी मात्रा में कथित नकली नोटों का मिलना इस बात की जांच की मांग करता है कि आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक तो नहीं हुई।
अगर जांच में यह पता चलता है कि किसी ने जानबूझकर सिस्टम का इस्तेमाल किया, तो यह केवल नकली नोट रखने का मामला नहीं रहेगा, बल्कि बैंकिंग चैनल के कथित दुरुपयोग का मामला भी बन सकता है।
यही कारण है कि NIA अब केवल बरामद नोटों की गिनती तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित नेटवर्क, पैसों की आवाजाही, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों के संपर्कों की पूरी कड़ी तलाश रही है।
असली नोटों और नकली नोटों के बीच कथित खेल क्या था?
जांच के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि यदि करेंसी चेस्ट में नकली नोट रखे गए थे तो उसके बदले असली नोटों का क्या हुआ?
जांच एजेंसियां इस संभावना को भी देख रही हैं कि कहीं नकली नोटों की जगह असली करेंसी को अलग तरीके से निकालकर उसका इस्तेमाल तो नहीं किया गया। इस तरह की किसी भी आशंका की पुष्टि केवल बैंक रिकॉर्ड, CCTV, गिनती के दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के मिलान से ही हो सकती है।
यही वजह है कि जांच में पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। किन तारीखों में कितनी करेंसी आई, किसने गिनी, किसने पैक की, किस अधिकारी ने सत्यापन किया और किस माध्यम से दूसरी जगह भेजी गई—इन सभी सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब कई अहम सवाल हैं।
पहला, 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों का मूल स्रोत क्या था?
दूसरा, क्या ये नोट किसी बाहरी नेटवर्क से बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंचे?
तीसरा, क्या बैंक के किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी?
चौथा, क्या कथित नकली नोटों का कुछ हिस्सा बैंक की दूसरी शाखाओं या ATM तक पहुंचा?
पांचवां, 111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप और नकली नोटों के बीच कोई संबंध है या नहीं?
और छठा, क्या इस पूरे मामले का कोई सीमा पार कनेक्शन है?
इन सवालों का जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ ही सामने आएगा।
निष्कर्ष
सहारनपुर के PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोट मिलने का मामला इसलिए असाधारण है क्योंकि नकली करेंसी की बरामदगी किसी सामान्य स्थान से नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से से हुई है।
NIA द्वारा PNB अधिकारी अमित कुमार की गिरफ्तारी ने मामले की जांच को नया मोड़ दिया है। अब एजेंसी बैंक के भीतर की गतिविधियों से लेकर 111 करोड़ रुपये की करेंसी खेप, CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक रिकॉर्ड और संभावित नेपाल कनेक्शन तक की जांच कर रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17.29 करोड़ रुपये के कथित नकली नोट आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे और क्या उनकी कहानी वहीं खत्म हो गई थी या उनमें से कुछ नोट बैंकिंग सिस्टम के जरिए आगे भी निकल चुके थे।
इस सवाल का जवाब केवल सहारनपुर के इस मामले के लिए महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि इससे यह भी पता चलेगा कि देश की औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में नकली करेंसी को रोकने वाली सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। जांच अभी जारी है और NIA ने साफ किया है कि उसका लक्ष्य पूरी कथित साजिश का पर्दाफाश करना तथा मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है।
अभी मामले में कई सवालों के जवाब बाकी हैं। इसलिए जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य सामने आने से पहले किसी भी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से अपराध सिद्ध मानना उचित नहीं होगा। आने वाले दिनों में NIA की जांच से इस पूरे कथित नकली नोट नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।