सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हवाई के बंदूक कानून को किया रद्द, निजी संपत्तियों में हथियार रखने के नियम बदले
वॉशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हवाई राज्य के उस कानून को रद्द कर दिया, जिसमें लोगों को दुकानों, होटल और अन्य निजी प्रतिष्ठानों में बंदूक ले जाने के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी बनाया गया था। अदालत के इस फैसले को अमेरिका के दूसरे संशोधन (Second Amendment) के तहत हथियार रखने के अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के 6-3 बहुमत वाले फैसले में कहा गया कि राज्य ऐसा नियम नहीं बना सकता, जो कानून का पालन करने वाले नागरिकों के हथियार रखने के संवैधानिक अधिकार पर अनावश्यक रोक लगाए। इस निर्णय के बाद हवाई में सार्वजनिक रूप से खुले निजी स्थानों पर बंदूक ले जाने के नियमों में बड़ा बदलाव आएगा।
फैसले के अनुसार अब लोग शॉपिंग मॉल, गैस स्टेशन और अन्य निजी संपत्तियों में हथियार ले जा सकते हैं, जब तक कि संपत्ति का मालिक स्पष्ट रूप से यह न कहे कि उसके परिसर में बंदूकें प्रतिबंधित हैं।
दूसरे संशोधन के अधिकार पर अहम फैसला
अमेरिकी संविधान का दूसरा संशोधन नागरिकों को हथियार रखने और रखने के अधिकार से संबंधित है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में इसी मुद्दे को लेकर राज्यों और संघीय अदालतों के बीच कई महत्वपूर्ण मामले सामने आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला इसी बहस की कड़ी में आया है। अदालत ने माना कि निजी संपत्तियों में हथियार रखने को पूरी तरह प्रतिबंधित करने वाला नियम संवैधानिक अधिकारों से टकरा सकता है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी संपत्ति मालिकों के अधिकार खत्म नहीं होते। यदि कोई दुकानदार, होटल मालिक या अन्य निजी संस्था अपने परिसर में बंदूक रखने पर रोक लगाना चाहती है तो वह ऐसा कर सकती है।
हवाई के कानून को क्यों कहा गया ‘वैंपायर नियम’
हवाई में लागू कानून को आलोचक कई बार ‘वैंपायर नियम’ कहते थे। इसकी वजह यह थी कि इस नियम के तहत बंदूक रखने वाले व्यक्ति को किसी निजी जगह में हथियार लेकर प्रवेश करने से पहले अनुमति लेनी पड़ती थी।
इसकी तुलना उस काल्पनिक मान्यता से की जाती है जिसमें वैंपायर किसी घर में प्रवेश नहीं कर सकता जब तक उसे अंदर आने का निमंत्रण न मिले।
कानून के विरोधियों का कहना था कि यह व्यवस्था सामान्य नागरिकों के अधिकारों को सीमित करती है और हथियार रखने के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करती है।
हवाई सरकार का तर्क
हवाई सरकार ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। राज्य का कहना था कि निजी संपत्ति मालिकों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि उनकी जगह पर हथियार रखने की अनुमति हो या नहीं।
हवाई ने यह कानून 2023 में उस समय लागू किया था, जब सुप्रीम कोर्ट के 2022 के एक फैसले के बाद कई लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर हथियार ले जाने का अधिकार मिला था।
राज्य सरकार का कहना था कि बिना अनुमति बंदूक लेकर सार्वजनिक स्थानों पर आने से सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
मुकदमा कैसे पहुंचा सुप्रीम कोर्ट तक
इस कानून को चुनौती हवाई फायरआर्म्स कोएलिशन नामक बंदूक अधिकार समूह और तीन नागरिकों ने दी थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हवाई का नियम दूसरे संशोधन के अधिकारों का उल्लंघन करता है। शुरुआत में एक न्यायाधीश ने इस कानून के लागू होने पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में अपील अदालत ने इसे प्रभावी रहने की अनुमति दे दी।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिपब्लिकन प्रशासन ने भी सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ दलीलों का समर्थन किया था।
बंदूक अधिकार समूहों ने फैसले का स्वागत किया
फैसले के बाद बंदूक अधिकार संगठनों ने इसे नागरिक स्वतंत्रता की जीत बताया।
दूसरे संशोधन फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रशंसा की। संगठन के संस्थापक और कार्यकारी उपाध्यक्ष एलेन गॉटलिब ने कहा कि यह कानून शांतिप्रिय नागरिकों को हथियार रखने से रोकने का प्रयास था और अदालत ने इसे सही तरीके से देखा।
उनका कहना था कि संवैधानिक अधिकारों को केवल प्रशासनिक नियमों के जरिए सीमित नहीं किया जा सकता।
गन कंट्रोल समूहों की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर हथियार नियंत्रण समर्थक समूहों ने इस फैसले पर चिंता जताई।
गन-कंट्रोल समूह एवरीटाउन लॉ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद निजी संपत्ति मालिकों के अधिकार सुरक्षित हैं। व्यवसाय मालिक अभी भी अपने प्रतिष्ठानों पर बंदूक प्रतिबंध के संकेत लगा सकते हैं।
समूह की ओर से कहा गया कि किसी निजी व्यक्ति को अपनी संपत्ति पर सुरक्षा संबंधी नियम तय करने का अधिकार बना रहेगा।
अमेरिका में बंदूक कानूनों को लेकर बढ़ती बहस
अमेरिका में बंदूक रखने का अधिकार लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है।
एक पक्ष का मानना है कि संविधान नागरिकों को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखने का अधिकार देता है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि बढ़ती गोलीबारी की घटनाओं को देखते हुए हथियारों पर कड़े नियम जरूरी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले इस बहस को और तेज कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में बंदूक से जुड़े कई बड़े मामले
यह फैसला उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट के सामने हाल के वर्षों में बंदूक अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले आए हैं।
अदालत ने एक मामले में बम्प स्टॉक्स पर लगे प्रतिबंध को रद्द किया था। बम्प स्टॉक ऐसे उपकरण होते हैं जो कुछ हथियारों में तेज गति से फायरिंग की क्षमता बढ़ा सकते हैं।
वहीं एक अन्य मामले में अदालत ने घरेलू हिंसा के आरोपियों से जुड़े संघीय बंदूक प्रतिबंध कानून को बरकरार रखा था।
इन फैसलों से यह संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट एक तरफ हथियार रखने के संवैधानिक अधिकार को महत्व दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ सुरक्षा संबंधी सीमाओं को भी स्वीकार कर रहा है।
राज्यों पर पड़ेगा असर
हवाई के अलावा कुछ अन्य राज्यों ने भी इसी तरह के कानून बनाए थे, जिनमें निजी संपत्तियों में बंदूक ले जाने पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की गई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन राज्यों के कानूनों पर भी असर पड़ सकता है। अदालत का निर्णय भविष्य में आने वाले ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा।
हालांकि राज्यों को अब भी स्कूल, सरकारी भवन, संवेदनशील स्थानों और कुछ विशेष क्षेत्रों में हथियारों पर नियम बनाने का अधिकार रह सकता है।
आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अमेरिका में हथियारों के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच चल रही बहस को फिर केंद्र में ला दिया है।
जहां बंदूक समर्थक इसे संविधान की रक्षा बता रहे हैं, वहीं सुरक्षा विशेषज्ञ इसे हथियार नियंत्रण के लिए चुनौती मान रहे हैं।
अब देखना होगा कि हवाई और अन्य राज्य इस फैसले के बाद अपने कानूनों में किस तरह बदलाव करते हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और कानूनी लड़ाई होने की संभावना भी बनी हुई है।