बोकारो की लापता युवती मामले में डीएनए रिपोर्ट पर हाई कोर्ट सख्त, कंकाल की पहचान को लेकर उठे सवाल
झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती से जुड़े मामले में केंद्रीय फारेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल), कोलकाता की डीएनए रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद राज्य सरकार से कई अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा है। अदालत ने साफ किया है कि मामले में जांच की दिशा, पुलिस की कार्रवाई और बरामद अवशेषों की पहचान को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट की जाए।
मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब हाई कोर्ट के सामने डीएनए रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार बरामद अवशेषों में से केवल दांत के नमूने का डीएनए युवती के माता-पिता के डीएनए से मेल खाता है, जबकि पूरे बरामद कंकाल के डीएनए की अंतिम पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। इस तथ्य ने मामले में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब पूरे कंकाल की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो जांच एजेंसी को हर पहलू की गंभीरता से जांच करनी होगी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा कि इस मामले में आगे की कार्रवाई किस आधार पर की जा रही है और पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
कंकाल की पहचान पर परिवार को अब भी संदेह
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि युवती के परिजन अभी भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि बरामद कंकाल उनकी बेटी का ही है। परिवार की इस आशंका को देखते हुए अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया।
परिजनों का कहना है कि केवल एक दांत के डीएनए मिल जाने से पूरे कंकाल की पहचान सुनिश्चित नहीं हो जाती। वे चाहते हैं कि जांच पूरी तरह वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से हो, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में पुलिस को कानून और जांच प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ना होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्थानीय पुलिस पर पहले भी उठे थे सवाल
बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र से 21 जुलाई 2025 को 18 वर्षीय युवती अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने काफी तलाश के बाद पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन आरोप है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई।
जब कई दिनों तक युवती का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार ने न्याय के लिए झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा था।
अदालत की सख्ती के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई। बाद में मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई। एसआईटी का गठन भी किया गया, जिसने अलग-अलग पहलुओं से जांच शुरू की।
दस किलोमीटर दूर मिला था मानव कंकाल
जांच के दौरान अप्रैल 2026 में पुलिस ने दावा किया कि युवती के घर से लगभग 10 किलोमीटर दूर एक मानव कंकाल बरामद हुआ है। पुलिस को शक था कि यह अवशेष लापता युवती के हो सकते हैं।
इसके बाद बरामद कंकाल और अन्य अवशेषों को वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया। माता-पिता के डीएनए नमूने भी लिए गए ताकि यह पता लगाया जा सके कि बरामद अवशेष युवती के ही हैं या नहीं।
सीएफएसएल कोलकाता की जांच रिपोर्ट आने के बाद अब मामला फिर हाई कोर्ट में पहुंचा है। रिपोर्ट में दांत के नमूने का मिलान होने की बात सामने आई, लेकिन पूरे कंकाल की पहचान को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला।
हाई कोर्ट ने मांगा पुलिस कार्रवाई का पूरा ब्योरा
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जांच में शुरुआती लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई।
अदालत ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा गया कि जांच एजेंसी ने अब तक कौन-कौन से कदम उठाए हैं और आगे की योजना क्या है।
हाई कोर्ट ने बरामद कंकाल का पंचनामा और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने का निर्देश भी दिया। अदालत ने कहा कि मामले में सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया जाना चाहिए ताकि आगे किसी तरह की परेशानी न हो।
परिवार को चाहिए सच्चाई, सिर्फ दावा नहीं
लापता युवती के परिवार के लिए यह मामला केवल जांच का विषय नहीं बल्कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। परिवार लगातार यह मांग कर रहा है कि उन्हें पूरी सच्चाई बताई जाए।
ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जांच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। डीएनए परीक्षण को पहचान का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है, लेकिन जब रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट न हो तो जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
परिवार का कहना है कि जब तक पूरी तरह पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक उनकी शंकाएं बनी रहेंगी। वे चाहते हैं कि हर सबूत की दोबारा जांच हो और किसी भी संभावना को नजरअंदाज न किया जाए।
सीआईडी कर रही है पूरे मामले की जांच
फिलहाल इस मामले की जांच झारखंड सीआईडी कर रही है। एसआईटी के सदस्य भी हाई कोर्ट में मौजूद रहे और जांच की प्रगति से अदालत को अवगत कराया।
हाई कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच से अब उम्मीद है कि मामले के सभी अनसुलझे सवालों के जवाब मिलेंगे। अदालत ने जिस तरह से डीएनए रिपोर्ट, पुलिस कार्रवाई और जांच की कमियों पर सवाल उठाए हैं, उससे साफ है कि मामले में कोई भी पहलू बिना जांच के नहीं छोड़ा जाएगा।
बोकारो की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी भी गुमशुदगी के मामले में शुरुआती जांच कितनी महत्वपूर्ण होती है। समय पर कार्रवाई, वैज्ञानिक जांच और संवेदनशील पुलिसिंग ही ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का रास्ता बन सकती है।