महरौली की मासूम के साथ दरिंदगी: कैब ड्राइवर ने रची थी सबूत मिटाने की साजिश, CCTV और तकनीकी जांच से खुला पूरा राज
देश की राजधानी दिल्ली के महरौली इलाके में 10 साल की मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद आरोपी कैब ड्राइवर बसु सिंह ने खुद को बचाने के लिए कई स्तर पर सबूत मिटाने की कोशिश की, लेकिन उसकी हर चाल पुलिस की तकनीकी जांच और सीसीटीवी कैमरों के सामने बेनकाब हो गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने वारदात के बाद ऐसा व्यवहार किया जैसे कुछ हुआ ही न हो। उसने रास्ते में अपने कपड़े बदले, गाड़ी को साफ किया और सामान्य तरीके से अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां जारी रखीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपी ने अपराध के बाद सबूतों को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन घटनास्थल से लेकर उसके आने-जाने के रास्तों तक लगे कैमरों ने महत्वपूर्ण सुराग दे दिए।
CCTV फुटेज बनी पुलिस की सबसे बड़ी कड़ी
मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम साबित हुई। पुलिस ने इलाके के अलग-अलग कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली, जिसमें आरोपी की गतिविधियां कैद मिलीं। जांच के दौरान सामने आया कि घटना के बाद आरोपी गुड़गांव स्थित एक रिहायशी इलाके में पहुंचा, जहां उसने अपनी कार साफ की।
वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड ने भी आरोपी को देखा था। पुलिस ने गार्ड से पूछताछ कर कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। इसके बाद आरोपी की गतिविधियों को जोड़ते हुए पुलिस ने तकनीकी निगरानी शुरू की।
जांच में पता चला कि कार साफ करने के बाद आरोपी ने गुड़गांव के चक्करपुर इलाके से एक सवारी उठाई और उसे नांगलोई छोड़ा। इसके बाद जब वह विकासपुरी की तरफ जा रहा था, तभी पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पहले से दर्ज थे कई मामले
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का आपराधिक इतिहास नया नहीं था। उसके खिलाफ बिहार के खगड़िया जिले में पहले से कई मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। इनमें छेड़छाड़, दंगा और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ये मामले अलग-अलग वर्षों में दर्ज किए गए थे। हालांकि, पुलिस अभी बिहार पुलिस से आधिकारिक जानकारी जुटा रही है। आरोपी ने अपने ऊपर दर्ज मामलों को लेकर सफाई देते हुए दावा किया है कि कुछ मामले पारिवारिक जमीन विवाद से जुड़े थे।
जांच एजेंसियां अब उसके पुराने रिकॉर्ड की भी गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका आपराधिक व्यवहार पहले से किस स्तर का था।
कैब ड्राइवर बनने से पहले था सिक्योरिटी गार्ड
आरोपी बसु सिंह के बारे में पता चला है कि वह पहले सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता था। बाद में उसने कैब चलाना शुरू किया। वह एक कैब एग्रीगेटर कंपनी के साथ रजिस्टर्ड था और सत्यापन प्रक्रिया से भी गुजरा था।
कार मालिक अंकित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपना कैब व्यवसाय शुरू करने के लिए एक पुरानी कार खरीदी थी और फरवरी में उसे चलाने के लिए सिंह को दी थी। अंकित के अनुसार, उनकी आरोपी से बातचीत केवल गाड़ी के किराए और कामकाज तक सीमित रहती थी।
उन्होंने बताया कि सिंह ने कभी-कभी पारिवारिक विवाद का जिक्र किया था, लेकिन उसके व्यवहार से ऐसा कुछ अंदाजा नहीं लगा कि वह इतना गंभीर अपराध कर सकता है।
आरोपी ने इलाके की जानकारी का उठाया फायदा
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि जिस रास्ते से बच्ची को ले जाया गया और जहां शव को छोड़ा गया, वह उस इलाके से अच्छी तरह परिचित था। कैब चलाने के कारण वह कई रास्तों और इलाकों को जानता था।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने घटना को अचानक अंजाम दिया या पहले से कोई योजना बनाई थी। इसके लिए उसके मोबाइल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस ने कराया पोटेंसी टेस्ट
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी का पोटेंसी टेस्ट भी कराया है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर रही हैं।
पुलिस ने आरोपी के उन कपड़ों को भी जब्त किया है, जो सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहे थे। इन कपड़ों और अन्य सबूतों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
परिवार ने मांगी कड़ी सजा
घटना के बाद पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश है। बच्ची के पिता ने आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे अपराधों में दोषियों को सख्त से सख्त दंड मिलना चाहिए, ताकि समाज में ऐसा अपराध करने वालों को कड़ा संदेश जाए।
इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और ड्राइवरों के सत्यापन जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी होगी।
महरौली की इस घटना ने राजधानी को झकझोर दिया है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और अदालत की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और दोषी को कानून के अनुसार सजा मिले।