IndianLawNotes.com

उज्जैन में साधु गंगेश्वरी महाराज की संदिग्ध मौत: 10 दिन बाद खोली गई समाधि, आखिरी फोन कॉल ने बढ़ाया हत्या का शक

उज्जैन में साधु गंगेश्वरी महाराज की संदिग्ध मौत: 10 दिन बाद खोली गई समाधि, आखिरी फोन कॉल ने बढ़ाया हत्या का शक

उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलनाथ क्षेत्र स्थित मलानी बाबा की कुटिया में रहने वाले साधु गंगेश्वरी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उनकी 10 दिन पुरानी समाधि को खोदकर शव बाहर निकाला गया है। परिजनों ने साधु की मौत को सामान्य मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

गंगेश्वरी महाराज का असली नाम सुनील जोशी था। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के जावरा क्षेत्र के रहने वाले थे। कई साल पहले उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर संन्यास का रास्ता अपनाया था और उज्जैन में साधु जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनकी मौत की खबर परिवार तक जिस तरीके से पहुंची और अंतिम संस्कार जैसी प्रक्रिया बिना सूचना के पूरी कर दी गई, उसने परिजनों के मन में कई संदेह पैदा कर दिए हैं।

आखिरी फोन कॉल बना जांच का सबसे बड़ा सुराग

इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी महाराज की आखिरी फोन बातचीत को माना जा रहा है। परिजनों के मुताबिक, मौत से कुछ दिन पहले गंगेश्वरी महाराज ने अपने भाइयों से फोन पर बातचीत की थी।

बातचीत के दौरान वह अपनी मां कृष्णा बाई को धार्मिक यात्रा पर ले जाने की योजना बना रहे थे। परिवार के लिए यह एक सामान्य बातचीत थी, लेकिन अचानक फोन पर माहौल बदल गया।

भाइयों का दावा है कि बातचीत के दौरान ही महाराज किसी अन्य व्यक्ति से बहस करने लगे। फोन पर विवाद की आवाज सुनाई दे रही थी। कुछ ही देर बाद कॉल कट गया और महाराज का मोबाइल फोन बंद हो गया।

इसके बाद परिवार वालों को चिंता हुई। कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन लगातार बंद आता रहा। अनहोनी की आशंका के चलते भाई उज्जैन स्थित कुटिया पहुंचे।

वहां पहुंचने के बाद उन्हें जो जानकारी मिली, उसने उन्हें हैरान कर दिया। कुटिया से जुड़े लोगों ने बताया कि गंगेश्वरी महाराज की मृत्यु हो चुकी है और करीब आठ दिन पहले ही उन्हें कुटिया के पीछे समाधि दे दी गई है।

परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई?

महाराज की मौत की जानकारी परिवार को समय पर नहीं मिलने पर परिजनों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि मौत सामान्य थी तो परिवार के सदस्यों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई?

परिजनों के अनुसार, गंगेश्वरी महाराज का अपने परिवार से संपर्क बना हुआ था। वह अपनी मां को धार्मिक यात्रा पर ले जाने की बात कर रहे थे। ऐसे में अचानक मौत और बिना बताए समाधि दिए जाने की घटना संदेह पैदा करती है।

भाइयों ने पुलिस के सामने कई बिंदु रखे हैं और मामले की गहराई से जांच की मांग की है।

हत्या के शक की तीन बड़ी वजहें

परिवार वालों ने हत्या की आशंका के पीछे कई कारण बताए हैं।

पहला सवाल यह है कि महाराज की मौत के बाद उनके करीबी रिश्तेदारों को सूचना क्यों नहीं दी गई। सामान्य परिस्थितियों में परिवार को अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

दूसरा बड़ा सवाल महाराज के निजी सामान और मोटरसाइकिल को लेकर है। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद उनका कुछ सामान और वाहन कुटिया से गायब मिला। इससे संदेह और गहरा गया है।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है आखिरी फोन कॉल। जिस समय महाराज की अपने भाइयों से बातचीत हो रही थी, उसी दौरान किसी व्यक्ति से विवाद होना और फिर अचानक फोन बंद हो जाना जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर आखिरी समय में महाराज किससे बात कर रहे थे और विवाद किस बात को लेकर हुआ था।

प्रशासन की अनुमति से खोली गई समाधि

परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच आगे बढ़ने के बाद प्रशासनिक अनुमति लेकर 20 जून 2026 को समाधि खोदने की कार्रवाई की गई।

पुलिस की मौजूदगी में समाधि खोली गई और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी प्रक्रिया सावधानी से पूरी की गई। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।

पुलिस खंगाल रही आखिरी कॉल और कुटिया से जुड़े लोगों की जानकारी

चिमनगंज थाना पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

जांच में महाराज के आखिरी कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डिटेल और कुटिया से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मौत के समय कुटिया में कौन-कौन मौजूद था और समाधि देने की प्रक्रिया किसके निर्णय पर हुई।

इसके अलावा महाराज के निजी सामान, वाहन और अन्य वस्तुओं की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

संन्यास लेने की कहानी भी जुड़ी है इस मामले से

गंगेश्वरी महाराज का जीवन भी अपने आप में अलग कहानी रहा है। मूल रूप से जावरा निवासी सुनील जोशी ने कई वर्षों पहले पारिवारिक जीवन से अलग होकर संन्यास अपना लिया था।

बताया जाता है कि पत्नी के अलग होने के बाद उन्होंने सांसारिक मोह छोड़ दिया और उज्जैन आकर साधु जीवन शुरू किया।

मंगलनाथ क्षेत्र में वह धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहते थे और स्थानीय लोगों में उनकी पहचान एक साधु के रूप में थी।

ऐसे व्यक्ति की संदिग्ध मौत ने स्थानीय लोगों को भी हैरान कर दिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का रहस्य

फिलहाल पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मानी जा रही है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि साधु की मौत बीमारी, किसी दुर्घटना या किसी अन्य कारण से हुई थी।

यदि रिपोर्ट में किसी तरह की चोट या संदिग्ध तथ्य सामने आते हैं तो पुलिस की जांच का रुख बदल सकता है।

परिवार लगातार मांग कर रहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उज्जैन जैसे धार्मिक शहर में सामने आए इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि गंगेश्वरी महाराज की मौत के पीछे आखिर असली वजह क्या थी।