देवरिया शिक्षक आत्महत्या मामला: चार महीने से फरार पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव दिल्ली से गिरफ्तार, सुसाइड नोट में लगाए गए थे गंभीर आरोप
25 हजार रुपये की इनामी अधिकारी को गोरखपुर पुलिस ने पकड़ा, जांच में सामने आई थी भूमिका; एक अन्य आरोपी अब भी फरार
देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में चर्चित शिक्षक आत्महत्या मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब चार महीने से फरार चल रही और 25 हजार रुपये की इनामी पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को गोरखपुर पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है।
शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद सामने आए सुसाइड नोट और वीडियो ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया था। मृतक शिक्षक ने अपनी आखिरी रिकॉर्डिंग और लिखित नोट में तत्कालीन बीएसए समेत कई लोगों पर मानसिक उत्पीड़न और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
मामले में पुलिस लगातार फरार आरोपियों की तलाश कर रही थी। अदालत से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी शालिनी श्रीवास्तव लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर थीं। आखिरकार गोरखपुर की गुलरिहा पुलिस ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया।
फरवरी में दर्ज हुआ था मुकदमा
शिक्षक आत्महत्या मामले में पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के खिलाफ 22 फरवरी को मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी। जांच के दौरान जब उनका नाम और भूमिका सामने आई तो प्रशासन ने भी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद अब उनसे पूछताछ की जाएगी और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
कौन थे शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह?
यह मामला कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह से जुड़ा है।
कृष्ण मोहन सिंह देवरिया जिले के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।
वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के घर रह रहे थे।
बताया गया कि वह लंबे समय से विभागीय स्तर पर चल रही परेशानियों से तनाव में थे।
20 फरवरी की रात उन्होंने अपने आवास पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
इस घटना के बाद परिवार और शिक्षक समुदाय में आक्रोश फैल गया था।
सुसाइड नोट और वीडियो ने खोले थे मामले के कई पहलू
आत्महत्या से पहले शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने एक सुसाइड नोट लिखा था और एक वीडियो भी जारी किया था।
इन दोनों में उन्होंने तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, बीएसए कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह और कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और विभागीय स्तर पर दबाव बनाया गया।
सुसाइड नोट और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया।
परिवार की शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई।
प्रशासन ने की थी कार्रवाई
जांच के दौरान अधिकारियों ने आरोपों को गंभीर माना।
इसके बाद तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बीएसए कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह को निलंबित कर दिया गया।
जांच में दोनों की भूमिका को लेकर सवाल सामने आए, जिसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
इस कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर हो गया।
शिक्षक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई थी।
बिचौलिए की भूमिका निभाने वाला आरोपी पहले ही गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान पुलिस को कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जानकारी मिली।
पुलिस ने इस प्रकरण में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले एक पूर्व प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि पूरे मामले में कई स्तरों पर भूमिका की जांच जरूरी है।
इसी कारण पुलिस सभी आरोपियों की गतिविधियों और आपसी संबंधों की जांच कर रही है।
बीएसए कार्यालय का बाबू अभी भी फरार
इस मामले में एक अन्य आरोपी बीएसए कार्यालय का लिपिक संजीव सिंह अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि घटना से पहले किन-किन लोगों की शिक्षक से बातचीत हुई थी और क्या परिस्थितियां बनीं जिनके कारण शिक्षक ने इतना बड़ा कदम उठाया।
गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं कई अहम राज
पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस के सामने जांच को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है।
पूछताछ के दौरान कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि:
- शिक्षक पर किस तरह का दबाव बनाया गया था?
- विभागीय कार्रवाई के पीछे क्या कारण थे?
- आरोपों में शामिल अन्य लोगों की क्या भूमिका थी?
- घटना से पहले किन लोगों से संपर्क हुआ था?
माना जा रहा है कि पूछताछ के बाद मामले में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
शिक्षक समुदाय में घटना को लेकर नाराजगी
कृष्ण मोहन सिंह की मौत के बाद शिक्षक समुदाय में काफी नाराजगी देखी गई थी।
कई शिक्षकों ने मांग की थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
शिक्षकों का कहना था कि सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को भी सम्मानजनक और भयमुक्त माहौल मिलना चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं अदालत में भी मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
किसी भी आरोपी की अंतिम जिम्मेदारी न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
फिलहाल इस चर्चित मामले में पूर्व बीएसए की गिरफ्तारी से पुलिस को जांच में नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि पूछताछ और आगे की जांच में कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और फरार चल रहे अन्य आरोपियों पर कब तक शिकंजा कसता है।