हाईकोर्ट और PCCF के आदेश भी बेअसर! यूपी में वन रेंजर को क्यों नहीं मिल रही दोबारा कुर्सी? जानें पूरा मामला
रामपुर। उत्तर प्रदेश वन विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय आदेशों के पालन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा निलंबन आदेश पर रोक लगाए जाने और प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) द्वारा बहाली का आदेश जारी किए जाने के बाद भी एक वन क्षेत्राधिकारी को अब तक अपनी जिम्मेदारी संभालने का मौका नहीं मिला है।
रामपुर वन प्रभाग में तैनात रहे वन रेंजर विजय कुमार सिंह गौतम का कहना है कि न्यायालय और विभाग के उच्च अधिकारियों के आदेश लेकर वह लगातार अधिकारियों के पास जा रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया है।
निलंबन से शुरू हुआ विवाद
विजय कुमार सिंह गौतम 31 दिसंबर 2025 से 27 फरवरी 2026 तक रामपुर वन प्रभाग की स्वार रेंज में क्षेत्रीय वन अधिकारी के पद पर तैनात थे। इसी दौरान उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर कई गंभीर आरोप लगाए गए।
उन पर आरोप था कि क्षेत्र में अवैध कटान पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, खैर प्रकाष्ठ से भरे वाहनों को उच्च अधिकारियों की जानकारी के बिना छोड़ दिया गया और अपने सरकारी कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया गया।
इन आरोपों के आधार पर विभाग ने 27 फरवरी 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की गई और आरोप पत्र जारी कर निदेशक, प्राणी उद्यान कानपुर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
अपने निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए विजय कुमार सिंह गौतम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 8 मई को निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। न्यायालय ने विभाग को निर्देश दिया कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को जल्द पूरा किया जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विजय कुमार सिंह गौतम ने विभाग को प्रत्यावेदन देकर सेवा में बहाली और कार्यभार दिए जाने की मांग की।
PCCF ने भी दे दिया बहाली आदेश
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पीसीसीएफ कार्यालय लखनऊ ने उनके प्रत्यावेदन पर विचार किया।
इसके बाद 27 फरवरी 2026 को जारी निलंबन आदेश को समाप्त करते हुए विजय कुमार सिंह गौतम को तत्काल प्रभाव से सेवा में पुनर्बहाल करने का आदेश जारी कर दिया गया।
लेकिन इसके बावजूद उन्हें अभी तक पुरानी जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।
आदेशों के बावजूद नहीं मिला कार्यभार
विजय कुमार सिंह गौतम का आरोप है कि विभाग के उच्च स्तर से स्पष्ट आदेश होने के बाद भी जिला स्तर पर उसका पालन नहीं किया जा रहा है।
उनका कहना है कि वह हाईकोर्ट के आदेश और PCCF के बहाली पत्र की प्रतियां लेकर अधिकारियों से मिल रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब न्यायालय और विभाग के सर्वोच्च अधिकारी बहाली का आदेश दे चुके हैं तो फिर उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने में देरी क्यों की जा रही है?
विभाग का पक्ष क्या है?
इस मामले में डीएफओ प्रणव जैन ने बताया कि निलंबन के बाद विजय कुमार सिंह गौतम को वन संरक्षक मुरादाबाद कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था।
उनका कहना है कि उन्हें न्यायालय और मुख्यालय के आदेशों के साथ अपना प्रत्यावेदन वन संरक्षक मुरादाबाद कार्यालय में देना चाहिए। इसके बाद उच्च अधिकारियों द्वारा उनकी नियुक्ति और तैनाती को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
अब आगे क्या?
मामला अब वन विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्णय पर टिका हुआ है। एक तरफ न्यायालय का आदेश है, दूसरी तरफ PCCF कार्यालय से बहाली का निर्देश जारी हो चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्यभार नहीं मिलने से स्थिति बनी हुई है।
अब देखना यह होगा कि विभाग कब तक अपने ही उच्च अधिकारियों के आदेशों को लागू करता है और विजय कुमार सिंह गौतम को दोबारा उनकी जिम्मेदारी सौंपी जाती है या नहीं।
यह मामला केवल एक अधिकारी की तैनाती का नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के प्रभावी पालन और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।