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उत्तम नगर तरुण हत्याकांड: आरोपी की उम्र को लेकर विवाद, जेजेबी करेगा दस्तावेजों की गहन जांच

उत्तम नगर तरुण हत्याकांड: आरोपी की उम्र को लेकर विवाद, जेजेबी करेगा दस्तावेजों की गहन जांच

नई दिल्ली। उत्तम नगर के चर्चित तरुण हत्याकांड में आरोपी के नाबालिग होने के दावे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले की सुनवाई कर रहे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) ने आरोपी की उम्र से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर विरोधाभास पाए जाने के बाद जांच को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

बोर्ड ने स्कूल रिकॉर्ड और नगर निगम द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज जन्मतिथि के अंतर को महत्वपूर्ण मानते हुए संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य और जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले नगर निगम के अधिकारियों को 27 जून को बोर्ड के सामने उपस्थित होने का आदेश दिया है।

जेजेबी अब सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ करेगा और यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि घटना के समय आरोपी की वास्तविक उम्र क्या थी। उम्र निर्धारण का यह फैसला इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी आधार पर तय होगा कि आरोपी के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी या फिर उसे एक वयस्क आरोपी की तरह कानून का सामना करना पड़ेगा।

जन्मतिथि को लेकर सामने आया बड़ा अंतर

मामले में आरोपी पक्ष की ओर से जो स्कूल रिकॉर्ड पेश किया गया है, उसमें आरोपी की जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज बताई गई है। इस रिकॉर्ड के आधार पर घटना के समय आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम मानी जाएगी और उसे किशोर की श्रेणी में रखा जा सकता है।

वहीं, जांच अधिकारी द्वारा सत्यापित नगर निगम के जन्म प्रमाण पत्र में आरोपी की जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2007 दर्ज होने का दावा किया गया है। यदि यह रिकॉर्ड सही पाया जाता है तो घटना के समय आरोपी की उम्र 18 वर्ष से अधिक होगी और उसे कानून की नजर में बालिग माना जाएगा।

दोनों दस्तावेजों में चार वर्ष का अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले में उम्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब जेजेबी के सामने यह तय करना सबसे बड़ी चुनौती है कि कौन सा दस्तावेज वास्तविक और विश्वसनीय है।

उम्र तय होने से बदलेगी कानूनी स्थिति

कानून के अनुसार किसी आरोपी की उम्र घटना की तारीख पर तय की जाती है। यदि आरोपी घटना के समय 18 वर्ष से कम उम्र का पाया जाता है तो उसके खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं।

ऐसी स्थिति में आरोपी को सामान्य आपराधिक अदालत के बजाय किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाता है और उसके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है।

लेकिन यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपी घटना के समय बालिग था, तो उसके खिलाफ सामान्य आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

इसी वजह से इस मामले में जन्मतिथि का विवाद केवल एक दस्तावेजी गलती का विषय नहीं रह गया है, बल्कि आरोपी की पूरी कानूनी स्थिति इसी पर निर्भर हो गई है।

जेजेबी ने अधिकारियों को क्यों बुलाया

बृहस्पतिवार को द्वारका स्थित जेजेबी में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आरोपी की उम्र से संबंधित दस्तावेजों में पाए गए अंतर पर विस्तार से चर्चा हुई।

बोर्ड ने कहा कि केवल किसी एक दस्तावेज के आधार पर उम्र का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सभी रिकॉर्ड की जांच, उनकी प्रमाणिकता और उन्हें जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा आवश्यक है।

इसी कारण बोर्ड ने स्कूल के प्रधानाचार्य और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जानकारी देने का निर्देश दिया है।

बोर्ड यह भी देखेगा कि स्कूल रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया गया था, जन्म प्रमाण पत्र किस दस्तावेज के आधार पर जारी हुआ और दोनों रिकॉर्ड में अंतर आने की वजह क्या है।

अदालत पहले ही जता चुकी है आपत्ति

इससे पहले द्वारका कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) रजत गोयल की अदालत ने जेजेबी के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें आरोपी को नाबालिग माना गया था।

अदालत ने कहा था कि उम्र से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां मौजूद हैं और पर्याप्त जांच किए बिना आरोपी को नाबालिग मान लेना उचित नहीं था।

अदालत ने यह भी माना कि उम्र निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी करना पर्याप्त नहीं है। रिकॉर्ड की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है।

इसके बाद मामला दोबारा जेजेबी के सामने आया और अब बोर्ड नए सिरे से उम्र की जांच कर रहा है।

जमानत याचिका वापस ली गई

सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने अपनी जमानत याचिका वापस ले ली। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले का अंत हो गया है। आरोपी की उम्र को लेकर जांच जारी रहेगी और इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

उम्र विवाद का समाधान होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपी के खिलाफ किस कानून के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षणिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई मामलों में उम्र निर्धारण के लिए स्कूल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों को आधार बनाया जाता है।

लेकिन जब अलग-अलग दस्तावेजों में अंतर सामने आता है तो जांच एजेंसियों और अदालतों के सामने चुनौती बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किशोर न्याय मामलों में उम्र निर्धारण बेहद संवेदनशील विषय होता है, क्योंकि एक गलत निर्णय से आरोपी के अधिकार और पीड़ित पक्ष को मिलने वाला न्याय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

आगे की सुनवाई पर टिकी नजरें

अब सभी की नजरें 27 जून को होने वाली जेजेबी की सुनवाई पर हैं। इस दिन स्कूल प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी बोर्ड के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

इसके बाद बोर्ड यह तय करेगा कि आरोपी की वास्तविक उम्र क्या थी और उसके खिलाफ किस कानूनी व्यवस्था के तहत कार्रवाई की जाएगी।

उत्तम नगर तरुण हत्याकांड में उम्र का यह विवाद अब मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आरोपी किशोर न्याय कानून के दायरे में आएगा या फिर उसे वयस्क आरोपी के रूप में मुकदमे का सामना करना होगा।