सरप्लस शिक्षकों के पुनर्समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 26 जून तक भेजनी होगी अंतिम सूची
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में सरप्लस शिक्षकों के पुनर्समायोजन (री-एडजस्टमेंट) की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद शासन ने सभी जिलों को स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं कि विद्यालयों में जरूरत से अधिक तैनात शिक्षकों की पहचान कर उनकी सत्यापित सूची तैयार की जाए और तय समय सीमा के भीतर शासन को भेजी जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरप्लस शिक्षकों की सूची का दोबारा परीक्षण कराया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की गलती, मनमानी या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। शासन ने साफ किया है कि पुनर्समायोजन की प्रक्रिया केवल निर्धारित नियमों और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर ही पूरी की जाएगी।
यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे मामले सौरभ कुमार सिंह व छह अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि शिक्षकों के पुनर्समायोजन की प्रक्रिया निष्पक्ष और समान मानकों के आधार पर होनी चाहिए ताकि किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।
हाईकोर्ट ने दिए थे सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी पहले यह सुनिश्चित करें कि सरप्लस शिक्षकों की जो सूचियां तैयार की गई हैं, वे 22 अप्रैल 2026 को जारी न्यायालयीय निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि किसी जिले में सूची तैयार करने में कोई कमी रह गई है या नियमों का सही पालन नहीं हुआ है तो उसे तत्काल सुधारना होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागजी कार्रवाई पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा। अधिकारियों को यह प्रमाणित करना होगा कि सूची वास्तविक छात्र संख्या, विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता और निर्धारित मानकों के आधार पर तैयार की गई है।
न्यायालय के निर्देश के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित अवधि के अंदर पूरी की जानी है। इसके लिए जिलाधिकारियों को दस दिन के भीतर सत्यापन की कार्रवाई पूरी करने को कहा गया है।
26 जून तक भेजनी होगी अंतिम रिपोर्ट
शासन ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि सरप्लस शिक्षकों से संबंधित अंतिम सूचना 26 जून तक उपलब्ध करा दी जाए। इससे पहले जिला स्तर पर तैयार प्रारंभिक सूची का सत्यापन होगा। इसके बाद शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों से प्राप्त आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।
सभी आपत्तियों का निस्तारण 20 जून तक करने के निर्देश दिए गए हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद जो अंतिम सूची तैयार होगी, उसी के आधार पर आगे की पुनर्समायोजन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
‘फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट’ होगा आधार
सरप्लस शिक्षकों की पहचान के लिए पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट (FIFO) सिद्धांत अपनाया जाएगा। इसका मतलब है कि जिस शिक्षक की नियुक्ति पहले हुई है, उसे सरप्लस की श्रेणी में पहले शामिल किया जाएगा।
विषयवार शिक्षकों के मामले में भी यही व्यवस्था लागू होगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि इसके अलावा किसी अन्य मानक या व्यक्तिगत आधार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के सभी जिलों में शिक्षकों की छंटनी या पुनर्समायोजन की प्रक्रिया एक समान तरीके से हो और किसी शिक्षक के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा न हो।
अंतरिम आदेश वाले शिक्षकों को मिलेगी व्यवस्था
शासन के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जिला स्तरीय समिति प्रारंभिक सूची तैयार करते समय अंतरिम न्यायालयीय आदेशों को शामिल नहीं करेगी। हालांकि जिन शिक्षकों के संबंध में अदालत से कोई अंतरिम राहत मिली हुई है, उनके स्थान पर क्रम में अगले शिक्षक का नाम वैकल्पिक रूप से प्रस्तावित किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि न्यायालय के आदेशों का सम्मान भी बना रहे और पुनर्समायोजन की प्रशासनिक प्रक्रिया भी बाधित न हो।
आपत्तियों के निस्तारण में प्रमाणित आंकड़े होंगे आधार
शिक्षकों द्वारा दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों पर केवल उन्हीं तथ्यों पर विचार किया जाएगा जिन्हें जिलाधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया हो। यदि किसी शिक्षक की आपत्ति से यह साबित होता है कि आपत्ति दाखिल करने की तारीख तक विद्यालय में छात्र-शिक्षक अनुपात बदल चुका था, तो समिति उस बदलाव को ध्यान में रख सकती है।
हालांकि शासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 30 अप्रैल 2026 की कटऑफ तिथि के बाद के आंकड़ों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यानी बाद में बदली हुई छात्र संख्या या अन्य आंकड़ों के आधार पर सूची में बदलाव नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों में बढ़ी चिंता और उम्मीद
सरप्लस शिक्षकों के पुनर्समायोजन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रदेश के हजारों शिक्षकों में चिंता और उम्मीद दोनों की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक चाहते हैं कि प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हो ताकि वास्तविक जरूरत वाले विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध हो सकें और किसी को गलत तरीके से सरप्लस घोषित न किया जाए।
शिक्षक संगठनों का भी कहना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता और छात्र संख्या का सही आकलन जरूरी है। कई बार स्थानीय परिस्थितियों के कारण छात्र संख्या में बदलाव आता है, इसलिए वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
विभाग का उद्देश्य व्यवस्था सुधारना
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि पुनर्समायोजन का उद्देश्य किसी शिक्षक को परेशान करना नहीं बल्कि विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है। कई विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक हैं जबकि कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
सरकार का प्रयास है कि शिक्षकों को वहां भेजा जाए जहां उनकी वास्तविक आवश्यकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो।
अब सभी जिलों की अंतिम रिपोर्ट 26 जून तक शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद प्रदेश स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के कारण पूरी प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी बनी हुई है, इसलिए अधिकारियों को हर कदम नियमों के अनुसार उठाने होंगे। :::