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जिंदा महिला को बना दिया मृत, नगर पालिका से जारी हुआ फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र; जमीन हड़पने के खेल में बड़ा खुलासा

जिंदा महिला को बना दिया मृत, नगर पालिका से जारी हुआ फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र; जमीन हड़पने के खेल में बड़ा खुलासा

        अमरोहा। सरकारी दस्तावेजों में किसी व्यक्ति को मृत घोषित कर देना केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी और संपत्ति पर सीधा हमला है। अमरोहा नगर पालिका परिषद के जन्म-मृत्यु पटल से सामने आए एक मामले ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक जीवित महिला महफूजा बेगम का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, जबकि वह खुद अपनी जमीन पर हुए फर्जीवाड़े के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा चुकी हैं।

मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में यह सामने आया कि जिस आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया, वह शपथ पत्र भी संदिग्ध है। उसमें महफूजा को मृत बताया गया है और एक ऐसे युवक को उनका बेटा दर्शाया गया है, जो वास्तव में उनका पुत्र ही नहीं है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस महिला के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया, वही महिला 4 फरवरी 2026 को नगर कोतवाली पहुंचकर छह लोगों के खिलाफ अपनी जमीन का फर्जी बैनामा कराने की शिकायत दर्ज करा चुकी है। पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।

जमीन के फर्जी बैनामे से शुरू हुआ मामला

नगर कोतवाली क्षेत्र के अहमदनगर मोहल्ले में रहने वाले आबिद अली की पत्नी महफूजा बेगम की जमीन नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव नाजरपुर में स्थित है। जनवरी 2025 में महफूजा को जानकारी मिली कि उनकी जमीन किसी और के नाम फर्जी तरीके से दर्ज करा दी गई है।

इसके बाद उन्होंने तहसील में जाकर मामले की जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि उनकी जमीन का बैनामा फर्जी दस्तावेजों के सहारे कराया गया था।

आरोप है कि अफसाना निवासी दाऊद सराय अमरोहा नगर, शशि निवासी अदलपुर ताज और अश्वनी निवासी मिलक बिकनी ने जाकिर और प्रमोद के नाम जमीन का बैनामा कराया था। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इन तीनों के नाम बैनामा करने वाली महिला शबनम जहां थी, जो नूरपुर बिजनौर क्षेत्र की रहने वाली है।

आधार में बदलाव कर फर्जीवाड़े का आरोप

महफूजा बेगम का आरोप है कि आरोपियों ने उनकी पहचान से छेड़छाड़ की। उनके आधार कार्ड में संशोधन कराकर फोटो बदल दिया गया और उसी के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।

इस पूरे मामले में महफूजा ने नगर कोतवाली में शबनम जहां, उसके दामाद नवाब, अफसाना, शशि, अश्वनी और यशवंत के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।

मामले की विवेचना चल ही रही थी कि अचानक एक ऐसा दस्तावेज सामने आया जिसने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया।

जिंदा महिला के नाम जारी कर दिया मृत्यु प्रमाण पत्र

नगर पालिका परिषद अमरोहा के जन्म-मृत्यु पटल से 26 फरवरी 2026 को महफूजा बेगम के नाम मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया। प्रमाण पत्र में उनकी मृत्यु की तारीख 25 जुलाई 2024 दर्शाई गई है।

अब सवाल यह है कि यदि महफूजा की मृत्यु जुलाई 2024 में हो गई थी तो वह फरवरी 2026 में खुद थाने जाकर जमीन फर्जीवाड़े की शिकायत कैसे दर्ज करा सकती हैं?

यही विरोधाभास पूरे मामले की पोल खोल रहा है।

शपथ पत्र पर भी उठे सवाल

नगर पालिका में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जिस शपथ पत्र का इस्तेमाल किया गया, वह भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि शपथ पत्र में महफूजा को मृत दिखाया गया और हाशिम नाम के युवक को उनका बेटा बताया गया।

लेकिन स्थानीय जांच में यह बात सामने आई कि हाशिम महफूजा का बेटा नहीं है। इतना ही नहीं, शपथ पत्र में लगी फोटो को लेकर भी संदेह जताया गया है। बताया गया कि फोटो किसी अन्य युवक की है।

ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कराने की कोशिश की गई।

पालिका कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका के जन्म-मृत्यु पटल पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।

आरोप है कि बिना किसी वास्तविक जांच और सत्यापन के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जन्म-मृत्यु पटल पर पहले भी सुविधा शुल्क लेकर काम करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

पहले भी लगे थे रिश्वत के आरोप

नगर पालिका के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं। बीते दिनों एक महिला ने जन्म प्रमाण पत्र जारी कराने के नाम पर सौ रुपये मांगने की शिकायत की थी।

शिकायत के बाद तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने एक कर्मचारी को पटल से हटा दिया था। वहीं दूसरे कर्मचारी पर केवल नोटिस की कार्रवाई हुई थी।

बताया गया कि बाद में अधिकारी के स्थानांतरण के बाद संबंधित कर्मचारी फिर से उसी महत्वपूर्ण पटल पर लौट आया। अब महफूजा के नाम मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के मामले में उन्हीं कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच कमेटी बनी, लेकिन कार्रवाई का पता नहीं

महफूजा के मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में पहले भी जांच के आदेश दिए गए थे। तत्कालीन ईओ ने एसडीएम के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की थी।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच का परिणाम सार्वजनिक नहीं हुआ। न दोषियों पर कार्रवाई हुई और न यह पता चल सका कि प्रमाण पत्र जारी करने वाला कर्मचारी कौन था।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गलती करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

संपत्ति विवाद में दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका

कानूनी जानकारों के अनुसार किसी व्यक्ति को गलत तरीके से मृत घोषित करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। इसका इस्तेमाल संपत्ति, बैंक खाते, विरासत और अन्य अधिकारों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

यदि कोई व्यक्ति जीवित होते हुए रिकॉर्ड में मृत दिखा दिया जाता है तो उसके अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में दस्तावेज जारी करने से पहले पूरी जांच और सत्यापन बेहद जरूरी होता है।

नए ईओ ने दिए जांच के संकेत

नगर पालिका के नए अधिशासी अधिकारी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है क्योंकि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। यदि ऐसा हुआ है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि जांच में कौन-कौन जिम्मेदार पाया जाता है और सरकारी रिकॉर्ड में जीवित महिला को मृत दिखाने वाले इस खेल के पीछे कौन लोग शामिल हैं।

यह मामला केवल एक महिला के मृत्यु प्रमाण पत्र का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में दस्तावेजों की सुरक्षा और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।