नीट यूजी पुनर्परीक्षा को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी, शिक्षा मंत्री ने छात्रों को दिया भरोसा
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट-यूजी) को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि 21 जून को होने वाली नीट यूजी पुनर्परीक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में आयोजित की जाएगी। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि इस बार परीक्षा को त्रुटिरहित, सुरक्षित और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जाएगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री परीक्षा से जुड़ी हर गतिविधि की जानकारी ले रहे हैं और सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए कई स्तरों पर समीक्षा की जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
एनटीए मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है और राज्यों के साथ भी लगातार बातचीत चल रही है ताकि परीक्षा आयोजन में किसी प्रकार की परेशानी सामने न आए।
छात्रों से अफवाहों से दूर रहने की अपील
शिक्षा मंत्री ने नीट अभ्यर्थियों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारियां पूरी मजबूती के साथ चल रही हैं और सरकार हर स्तर पर निगरानी कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जा रहा है। परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की निगरानी और तकनीकी व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा जैसी बड़ी व्यवस्था में कई तरह की चुनौतियां होती हैं, लेकिन सरकार सभी संभावित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत कई वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठकें की जा रही हैं।
एनटीए के ढांचे में किए जा रहे बदलाव
नीट और अन्य परीक्षाओं को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद सरकार ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्री ने बताया कि एनटीए के संगठनात्मक ढांचे को बेहतर बनाने के लिए नए अधिकारियों की नियुक्तियां की गई हैं।
उन्होंने कहा कि संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं ताकि परीक्षा संचालन में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता लाई जा सके।
सरकार का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को दूर किया जाएगा और तकनीकी सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।
पेपर लीक मामले की सीबीआई कर रही जांच
नीट यूजी पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों को गंभीर अपराध माना जाना चाहिए और दोषियों को उनकी भूमिका के आधार पर सजा मिलनी चाहिए। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की तैयारी है ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
नीट परीक्षा विवाद के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल बना हुआ है। सरकार की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि ईमानदार छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी।
राज्यों से मांगा गया सहयोग
परीक्षा के सफल आयोजन के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से सहयोग मांगा है। देशभर में 551 शहरों और विदेशों में 14 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों, सुरक्षा बलों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। भारतीय वायुसेना समेत कई संस्थानों के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।
सरकार ने साइबर सुरक्षा को लेकर भी विशेष तैयारी की है ताकि ऑनलाइन गड़बड़ी, हैकिंग या किसी अन्य तकनीकी समस्या से बचा जा सके। केंद्रीय गृह सचिव जल्द ही सभी राज्यों के अधिकारियों के साथ परीक्षा सुरक्षा को लेकर समीक्षा बैठक करेंगे।
संसद की समिति के सामने पेश होंगे अधिकारी
नीट यूजी पुनर्परीक्षा की तैयारियों और परीक्षा संचालन को लेकर शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, एनटीए और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के वरिष्ठ अधिकारी संसद की समिति के सामने पेश होंगे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय स्थायी संसदीय समिति ने अधिकारियों को बुलाकर परीक्षा व्यवस्था और नीट संचालन से जुड़े विषयों पर जानकारी मांगी है।
समिति 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम के तहत नीट संचालन की व्यवस्था पर चर्चा करेगी।
यह पहली बार नहीं है जब नीट विवाद को लेकर सरकारी अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। इससे पहले भी शिक्षा से जुड़ी संसदीय समितियों के सामने मंत्रालय और एनटीए के अधिकारी अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।
नीट विवाद के बाद बढ़ी चिंता
3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के बाद पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इसके बाद परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे थे। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने परीक्षा रद्द कर पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।
कई छात्रों ने मानसिक दबाव और भविष्य को लेकर चिंता जताई। कुछ दुखद घटनाओं के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और तेज हो गई।
एनटीए और सीबीएसई से मांगा गया जवाब
संसदीय समिति ने एनटीए से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसकी नजर में पेपर लीक की परिभाषा क्या है और वर्ष 2018 के बाद आयोजित परीक्षाओं में इस तरह की कोई घटना सामने आई या नहीं।
समिति ने नीट में हुई कथित अनियमितताओं और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़े विवादों पर भी एनटीए और सीबीएसई से लिखित जवाब मांगा है।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 21 जून की परीक्षा को पूरी निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ कराना है। छात्रों की नजरें इस परीक्षा पर टिकी हैं, क्योंकि यह केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा अवसर है।
सरकार का दावा है कि इस बार हर स्तर पर सावधानी बरती जाएगी और परीक्षा परिणाम भी तय समय पर जारी किया जाएगा।