पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: IAS अशोक खेमका को एम्पैनलमेंट में समानता का अधिकार, केंद्र की नीति पर उठे सवाल
चंडीगढ़: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी अशोक खेमका की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) और सचिव (Secretary) स्तर के पदों के लिए एम्पैनलमेंट से इनकार करना, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य अधिकारियों को नियमों में छूट देकर मौका दिया गया, संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने माना कि एक ही स्थिति वाले अधिकारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी और न्यायमूर्ति दीपक मनचंदा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें अशोक खेमका के एम्पैनलमेंट के दावे को खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने CAT के फैसले को सही नहीं माना और खेमका के पक्ष में निर्णय दिया।
क्या था पूरा मामला?
1991 बैच के IAS अधिकारी अशोक खेमका ने भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर के पदों के लिए एम्पैनलमेंट का दावा किया था। एम्पैनलमेंट का मतलब होता है कि किसी अधिकारी को केंद्र सरकार के उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य अधिकारियों की सूची में शामिल किया जाना।
केंद्र सरकार में ऐसे वरिष्ठ पदों के लिए सामान्य रूप से यह शर्त रखी जाती है कि अधिकारी ने डिप्टी सेक्रेटरी या उससे ऊपर के स्तर पर कम से कम तीन वर्ष तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर कार्य किया हो।
CAT ने इसी आधार पर खेमका के दावे को खारिज कर दिया था। अधिकरण का कहना था कि खेमका इस आवश्यक अनुभव की शर्त को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उन्हें एम्पैनलमेंट का लाभ नहीं दिया जा सकता।
इसके बाद अशोक खेमका ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि केंद्र सरकार ने कई अन्य IAS अधिकारियों को इसी शर्त से छूट देकर एम्पैनल किया है, जबकि उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया।
खेमका की दलील क्या थी?
खेमका की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उनके जैसे कई अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की निर्धारित अवधि पूरी न होने के बावजूद भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर के लिए चुना गया।
उन्होंने अदालत के सामने ऐसे उदाहरण भी रखे, जिनमें अधिकारियों को पात्रता नियमों में छूट देकर एम्पैनलमेंट दिया गया था।
खेमका का कहना था कि जब सरकार के पास नियमों में छूट देने का अधिकार था और उसी अधिकार का इस्तेमाल अन्य अधिकारियों के लिए किया गया, तो उनके मामले में बिना किसी स्पष्ट कारण के अलग व्यवहार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा कि जब समान स्थिति वाले अन्य अधिकारियों को छूट दी गई, तो खेमका को वही लाभ क्यों नहीं दिया गया।
अदालत ने कहा कि यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि याचिकाकर्ता जैसे अधिकारी को बिना किसी ठोस कारण के छूट से वंचित क्यों रखा गया।
कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार इस तथ्य से इनकार नहीं कर पाई कि कई IAS अधिकारियों को आवश्यक शर्तों में छूट देकर एम्पैनलमेंट दिया गया था।
अदालत ने माना कि यदि सरकार किसी नियम में छूट देने की शक्ति का इस्तेमाल करती है और समान परिस्थितियों वाले अधिकारियों को उसका लाभ देती है, तो उसी स्थिति वाले किसी अन्य अधिकारी को उससे वंचित करना भेदभावपूर्ण माना जाएगा।
अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लेख किया।
संविधान का अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण का अधिकार देता है।
वहीं अनुच्छेद 16 सरकारी सेवाओं में अवसर की समानता की गारंटी देता है।
अदालत ने कहा कि सरकारी सेवा में समान परिस्थितियों वाले अधिकारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। यदि किसी अंतर का कोई उचित आधार नहीं है, तो ऐसा व्यवहार संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
बेंच ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने डिप्टी सेक्रेटरी या उससे ऊपर के स्तर पर तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की शर्त में छूट देने का अधिकार इस्तेमाल किया है और ऐसी छूट समान स्थिति वाले अधिकारियों को दी गई है, तो खेमका को वही लाभ न देना भेदभाव माना जाएगा।
सरकार की दलील को अदालत ने किया खारिज
केंद्र सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि अशोक खेमका अब रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उनकी याचिका का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं बचा है।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि एम्पैनलमेंट केवल तत्काल नियुक्ति तक सीमित नहीं होता। यह भविष्य में मिलने वाले कार्यों, जिम्मेदारियों और अवसरों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
इसलिए केवल रिटायरमेंट के आधार पर किसी अधिकारी के अधिकार के सवाल को समाप्त नहीं माना जा सकता।
एम्पैनलमेंट क्यों महत्वपूर्ण होता है?
केंद्र सरकार में सचिव और अतिरिक्त सचिव जैसे पदों पर नियुक्ति के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारियों का एम्पैनलमेंट एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है।
इस प्रक्रिया में अधिकारियों की योग्यता, अनुभव, सेवा रिकॉर्ड और अन्य मानकों को देखा जाता है।
एम्पैनलमेंट किसी अधिकारी के करियर में महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के रास्ते खुलते हैं।
अदालत ने माना कि भले ही खेमका को अब रिटायरमेंट के बाद वास्तविक नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता, लेकिन उन्हें उन अधिकारियों के बराबर माना जाना चाहिए जिन्हें समान परिस्थितियों में छूट देकर चुना गया।
कोर्ट का अंतिम आदेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अशोक खेमका की याचिका स्वीकार कर ली।
अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें भविष्य के उन कार्यों और अवसरों के लिए अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर के लिए चयनित अधिकारी माना जाएगा, जहां ऐसी स्थिति या एम्पैनलमेंट आवश्यक योग्यता होती है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें किसी पद पर नियुक्त करने का सीधा लाभ नहीं दिया जा सकता।
फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनके साथ समान परिस्थितियों वाले अधिकारियों की तुलना में कोई अन्याय न हो।
प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला केवल एक अधिकारी के मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी सेवा में समानता और निष्पक्षता के सिद्धांत को मजबूत करता है।
अदालत ने साफ संदेश दिया कि सरकार को अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल समान रूप से करना होगा। यदि किसी नियम में छूट देने की व्यवस्था है तो उसका प्रयोग मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता।
किसी अधिकारी को केवल इसलिए अलग नहीं किया जा सकता कि उसके मामले में सरकार ने अलग दृष्टिकोण अपनाया है, जबकि समान स्थिति वाले अन्य अधिकारियों को लाभ दिया गया है।
यह निर्णय सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।