‘चुनरी-चुनरी’ गाने को लेकर बड़ा विवाद: वाशु भगनानी ने ठोका 400 करोड़ का दावा, बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा मामला
बॉलीवुड में फिल्मों और संगीत अधिकारों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला काफी बड़ा और दिलचस्प हो गया है। निर्देशक डेविड धवन की आगामी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में सुपरहिट गीत ‘चुनरी-चुनरी’ के रीमिक्स संस्करण के इस्तेमाल को लेकर निर्माता वाशु भगनानी और म्यूजिक कंपनी टिप्स के बीच कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। यह विवाद अब सीधे बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और निर्माता वाशु भगनानी ने म्यूजिक कंपनी के खिलाफ 400 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा ठोक दिया है।
फिल्म उद्योग में कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन इस मामले ने पूरे मनोरंजन जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विवाद का केंद्र है वर्ष 1999 में रिलीज हुई फिल्म बीवी नं.1 का लोकप्रिय गीत ‘चुनरी-चुनरी’, जिसे एक बार फिर नए अंदाज में दर्शकों के सामने पेश करने की तैयारी की गई थी। हालांकि, अब यह गाना फिल्म के लिए प्रचार का माध्यम बनने के बजाय कानूनी विवाद का कारण बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
निर्माता वाशु भगनानी का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना ‘चुनरी-चुनरी’ गाने का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना है कि इस गाने के कुछ अधिकार अब भी उनके पास हैं और बिना आवश्यक स्वीकृति के इसका रीमिक्स संस्करण तैयार करना और फिल्म में शामिल करना अधिकारों का उल्लंघन है।
इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने न केवल फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है, बल्कि 400 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मुआवजे की भी मांग की है।
यह दावा बॉलीवुड के हालिया इतिहास में संगीत अधिकारों को लेकर किए गए सबसे बड़े दावों में से एक माना जा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यदि अदालत इस मामले में कोई महत्वपूर्ण फैसला सुनाती है तो इसका असर भविष्य में बनने वाली कई फिल्मों और संगीत सौदों पर पड़ सकता है।
वाशु भगनानी के वकील ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए वाशु भगनानी के वकील ने दावा किया कि यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ है बल्कि कई वर्षों से दोनों पक्षों के बीच चल रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले के दौर में फिल्मों के अधिकारों को लेकर समझौते आज की तरह विस्तृत नहीं होते थे। उस समय निर्माता और म्यूजिक कंपनियों के बीच अलग तरह की व्यवस्था होती थी। उनके अनुसार, टिप्स ने उस समय केवल ऑडियो अधिकार खरीदे थे, जबकि विजुअल अधिकारों का मामला अलग था।
वकील का कहना है कि वर्ष 2018 में टिप्स ने विजुअल अधिकारों को लेकर निर्माता पक्ष से संपर्क किया था। उस समय बातचीत भी हुई, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। उनका आरोप है कि इसके बावजूद अब गाने का इस्तेमाल किया गया, जो पूरी तरह अनुचित है।
उन्होंने कहा कि यदि म्यूजिक कंपनी के पास वैध अधिकार हैं तो उन्हें संबंधित दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत करने चाहिए। निर्माता पक्ष का दावा है कि उनके पास अपने अधिकारों से जुड़े पर्याप्त रिकॉर्ड मौजूद हैं और अदालत में वही सच्चाई सामने आएगी।
ऑडियो अधिकार भी किए गए थे रद्द?
विवाद को और गंभीर बनाते हुए वाशु भगनानी के वकील ने यह भी दावा किया है कि पूजा एंटरटेनमेंट की ओर से पहले ही टिप्स को नोटिस भेजकर ऑडियो अधिकारों को समाप्त करने की कार्रवाई की जा चुकी थी।
उनका कहना है कि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी यदि कंपनी किसी प्रकार का अधिकार होने का दावा कर रही है तो उसे अदालत में अपने दस्तावेज पेश करने होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर सच सामने आएगा और न्याय निर्माता पक्ष के पक्ष में होगा।
यह दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि अदालत को यह लगता है कि अधिकारों को लेकर कोई वैध विवाद मौजूद है, तो फिल्म की रिलीज प्रभावित हो सकती है।
ट्रेलर लॉन्च के बयान पर भी जताई नाराजगी
वाशु भगनानी ने केवल कानूनी लड़ाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन्होंने फिल्म से जुड़े लोगों द्वारा सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों पर भी आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म के प्रमोशन के दौरान यह दावा किया गया कि विवाद सुलझ चुका है और सभी आवश्यक अधिकार प्राप्त कर लिए गए हैं।
भगनानी ने सवाल उठाया कि यदि कोई समझौता हुआ है तो आखिर वह किससे हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह स्वयं संबंधित अधिकारों के मालिक हैं और उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया। ऐसे में यह कहना कि मामला निपट चुका है, पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई विवाद न्यायालय में लंबित हो, तब सार्वजनिक रूप से इस तरह के दावे करना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, इससे लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
बॉलीवुड में बढ़ रही हैं कॉपीराइट की लड़ाइयाँ
पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड में पुराने गानों के रीमिक्स बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। कई निर्माता और निर्देशक दर्शकों की पुरानी यादों को ताजा करने के लिए क्लासिक गीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत करते हैं।
हालांकि, इस प्रक्रिया में कॉपीराइट और अधिकारों से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं। कई बार गीतकार, संगीतकार, निर्माता और म्यूजिक कंपनियां अलग-अलग प्रकार के अधिकारों का दावा करती हैं, जिससे विवाद उत्पन्न हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय फिल्म उद्योग में अधिकारों को लेकर पुराने समझौतों की भाषा कई बार अस्पष्ट होती थी। आज जब डिजिटल प्लेटफॉर्म, ओटीटी और वैश्विक वितरण का दौर है, तब उन पुराने अनुबंधों की नई व्याख्या सामने आ रही है।
इसी कारण अदालतों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है। ‘चुनरी-चुनरी’ विवाद भी इसी व्यापक समस्या का एक उदाहरण माना जा रहा है।
‘चुनरी-चुनरी’ क्यों है इतना खास?
‘चुनरी-चुनरी’ अपने समय का बेहद लोकप्रिय गीत रहा है। फिल्म बीवी नं.1 में सलमान खान और सुष्मिता सेन पर फिल्माया गया यह गाना रिलीज होते ही चार्टबस्टर बन गया था।
इस गीत का संगीत, नृत्य और फिल्मांकन दर्शकों को इतना पसंद आया कि वर्षों बाद भी यह पार्टियों और समारोहों में सुना जाता है। यही वजह है कि जब इस गाने को नए रूप में पेश करने की खबर सामने आई तो दर्शकों के बीच उत्साह भी देखने को मिला।
लेकिन अब वही गीत कानूनी विवाद का केंद्र बन गया है। फिल्म के निर्माताओं को उम्मीद थी कि यह गाना फिल्म के प्रचार में मदद करेगा, लेकिन फिलहाल यह उनके लिए परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है।
फिल्म पहले भी रही है चर्चा में
दिलचस्प बात यह है कि ‘है जवानी तो इश्क होना है’ पहली बार किसी विवाद के कारण सुर्खियों में नहीं आई है। इससे पहले भी फिल्म अपनी रिलीज डेट को लेकर चर्चा में रह चुकी है।
शुरुआत में फिल्म की रिलीज की तारीख एक अन्य बड़ी फिल्म से टकरा रही थी। उस समय बॉक्स ऑफिस पर संभावित प्रतिस्पर्धा को देखते हुए निर्माताओं को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी थी।
बाद में जब दूसरी फिल्म की रिलीज आगे बढ़ गई, तब ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के निर्माताओं ने फिर से अपनी पुरानी रिलीज डेट को बरकरार रखने का फैसला किया। लेकिन अब संगीत अधिकारों का विवाद नई चुनौती बनकर सामने आ गया है।
क्या रिलीज पर पड़ सकता है असर?
फिल्म उद्योग में ऐसे मामलों में अदालत का रुख बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया लगता है कि अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह अस्थायी रोक लगाने जैसे आदेश भी दे सकती है।
हालांकि, कई मामलों में अदालतें दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालने का सुझाव भी देती हैं। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि फिल्म की रिलीज प्रभावित होगी या नहीं।
फिलहाल सभी की नजर बॉम्बे हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत के फैसले से न केवल इस फिल्म का भविष्य तय होगा बल्कि संगीत अधिकारों से जुड़े कई अन्य मामलों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बन गया है मामला
मनोरंजन जगत के जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक गाने या एक फिल्म तक सीमित नहीं है। यह भारतीय फिल्म उद्योग में कॉपीराइट अधिकारों की जटिलता को उजागर करता है।
यदि अदालत निर्माता पक्ष के दावों को सही मानती है, तो भविष्य में म्यूजिक कंपनियों और फिल्म निर्माताओं को अपने अनुबंधों को और अधिक स्पष्ट बनाना होगा। वहीं यदि अदालत म्यूजिक कंपनी के पक्ष में फैसला देती है, तो यह पुराने अधिकार समझौतों की व्याख्या के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
निष्कर्ष
‘है जवानी तो इश्क होना है’ में इस्तेमाल किए गए ‘चुनरी-चुनरी’ के रीमिक्स संस्करण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़ी कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। निर्माता वाशु भगनानी ने जहां बिना अनुमति गाने के इस्तेमाल का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर म्यूजिक अधिकारों को लेकर दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
400 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग, फिल्म की रिलीज पर रोक की अपील और सार्वजनिक बयानों को लेकर उठे सवालों ने इस मामले को और अधिक चर्चित बना दिया है। अब सबकी निगाहें बॉम्बे हाईकोर्ट पर हैं, जहां होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि आखिर ‘चुनरी-चुनरी’ के अधिकार किसके पास हैं और क्या फिल्म की रिलीज पर इसका कोई असर पड़ेगा।
फिलहाल इतना तय है कि यह विवाद आने वाले दिनों में बॉलीवुड के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में शामिल रहने वाला है।