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संजय कपूर की संपत्ति विवाद में नया मोड़: बच्चों की शिक्षा के खर्च के लिए प्रिया कपूर पहुंचीं दिल्ली हाई कोर्ट

संजय कपूर की संपत्ति विवाद में नया मोड़: बच्चों की शिक्षा के खर्च के लिए प्रिया कपूर पहुंचीं दिल्ली हाई कोर्ट

      दिल्ली हाई कोर्ट में उद्योगपति संजय कपूर की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहे कानूनी विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस बार मामला सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा है। संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अपने बच्चों समायरा कपूर और कियान राज कपूर की पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए धनराशि निकालने की अनुमति मांगी है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर अदालत के 30 अप्रैल के अंतरिम आदेश में संशोधन और स्पष्टीकरण की मांग की है।

यह मामला पहले से ही चर्चा में है क्योंकि संजय कपूर की वसीयत और उनकी संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार के भीतर गंभीर कानूनी विवाद चल रहा है। हाई कोर्ट ने पहले संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, ताकि मुकदमे के अंतिम निपटारे तक कोई भी पक्ष संपत्ति में फेरबदल न कर सके। लेकिन अब प्रिया कपूर ने अदालत से अपील की है कि बच्चों की पढ़ाई और रखरखाव जैसी जरूरी जरूरतों के लिए सीमित वित्तीय संचालन की अनुमति दी जाए।

क्या है प्रिया कपूर की नई याचिका?

प्रिया कपूर ने अपनी याचिका में कहा है कि अदालत द्वारा 30 अप्रैल को दिए गए आदेश के कारण संजय कपूर की संपत्ति और खातों के संचालन पर रोक लग गई है। इसका असर बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी खर्चों पर पड़ रहा है। इसलिए उन्होंने अदालत से अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए संजय कपूर के कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ खाते से केवल शिक्षा संबंधी खर्चों के लिए धन निकालने की अनुमति मांगी है।

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह निकासी सिर्फ बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों तक सीमित होगी। इसमें स्कूल और विश्वविद्यालय की फीस, बोर्डिंग, लाजिंग, भारत और विदेश में पढ़ाई के लिए यात्रा खर्च तथा अन्य उचित शिक्षा संबंधी खर्च शामिल किए गए हैं।

प्रिया कपूर ने अदालत से यह भी कहा है कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी कानूनी विवाद की वजह से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भरोसा दिलाया है कि निकाली गई रकम का पूरा हिसाब और संबंधित दस्तावेज हर तीन महीने में अदालत के सामने पेश किए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

समायरा और कियान की पढ़ाई का दिया हवाला

याचिका में विशेष रूप से करिश्मा कपूर और संजय कपूर के बच्चों समायरा कपूर और कियान राज कपूर की शिक्षा का हवाला दिया गया है। प्रिया कपूर ने कहा है कि दोनों बच्चों की पढ़ाई जारी है और उनकी फीस व अन्य खर्च समय पर जमा होना जरूरी है।

अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि एक अन्य प्रतिवादी के विदेशी स्कूल की फीस जमा करने की अनुमति दी जाए। इससे साफ है कि मामला सिर्फ भारत में शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश में पढ़ाई से जुड़े खर्च भी इस कानूनी विवाद के केंद्र में हैं।

याचिका में यह तर्क दिया गया है कि बच्चों की शिक्षा एक बुनियादी आवश्यकता है और इसे संपत्ति विवाद की वजह से रोका नहीं जा सकता। बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।

विदेशी बैंक खातों के संचालन की भी मांग

प्रिया कपूर ने अपने आवेदन में सिर्फ ईपीएफ खाते से निकासी की अनुमति ही नहीं मांगी है, बल्कि कुछ विदेशी संयुक्त बैंक खातों के संचालन की अनुमति भी चाही है।

इन खातों में एचएसबीसी यूके और जेपी मॉर्गन चेस बैंक में मौजूद खाते शामिल बताए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि इन खातों का संचालन जरूरी है ताकि नियमित वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा किया जा सके।

हालांकि प्रिया कपूर ने अदालत को यह भरोसा भी दिया है कि 12 जून 2025 तक इन खातों में जो राशि मौजूद थी, उसके अनुपात में संपत्ति का हिस्सा सुरक्षित रखा जाएगा। यानी खातों का संचालन होने के बावजूद संपत्ति के मूल अधिकार और हिस्सेदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि मांगी गई राहतें संपत्ति के बंटवारे या अधिकार से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि केवल संचालन संबंधी हैं ताकि जरूरी खर्चों को पूरा किया जा सके।

क्या कहा गया आवेदन में?

प्रिया कपूर ने अदालत से कहा है कि वह संपत्ति के स्वामित्व में बदलाव नहीं चाहतीं और न ही किसी प्रकार की हिस्सेदारी को प्रभावित करना चाहती हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान बच्चों की शिक्षा और रखरखाव से जुड़े वित्तीय दायित्व प्रभावित न हों।

याचिका में कहा गया है कि अदालत का अंतरिम आदेश संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी था, लेकिन उसके कारण दैनिक और आवश्यक वित्तीय जिम्मेदारियां भी बाधित हो रही हैं। इसलिए अदालत से सीमित राहत देने का अनुरोध किया गया है।

क्या है संजय कपूर की संपत्ति विवाद का पूरा मामला?

यह मामला तब सामने आया जब संजय कपूर की वसीयत की वैधता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। संजय कपूर की संपत्ति को लेकर परिवार के भीतर कानूनी लड़ाई शुरू हुई और कई पक्ष अदालत पहुंच गए।

बताया जाता है कि संजय कपूर की संपत्ति का मूल्य करीब 30 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें देश और विदेश में मौजूद कई चल-अचल संपत्तियां, बैंक खाते और निवेश शामिल हैं।

करिश्मा कपूर से पूर्व विवाह से हुए बच्चों की ओर से अदालत में याचिकाएं दाखिल की गईं, जिसमें वसीयत की वैधता पर सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि वसीयत संदिग्ध परिस्थितियों में तैयार हुई और इसकी जांच जरूरी है।

इसी के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट का पहले क्या था आदेश?

दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल को दिए अपने आदेश में कहा था कि जब तक वसीयत विवाद पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक संजय कपूर की संपत्ति को सुरक्षित रखा जाना जरूरी है।

अदालत ने संपत्ति पर किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने पर रोक लगा दी थी। साथ ही यह निर्देश दिया था कि कोई भी पक्ष संपत्ति में ऐसा बदलाव नहीं करेगा जिससे मुकदमे के अंतिम फैसले पर असर पड़े।

अदालत ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड पर कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं जो वसीयत को लेकर संदेह पैदा करती हैं। इसलिए अंतिम निर्णय तक संपत्ति को सुरक्षित रखना न्यायहित में है।

यह आदेश इसलिए भी अहम था क्योंकि संपत्ति की कीमत बहुत बड़ी बताई जा रही है और विवाद कई पक्षों के हितों से जुड़ा हुआ है।

कानूनी रूप से क्यों अहम है यह नई मांग?

प्रिया कपूर की नई याचिका कानूनी दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अदालत से ‘ऑपरेशनल रिलीफ’ यानी सीमित संचालन संबंधी राहत मांगी गई है।

आमतौर पर जब किसी संपत्ति पर यथास्थिति का आदेश लागू होता है, तब संपत्ति में कोई बड़ा बदलाव या हस्तांतरण नहीं किया जा सकता। लेकिन अदालत जरूरत पड़ने पर जीवनयापन, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए सीमित छूट दे सकती है।

प्रिया कपूर ने इसी आधार पर अदालत से कहा है कि बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और इसके लिए जरूरी धनराशि निकालने की अनुमति दी जानी चाहिए।

अगर अदालत इस मांग को स्वीकार करती है तो यह स्पष्ट संदेश होगा कि संपत्ति विवाद के बीच भी बच्चों के अधिकार और आवश्यक जरूरतें सुरक्षित रखी जा सकती हैं।

परिवारिक विवाद से बढ़ी कानूनी जटिलता

संजय कपूर की संपत्ति का विवाद केवल वित्तीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पारिवारिक संबंधों और उत्तराधिकार के अधिकारों से भी जुड़ गया है।

एक ओर वसीयत की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, दूसरी ओर परिवार के विभिन्न सदस्यों के हित और अधिकार सामने आ रहे हैं।

ऐसे मामलों में अदालत को संपत्ति की सुरक्षा, कानूनी अधिकार, बच्चों के हित और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

प्रिया कपूर की याचिका इसी संतुलन की मांग करती नजर आती है, जिसमें उन्होंने संपत्ति के अधिकारों को प्रभावित किए बिना बच्चों की पढ़ाई के लिए राहत मांगी है।

अब अदालत के फैसले पर नजर

अब इस पूरे मामले में नजर दिल्ली हाई कोर्ट के अगले कदम पर है। अदालत को यह तय करना होगा कि क्या संपत्ति पर यथास्थिति के आदेश में सीमित संशोधन कर बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी खर्चों के लिए धनराशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है।

यदि अदालत यह अनुमति देती है तो यह फैसला सिर्फ इस मामले के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे अन्य संपत्ति विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि संजय कपूर की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद अभी खत्म होने से दूर है। लेकिन इस बीच बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर उठाया गया यह मुद्दा अदालत के सामने एक मानवीय और संवेदनशील पक्ष के रूप में जरूर उभरा है।

अब देखना होगा कि दिल्ली हाई कोर्ट इस याचिका पर क्या फैसला सुनाता है और क्या बच्चों की शिक्षा के लिए मांगी गई यह राहत मंजूर होती है या नहीं।