भोपाल में पूर्व महिला जज की बहू की संदिग्ध मौत: आख़िरी फोन कॉल, मानसिक प्रताड़ना के आरोप और 15 मिनट में बदल गई पूरी कहानी
भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में हुई 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक युवा महिला, जिसने कुछ महीने पहले ही शादी के बाद नया जीवन शुरू किया था, अचानक अपने ही घर में मृत पाई जाती है। मौत से कुछ मिनट पहले तक वह अपनी मां और सेना में मेजर भाई से फोन पर बात कर रही थी। फिर अचानक फोन कटता है और करीब 15 मिनट बाद सूचना मिलती है कि उसने फांसी लगा ली है।
यह मामला अब केवल एक कथित आत्महत्या का नहीं रह गया है। मृतका के परिवार ने इसे सीधे तौर पर हत्या और लगातार मानसिक प्रताड़ना का मामला बताया है। आरोपों के केंद्र में हैं मृतका के पति, पेशे से वकील समर्थ सिंह, और उनका परिवार। समर्थ की मां गिरबाला सिंह पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं। ऐसे में यह मामला सामाजिक, कानूनी और पारिवारिक संवेदनशीलता के कारण और अधिक चर्चा में आ गया है।
पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन मृतका के मायके पक्ष की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच हो, क्योंकि घटनाक्रम सामान्य आत्महत्या जैसा नहीं दिखता।
मौत से पहले की आख़िरी बातचीत ने बढ़ाए सवाल
ट्विशा शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली थीं। उनके भाई हर्षित शर्मा भारतीय सेना में मेजर हैं। परिवार के अनुसार मंगलवार रात लगभग 10 बजे तक ट्विशा की अपनी मां और भाई से फोन पर लगातार बातचीत हो रही थी।
परिजनों का कहना है कि बातचीत के दौरान ट्विशा बेहद परेशान लग रही थीं। उसने बताया कि पिछले कई दिनों से घर में तनाव बढ़ गया था और पति द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उसने यह भी कहा था कि अब वह भोपाल छोड़कर वापस नोएडा लौटना चाहती है।
परिवार का दावा है कि ट्विशा ने वापसी के लिए ट्रेन रिजर्वेशन तक करा लिया था। यानी वह घर छोड़ने का मन बना चुकी थी। बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर अपने वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों का जिक्र भी किया।
मेजर हर्षित शर्मा के अनुसार, फोन कॉल के दौरान अचानक समर्थ सिंह कमरे में आए। इसके बाद माहौल बदल गया और कुछ ही क्षणों में फोन कट गया। इसके बाद लगभग 15 मिनट तक परिवार को कोई जानकारी नहीं मिली। फिर रात करीब 10.20 बजे ट्विशा की सास, पूर्व जज गिरबाला सिंह का फोन आया, जिसमें बताया गया कि ट्विशा ने फांसी लगा ली है।
यही 15 मिनट अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गए हैं।
“सुसाइड नहीं, हत्या है” — परिवार का आरोप
मृतका के परिवार ने साफ तौर पर कहा है कि वे इसे आत्महत्या नहीं मानते। परिवार का आरोप है कि ट्विशा के शव पर चोट के निशान दिखाई दिए थे। उनके अनुसार हाथ और कान के पास नीले निशान थे, जो किसी संघर्ष या मारपीट की ओर इशारा करते हैं।
परिजनों का कहना है कि यदि यह आत्महत्या थी, तो शरीर पर ऐसे निशान क्यों थे? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मौत से कुछ मिनट पहले तक सामान्य बातचीत कर रही महिला अचानक इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकती है।
स्वजन ने भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात भी की और कहा कि मामले को प्रभावशाली परिवार से जुड़ा होने के कारण हल्के में न लिया जाए।
मृतका के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, भारतीय कानून में सुसाइड नोट का न होना हत्या का स्वतः प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में यह जांच को और महत्वपूर्ण बना देता है।
डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ट्विशा और समर्थ की मुलाकात किसी पारंपरिक पारिवारिक माध्यम से नहीं, बल्कि एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी।
परिवार के अनुसार वर्ष 2024 में दोनों की पहचान हुई थी। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और रिश्ता शादी तक पहुंच गया। दिसंबर 2025 में दोनों ने विवाह कर लिया।
शादी के बाद ट्विशा नोएडा छोड़कर भोपाल आ गईं। वह पहले एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं, लेकिन विवाह के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पति के साथ रहने लगीं।
शुरुआती कुछ महीने सामान्य बताए जा रहे हैं, लेकिन बाद में रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा। मायके पक्ष का आरोप है कि नौकरी छोड़ने के बाद ट्विशा को लगातार अपमानित किया जाने लगा।
“नाकारा” कहकर किया जाता था अपमानित
परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही ट्विशा के प्रति घरवालों का व्यवहार बदल गया था। उसे “नाकारा” कहा जाता था और उसकी परवरिश व परिवार को लेकर ताने दिए जाते थे।
मायके पक्ष का कहना है कि आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहने वाली ट्विशा शादी के बाद धीरे-धीरे मानसिक दबाव में आने लगी थी। नौकरी छोड़ने के बाद वह पूरी तरह नए माहौल में थी और उसी दौरान कथित प्रताड़ना बढ़ गई।
ऐसे मामलों में मानसिक उत्पीड़न हमेशा दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका असर बेहद गहरा होता है। लगातार अपमान, भावनात्मक दबाव, ताने और अविश्वास किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ सकते हैं।
परिवार का दावा है कि ट्विशा ने कई बार संकेत दिए थे कि वह खुश नहीं है, लेकिन उसने विवाह बचाने की कोशिश जारी रखी।
गर्भावस्था और बढ़ता विवाद
मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक ट्विशा की गर्भावस्था से जुड़ा है।
परिजनों के अनुसार मार्च महीने में ट्विशा गर्भवती हुई थीं। लेकिन इस खबर के बाद घर में विवाद बढ़ गया। परिवार का आरोप है कि गर्भ को लेकर पति का व्यवहार बेहद अपमानजनक था।
स्वजनों का कहना है कि समर्थ सिंह कथित तौर पर यह कहते थे कि “बच्चा मेरा नहीं है।” इस तरह के आरोपों ने ट्विशा को मानसिक रूप से गहराई तक प्रभावित किया।
परिवार का दावा है कि 2 मई को उसका गर्भपात कराया गया। यह गर्भपात किन परिस्थितियों में हुआ, क्या वह स्वेच्छा से था या दबाव में — यह अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि महिला को गर्भावस्था को लेकर मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना दी गई थी, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
अस्पताल पहुंचने तक हो चुकी थी मौत
कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के अनुसार, ट्विशा को पति और सास अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल से रात लगभग 11 बजे पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की।
फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि उसी से स्पष्ट होगा कि मौत का कारण क्या था, शरीर पर चोटें कैसी थीं और वे कब लगीं।
यदि पोस्टमार्टम में संघर्ष या बाहरी चोटों के संकेत मिलते हैं, तो जांच की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
कानून क्या कहता है?
भारतीय कानून में विवाह के बाद महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु होने पर पुलिस विशेष सतर्कता के साथ जांच करती है, खासकर तब जब परिवार प्रताड़ना या दहेज उत्पीड़न जैसे आरोप लगाए।
हालांकि इस मामले में अब तक दहेज का आरोप सामने नहीं आया है, लेकिन मानसिक प्रताड़ना, वैवाहिक उत्पीड़न और संदिग्ध मौत जैसे पहलू गंभीर आपराधिक जांच की मांग करते हैं।
यदि यह साबित होता है कि महिला को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था, तो भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि हत्या के संकेत मिलते हैं, तो मामला और अधिक गंभीर हो जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रभावशाली परिवार होने से बढ़ी संवेदनशीलता
मामले का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है that मृतका का ससुराल एक प्रभावशाली परिवार माना जाता है। समर्थ सिंह की मां गिरबाला सिंह पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं।
इसी वजह से मृतका के परिवार को निष्पक्ष जांच को लेकर आशंका है। परिवार ने पुलिस कमिश्नर से विशेष निगरानी में जांच कराने की मांग की है।
हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।
समाज के लिए भी एक गंभीर संकेत
ट्विशा शर्मा की मौत केवल एक आपराधिक जांच का विषय नहीं है, बल्कि यह आधुनिक रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य, वैवाहिक दबाव और भावनात्मक हिंसा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
आज शहरी और शिक्षित परिवारों में भी मानसिक प्रताड़ना के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कई बार बाहर से सामान्य दिखने वाले रिश्तों के भीतर लगातार अपमान, अविश्वास और भावनात्मक दबाव चल रहा होता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसिक उत्पीड़न के संकेतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि उसका असर किसी भी व्यक्ति को गंभीर अवसाद या टूटन की स्थिति तक पहुंचा सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और परिवार के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
मृतका के परिवार को उम्मीद है कि उनकी बेटी को न्याय मिलेगा और मामले की निष्पक्ष जांच होगी। दूसरी ओर पुलिस पर भी यह जिम्मेदारी है कि वह किसी भी दबाव से मुक्त होकर तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचे।
ट्विशा की मौत ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं — क्या यह आत्महत्या थी, या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी है? मौत से ठीक पहले आखिर उस कमरे में क्या हुआ था? और क्या लगातार मानसिक प्रताड़ना ने एक युवा महिला की जिंदगी खत्म कर दी?
इन सवालों के जवाब अब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएंगे।