“ऑनलाइन रिश्तों का काला सच: सेना के नाम पर ठगी करने वाला आरोपी गिरफ्तार”
आज के डिजिटल दौर में जहां रिश्ते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बन रहे हैं, वहीं धोखाधड़ी के नए-नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रहने वाले 26 वर्षीय मेहराजुद्दीन आजम ने फर्जी पहचान बनाकर कई युवतियों को अपना शिकार बनाया। यह मामला केवल एक व्यक्ति की ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में तेजी से फैल रहे डिजिटल फ्रॉड और भरोसे के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
फर्जी पहचान का जाल: ‘निशांत सहारण’ बनकर रचा षड्यंत्र
मेहराजुद्दीन आजम ने Shaadi.com पर ‘निशांत सहारण’ के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाई। इस प्रोफाइल में उसने खुद को भारतीय सेना का मेजर बताया और सेना की वर्दी में तस्वीरें अपलोड कीं। इतना ही नहीं, उसने खुद को 120 एकड़ जमीन का मालिक यानी एक संपन्न जमींदार भी बताया।
यह फर्जी प्रोफाइल इतनी विश्वसनीय तरीके से बनाई गई थी कि कई युवतियां उसके झांसे में आ गईं। जानकारी के अनुसार, उसने करीब 10 युवतियों से संपर्क किया और उन्हें शादी का झांसा देकर भावनात्मक रूप से जोड़ लिया।
कैसे खुला राज: एक सामान्य चेकिंग से बड़ा खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा हरियाणा के कैथल जिले में एक सामान्य पुलिस चेकिंग के दौरान हुआ। तितरम मोड़ पर पुलिस द्वारा वाहनों की जांच की जा रही थी, तभी एक कैब को रोका गया।
कैब में बैठे युवक ने खुद को सेना में मेजर बताया, लेकिन जब पुलिस ने उससे पहचान पत्र मांगा, तो वह कोई वैध आईडी नहीं दिखा पाया। उसके बैग से सेना की वर्दी मिलने पर पुलिस को और शक हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपनी असली पहचान उजागर कर दी—वह कोई मेजर नहीं, बल्कि मेहराजुद्दीन आजम था।
हिसार में शादी का जाल: एक और परिवार बना निशाना
जांच में सामने आया कि आरोपी हरियाणा के हिसार जिले में एक युवती से मिलने जा रहा था। उस युवती और उसके परिवार को उसने शादी के लिए तैयार कर लिया था। यहां तक कि परिवार शादी की तैयारी भी करने लगा था।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने युवती से करीब 30 हजार रुपये भी ले लिए थे। इसके अलावा वह आर्मी में नौकरी दिलाने के नाम पर भी लोगों से पैसे ठगता था।
जब सच्चाई सामने आई, तो युवती के परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद आरोपी को हिसार लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के रिमांड पर लिया गया।
फर्जीवाड़े का नेटवर्क: सिर्फ शादी नहीं, नौकरी के नाम पर भी ठगी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी केवल शादी के नाम पर ही नहीं, बल्कि आर्मी में भर्ती करवाने के नाम पर भी लोगों से पैसे वसूलता था। वह खुद को सेना का अधिकारी बताकर युवाओं को भरोसे में लेता और उनसे मोटी रकम ऐंठ लेता था।
इस तरह का फ्रॉड बेहद खतरनाक है, क्योंकि इसमें देश की सबसे विश्वसनीय संस्थाओं में से एक—सेना—का नाम इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
जीवन की पृष्ठभूमि: वेटर से बना शातिर ठग
पुलिस के अनुसार, मेहराजुद्दीन आजम 2021 में कश्मीर से मोहाली के खरड़ इलाके में आया था, जहां उसने करीब दो साल तक वेटर का काम किया। बाद में वह अपने गांव लौट गया और फिर 2025 में वापस आया।
काम न मिलने के कारण उसने ठगी का रास्ता अपनाया और सोशल मीडिया तथा मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए लोगों को ठगना शुरू कर दिया।
कानूनी कार्रवाई और जांच
हिसार के आजाद नगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। उसे अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया गया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद आर्मी इंटेलिजेंस भी सतर्क हो गई है, क्योंकि आरोपी ने सेना की वर्दी और पद का दुरुपयोग किया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्थागत छवि से जुड़ा गंभीर मामला भी बन सकता है।
समाज के लिए चेतावनी: ऑनलाइन रिश्तों में सतर्कता जरूरी
यह घटना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आजकल लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए रिश्ते बनाते हैं, लेकिन हर प्रोफाइल पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
कुछ जरूरी सावधानियां जो इस तरह की ठगी से बचा सकती हैं—
- किसी भी व्यक्ति की पहचान को क्रॉस-चेक करें
- सरकारी नौकरी या सेना से जुड़े दावों की पुष्टि करें
- पैसे की मांग होने पर सतर्क हो जाएं
- पहली मुलाकात से पहले परिवार और दोस्तों को जानकारी दें
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी
इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि मैट्रिमोनियल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी क्या है? क्या वे अपने यूजर्स की पहचान की पर्याप्त जांच करते हैं?
Shaadi.com जैसे प्लेटफॉर्म्स को चाहिए कि वे वेरिफिकेशन प्रक्रिया को और मजबूत करें, ताकि इस तरह के फर्जी प्रोफाइल्स को समय रहते रोका जा सके।
निष्कर्ष: भरोसे का संकट और कानून की चुनौती
मेहराजुद्दीन आजम का यह मामला केवल एक व्यक्ति की ठगी नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ते भरोसे के संकट को भी दर्शाता है। जब लोग रिश्तों और भावनाओं का इस्तेमाल करके ठगी करने लगते हैं, तो इसका असर केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी होता है।
कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन समाज को भी सतर्क रहना होगा। डिजिटल युग में सुरक्षा केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की भी जिम्मेदारी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि “ऑनलाइन दुनिया” में दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। इसलिए, भरोसा करने से पहले जांच करना ही समझदारी है।