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IT Rules में प्रस्तावित संशोधन से अब सामान्य यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई खबरें भी आएंगी नियमन के दायरे में

डिजिटल कंटेंट पर बढ़ेगी निगरानी: IT Rules में प्रस्तावित संशोधन से अब सामान्य यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई खबरें भी आएंगी नियमन के दायरे में

डिजिटल युग में सूचना का प्रसार पहले से कहीं अधिक तेज़ और व्यापक हो चुका है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अब हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में “सूचना प्रसारक” बन चुका है। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 में महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव रखा है। इन संशोधनों का उद्देश्य डिजिटल स्पेस में समाचार और समसामयिक सामग्री के प्रसार को अधिक जवाबदेह और नियंत्रित बनाना है।

यह प्रस्ताव विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके तहत अब केवल पंजीकृत डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स ही नहीं, बल्कि सामान्य यूज़र्स द्वारा साझा की गई न्यूज़ सामग्री भी नियामक ढांचे के अंतर्गत लाई जा सकती है।


प्रस्ताव का मूल उद्देश्य

प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य है:

  • मध्यस्थों (Intermediaries) की जिम्मेदारियों का विस्तार
  • सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन को अनिवार्य बनाना
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध समाचार सामग्री की निगरानी को मजबूत करना

इन संशोधनों के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ऑनलाइन माध्यमों पर प्रसारित होने वाली खबरें और समसामयिक सामग्री भी एक निर्धारित आचार संहिता के तहत आएं।


यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई खबरें भी होंगी नियंत्रित

प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब वे यूज़र्स, जो स्वयं पंजीकृत प्रकाशक (Registered Publisher) नहीं हैं, लेकिन समाचार या समसामयिक विषयों से संबंधित सामग्री पोस्ट करते हैं, उनकी सामग्री भी नियमों के दायरे में लाई जाएगी।

मसौदे के अनुसार:

  • यदि कोई यूज़र किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ या करंट अफेयर्स से संबंधित सामग्री पोस्ट करता है
  • और वह प्लेटफॉर्म (जैसे सोशल मीडिया) उस सामग्री को होस्ट करता है

तो वह सामग्री IT Rules के भाग III के अंतर्गत आ सकती है।

इसका अर्थ यह है कि अब “साधारण यूज़र” और “डिजिटल प्रकाशक” के बीच की रेखा काफी हद तक धुंधली हो जाएगी।


मध्यस्थों की जिम्मेदारियों में वृद्धि

प्रस्तावित संशोधनों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79 के तहत ‘उचित सावधानी’ (Due Diligence) की अवधारणा को और सख्त किया गया है।

नए प्रस्तावित नियम 3(4) के अनुसार:

  • मध्यस्थों को सरकार द्वारा जारी सभी निर्देशों, परामर्शों, SOPs और दिशानिर्देशों का पालन करना होगा
  • यह पालन उनकी कानूनी जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाएगा

इससे यह स्पष्ट होता है कि प्लेटफॉर्म्स अब केवल निष्क्रिय माध्यम (Passive Platform) नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से कंटेंट की निगरानी करनी होगी।


डेटा संरक्षण और रिकॉर्ड रखने के नियम

प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि:

  • डेटा रिटेंशन (Data Retention) से संबंधित दायित्व यथावत रहेंगे
  • यह दायित्व अन्य लागू कानूनों के साथ समन्वय में लागू होंगे

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी कंटेंट के संबंध में जांच की आवश्यकता हो, तो संबंधित डेटा उपलब्ध रहे।


अंतर-विभागीय समिति की भूमिका का विस्तार

प्रस्तावित संशोधनों में नियम 14 को भी सुदृढ़ करने की बात कही गई है। इसके तहत:

  • अंतर-विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee) के अधिकार बढ़ाए जाएंगे
  • यह समिति अब केवल शिकायतों पर ही नहीं, बल्कि मंत्रालय द्वारा संदर्भित मामलों पर भी विचार कर सकेगी

इससे कार्यपालिका की निगरानी भूमिका और अधिक मजबूत हो जाएगी।


कानूनी और व्यावहारिक प्रभाव

इन प्रस्तावित संशोधनों के कई महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकते हैं:

1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव

यह प्रश्न उठ सकता है कि क्या सामान्य यूज़र्स पर भी नियम लागू करने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होगी

2. जिम्मेदारी में वृद्धि

अब यूज़र्स को भी यह समझना होगा कि वे जो सामग्री साझा कर रहे हैं, वह कानूनी जांच के दायरे में आ सकती है

3. प्लेटफॉर्म्स की भूमिका

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट मॉडरेशन के लिए अधिक संसाधन और तंत्र विकसित करने होंगे


सरकार का पक्ष

सरकार ने इन संशोधनों को “स्पष्टीकरणात्मक और प्रक्रियात्मक” (Clarificatory and Procedural) बताया है। सरकार के अनुसार:

  • इनका उद्देश्य कानूनी स्पष्टता बढ़ाना है
  • नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है
  • डिजिटल मीडिया पर बेहतर निगरानी स्थापित करना है

सरकार का यह भी मानना है कि यह कदम फेक न्यूज़ और भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोकने में सहायक होगा।


हितधारकों से सुझाव आमंत्रित

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस मसौदे पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

  • सुझाव भेजने की अंतिम तिथि: 14 अप्रैल 2026
  • सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं

यह प्रक्रिया इस बात को दर्शाती है कि सरकार इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श चाहती है।


चुनौतियाँ और चिंताएँ

हालांकि यह प्रस्ताव कई सकारात्मक उद्देश्यों के साथ लाया गया है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं:

1. परिभाषा की अस्पष्टता

“समाचार” और “समसामयिक मामलों” की परिभाषा व्यापक हो सकती है, जिससे भ्रम उत्पन्न हो सकता है

2. ओवर-रेगुलेशन का खतरा

अत्यधिक नियंत्रण से डिजिटल अभिव्यक्ति पर अनावश्यक प्रतिबंध लग सकते हैं

3. कार्यान्वयन की जटिलता

इतने बड़े पैमाने पर कंटेंट की निगरानी करना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है


संतुलन की आवश्यकता

इस संदर्भ में यह आवश्यक है कि:

  • नियमन और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखा जाए
  • कानून का उद्देश्य नियंत्रण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी सुनिश्चित करना हो
  • पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए

निष्कर्ष

भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित IT Rules में संशोधन डिजिटल युग के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह स्पष्ट करता है कि अब सूचना का प्रसार केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर यूज़र इसकी प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है।

इन संशोधनों के लागू होने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और यूज़र्स दोनों की जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इन नियमों का क्रियान्वयन इस प्रकार किया जाए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

इस प्रकार, यह प्रस्ताव भारतीय डिजिटल परिदृश्य में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है, जहां स्वतंत्रता के साथ-साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।