IndianLawNotes.com

हरियाणा CET भर्ती विवाद में बड़ा फैसला: 24 ग्रुप की नियुक्तियां बहाल, 10 हजार से अधिक युवाओं को राहत

हरियाणा CET भर्ती विवाद में बड़ा फैसला: 24 ग्रुप की नियुक्तियां बहाल, 10 हजार से अधिक युवाओं को राहत

हरियाणा में ग्रुप-सी सरकारी नौकरियों को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए 24 ग्रुपों की भर्तियों को बहाल कर दिया है। इस फैसले से 10 हजार से अधिक चयनित अभ्यर्थियों के नौकरी में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है, जो पिछले कुछ समय से अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे।

यह निर्णय केवल एक भर्ती विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि न्यायिक विवेक, प्रशासनिक त्रुटियों और अभ्यर्थियों के अधिकारों के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है।


मामला कैसे शुरू हुआ?

हरियाणा सरकार ने 5 मई 2022 को ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्तियों के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) नीति लागू की। इस नीति के तहत भर्ती प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया गया:

  1. क्वालिफाइंग परीक्षा (CET-1)
  2. सेलेक्शन परीक्षा (CET-2)

इसके अलावा, नीति में सामाजिक-आर्थिक आधार पर अधिकतम 5 अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान भी शामिल किया गया। इसी प्रावधान को कुछ अभ्यर्थियों ने अदालत में चुनौती दी।


पहले का फैसला और उसका प्रभाव

16 नवंबर 2023 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस प्रावधान पर रोक लगा दी। इसके बाद 31 मई 2024 को दिए गए फैसले में अदालत ने सामाजिक-आर्थिक आधार पर दिए जाने वाले अतिरिक्त अंकों को असंवैधानिक करार देते हुए उनके आधार पर हुई भर्तियों को रद्द कर दिया।

इस फैसले का व्यापक असर पड़ा:

  • लगभग 10,000 से अधिक भर्तियां प्रभावित हुईं
  • चयनित अभ्यर्थियों की नौकरियां खतरे में आ गईं
  • भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह अनिश्चित हो गई

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और पुनर्विचार

हरियाणा सरकार इस फैसले के खिलाफ भारत का सर्वोच्च न्यायालय गई, लेकिन वहां उसकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं।

कुल 57 पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।


अदालत का मुख्य तर्क: “एक ही पैमाना सभी पर लागू नहीं हो सकता”

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि:

  • पहले के निर्णय में कुछ तथ्यों को सभी ग्रुपों पर समान रूप से लागू कर दिया गया था
  • जबकि वास्तविकता यह थी कि सभी ग्रुपों की स्थिति एक जैसी नहीं थी

अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां चयन प्रक्रिया पर विवादित प्रावधान का वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा, वहां पूरी भर्ती को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।


24 ग्रुपों की भर्ती क्यों बहाल हुई?

अदालत ने विस्तृत विश्लेषण के बाद पाया कि:

  • इन 24 ग्रुपों में पदों के मुकाबले उम्मीदवारों की संख्या 4–5 गुना से कम थी
  • सभी योग्य उम्मीदवारों को CET-2 में बैठने का अवसर मिला
  • सामाजिक-आर्थिक आधार के अतिरिक्त अंक अंतिम चयन में निर्णायक नहीं थे

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि:

  • 10,233 उम्मीदवार दोनों सूचियों (अतिरिक्त अंकों के साथ और बिना) में समान थे

इससे यह साबित हुआ कि विवादित प्रावधान का इन भर्तियों पर वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा।


किन ग्रुपों की भर्ती रद्द ही रहेगी?

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रुप 56 और 57 की भर्तियों पर पहले का फैसला यथावत रहेगा। इसका कारण यह है कि इन ग्रुपों में विवादित प्रावधान का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया था।


प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन

एक और महत्वपूर्ण बिंदु जिस पर अदालत ने जोर दिया, वह था प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन।

अदालत ने कहा कि:

  • जिन अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द की गईं
  • उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया

यह “Audi Alteram Partem” सिद्धांत (दूसरे पक्ष को भी सुनो) का उल्लंघन है।

अदालत ने माना कि इससे चयनित अभ्यर्थियों को वास्तविक नुकसान हुआ।


नई भर्ती प्रक्रिया पर असर

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 24 ग्रुपों के लिए:

  • नई भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया
  • पहले से चयनित अभ्यर्थियों को सेवा में जारी रखने का आदेश दिया

इससे प्रशासनिक स्पष्टता आई और भर्ती प्रक्रिया में स्थिरता स्थापित हुई।


हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की भूमिका

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अनुसार:

  • कुल 10,233 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था
  • 232 अभ्यर्थियों का परिणाम लंबित था

अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद:

  • शेष परिणाम जल्द जारी किए जाएंगे
  • पूरी भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा

आयोग के अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

आयोग के अध्यक्ष हिम्मत सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे “न्याय, सत्य और संघर्ष की जीत” बताया।

उन्होंने अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह निर्णय उनके हित में है और लंबे संघर्ष के बाद उन्हें न्याय मिला है।


किन-किन पदों पर बहाली हुई?

इस फैसले के तहत जिन 24 ग्रुपों की भर्तियां बहाल हुई हैं, उनमें प्रमुख पद शामिल हैं:

  • स्टाफ नर्स
  • जूनियर कोच
  • असिस्टेंट लाइनमैन (ALM)
  • फायर ऑपरेटर
  • मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर
  • आयुर्वेद डिस्पेंसर
  • रेडियोग्राफर
  • लैब टेक्नीशियन
  • डेंटल हाइजीनिस्ट
  • असिस्टेंट मैनेजर (डेयरी)
  • साइंस ग्रुप (10+2)
  • इंडियन कुक

ये सभी पद राज्य के विभिन्न विभागों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


व्यापक प्रभाव

इस फैसले का प्रभाव कई स्तरों पर देखा जा सकता है:

1. अभ्यर्थियों के लिए राहत

लंबे समय से अनिश्चितता में जी रहे हजारों युवाओं को स्थिरता और राहत मिली।

2. प्रशासनिक सुधार

सरकार और आयोग को यह सीख मिली कि नीतियों को लागू करते समय सावधानी और स्पष्टता आवश्यक है।

3. न्यायिक संतुलन

अदालत ने यह दिखाया कि हर मामले में समान दृष्टिकोण अपनाना उचित नहीं होता—तथ्यों के आधार पर अलग-अलग निर्णय जरूरी हैं।


न्यायपालिका का संदेश

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का यह फैसला एक स्पष्ट संदेश देता है:

  • न्याय केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन भी है
  • निर्दोष लोगों को दंडित नहीं किया जा सकता
  • और प्रशासनिक त्रुटियों का भार अभ्यर्थियों पर नहीं डाला जा सकता

निष्कर्ष

हरियाणा CET भर्ती विवाद में आया यह फैसला न्यायिक विवेक और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया कि:

  • जहां गलती का प्रभाव नहीं पड़ा, वहां निर्दोष अभ्यर्थियों को दंडित न किया जाए
  • और जहां वास्तविक समस्या है, वहां सुधार किया जाए

यह निर्णय न केवल हजारों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित और न्यायपूर्ण निर्णय देने में सक्षम है।