‘34 की क्षमता, 400 हिरण’: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली डीयर पार्क की स्थिति को बताया ‘घोर क्रूरता’, ट्रांसफर पर दिया जोर
वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए Supreme Court of India ने दिल्ली के ए.एन. झा डीयर पार्क में चित्तीदार हिरणों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि जिस पार्क की क्षमता मात्र 34 हिरणों की है, वहां लगभग 400 हिरणों को रखना “घोर क्रूरता” (Gross Cruelty) के समान है।
यह टिप्पणी जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की खंडपीठ ने उस याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसमें दिल्ली से राजस्थान के वन क्षेत्रों में हिरणों के स्थानांतरण का मुद्दा उठाया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि: डीयर पार्क में अत्यधिक भीड़
दिल्ली के A.N. Jha Deer Park में हिरणों की संख्या उसकी पारिस्थितिक वहन क्षमता (Ecological Carrying Capacity) से कई गुना अधिक हो चुकी है।
मुख्य तथ्य:
- पार्क की क्षमता: 34 हिरण
- वर्तमान संख्या: लगभग 400 हिरण
इस स्थिति को कोर्ट ने न केवल असंतुलित बल्कि पशु क्रूरता का स्पष्ट उदाहरण बताया।
CEC रिपोर्ट: जमीनी हकीकत सामने आई
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में Central Empowered Committee (CEC) को स्वतंत्र मूल्यांकन का निर्देश दिया था।
CEC की रिपोर्ट में:
- हिरणों की वास्तविक संख्या का आकलन
- पार्क की वहन क्षमता
- पहले किए गए स्थानांतरण की सफलता
- भविष्य के लिए वैज्ञानिक योजना
जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण किया गया।
रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने माना कि वर्तमान स्थिति पशु कल्याण के मानकों के खिलाफ है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘यह अपने आप में क्रूरता’
सुनवाई के दौरान जस्टिस Sandeep Mehta ने कहा:
“क्षमता 34 की है और वहां 400 हिरण हैं—यह अपने आप में घोर क्रूरता है।”
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:
- CEC की सिफारिशों के अनुसार हिरणों का स्थानांतरण किया जाए
- इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से पूरा किया जाए
राजस्थान में स्थानांतरण की योजना
CEC ने हिरणों को राजस्थान के वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की सिफारिश की है, जिनमें शामिल हैं:
- रणपुर मिशदाड़ी
- मुकुंदराम वन क्षेत्र
इन स्थानों पर:
- बाड़े (Enclosures) विकसित करने
- प्राकृतिक वातावरण सुनिश्चित करने
की बात कही गई है, ताकि हिरणों का बेहतर संरक्षण हो सके।
पहले ट्रांसफर पर कोर्ट की चिंता
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने:
- हिरणों के स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी
- कारण बताया गया था कि Delhi Development Authority (DDA) का रवैया “लापरवाह” था
कोर्ट ने पाया कि:
- पहले किए गए ट्रांसफर में हिरणों की जीवित रहने की दर बहुत कम थी
- यह प्रक्रिया वैज्ञानिक और संवेदनशील तरीके से नहीं की गई थी
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को किया रद्द
इस मामले में Delhi High Court ने DDA के कामकाज में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने:
- हाईकोर्ट के इस रुख को रद्द कर दिया
- खुद मामले की निगरानी अपने हाथ में ले ली
अदालत ने स्पष्ट किया कि:
“वन्यजीवों के हित को देखते हुए हस्तक्षेप आवश्यक है।”
DDA को कोर्ट के निर्देश
Delhi Development Authority को सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
1. स्पष्टीकरण देना
- 8 सप्ताह के भीतर यह बताना होगा कि पार्क का क्षेत्रफल क्यों कम हुआ
2. व्यावसायिक गतिविधियां बंद करें
- पार्क को किसी भी तरह के व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए किराए पर देना बंद किया जाए
3. वैज्ञानिक प्रबंधन
- भविष्य में हिरणों की संख्या और देखभाल के लिए वैज्ञानिक योजना अपनाई जाए
याचिकाकर्ता की आपत्तियां
मामले में याचिकाकर्ता पक्ष ने CEC रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए:
- समिति में स्वतंत्र विशेषज्ञों की कमी का आरोप
- रिपोर्ट में विरोधाभास होने की बात
- WII (भारतीय वन्यजीव संस्थान) की भूमिका पर सवाल
उन्होंने यह भी कहा:
“अगर आपके पास संसाधन और शक्ति है, तो आप जानवरों को कहीं भी ले जा सकते हैं—यह ‘लैंड बैंक’ जैसी सोच है।”
कोर्ट का जवाब: ‘वन्यजीव सर्वोपरि’
इन आपत्तियों पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- यह मामला अदालत और प्रशासन के बीच समन्वय का है
- प्राथमिकता वन्यजीवों के कल्याण को दी जाएगी
कोर्ट ने कहा कि वह:
- सीधे हाईकोर्ट के आदेश को भी बरकरार रख सकता था
- लेकिन जानवरों के हित में हस्तक्षेप जरूरी समझा
आगे की प्रक्रिया
अदालत ने:
- याचिकाकर्ताओं को 2 सप्ताह में लिखित दलीलें देने का समय दिया
- DDA को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया
इसके बाद:
- कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है
कानूनी और पर्यावरणीय महत्व
यह मामला कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करता है:
1. पशु अधिकार (Animal Rights)
- अदालत ने स्पष्ट किया कि जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार स्वीकार्य नहीं है
2. पर्यावरणीय संतुलन
- किसी भी क्षेत्र की वहन क्षमता से अधिक जानवर रखना पारिस्थितिक असंतुलन पैदा करता है
3. प्रशासनिक जवाबदेही
- DDA जैसे निकायों को अपने कर्तव्यों के प्रति जवाबदेह होना होगा
निष्कर्ष: ‘विकास नहीं, संरक्षण प्राथमिकता’
Supreme Court of India का यह रुख स्पष्ट करता है कि:
- वन्यजीवों का संरक्षण केवल नीतिगत मुद्दा नहीं, बल्कि संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है
- प्रशासनिक लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा
34 की क्षमता वाले पार्क में 400 हिरणों की स्थिति ने यह दिखा दिया है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया गया, तो यह न केवल जानवरों के लिए बल्कि पूरे पर्यावरण के लिए खतरा बन सकता है।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर है, जो भविष्य में शहरी वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।