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इलाहाबाद हाईकोर्ट का नया रोस्टर: न्यायिक कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव और ‘त्वरित न्याय’ की ओर कदम

इलाहाबाद हाईकोर्ट का नया रोस्टर: न्यायिक कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव और ‘त्वरित न्याय’ की ओर कदम

भारतीय न्यायपालिका में मामलों के निष्पादन की गति और गुणवत्ता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि अदालतों में कार्यों का विभाजन किस प्रकार किया गया है। इसी संदर्भ में Allahabad High Court द्वारा जारी नया रोस्टर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार के रूप में सामने आया है। यह रोस्टर 19 मार्च 2026 को पारित आदेश के तहत लागू किया गया, जिसे मुख्य न्यायाधीश Justice Arun Bhansali ने जारी किया।

इस नए रोस्टर ने 5 जनवरी 2026 से लागू पूर्व व्यवस्था को प्रतिस्थापित कर दिया है और कई बेंचों के कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।


रोस्टर प्रणाली का महत्व

हाईकोर्ट में रोस्टर का निर्धारण केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह न्याय वितरण की रीढ़ है। रोस्टर तय करता है:

  • कौन-सा जज किस प्रकार के मामलों की सुनवाई करेगा
  • किन मामलों को प्राथमिकता मिलेगी
  • न्यायिक विशेषज्ञता का उपयोग कैसे होगा

इस प्रकार, रोस्टर का सीधा प्रभाव न्यायिक दक्षता और लंबित मामलों के निपटान पर पड़ता है।


जस्टिस अतुल श्रीधरन की नई जिम्मेदारी

नए रोस्टर में Justice Atul Sreedharan की भूमिका में उल्लेखनीय परिवर्तन किया गया है। अब वे Justice Vivek Saran के साथ मिलकर:

  • वर्ष 2021 से आगे की फैमिली कोर्ट अपीलों की सुनवाई करेंगे
  • माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण से जुड़े मामलों का निस्तारण करेंगे

साथ ही उनकी बेंच को निम्नलिखित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है:

  • राजनीतिक पेंशन से जुड़े विवाद
  • Protection of Human Rights Act 1993 के तहत याचिकाएं
  • यूपी सहकारी समितियों से जुड़े ‘रिट C’ मामले

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले उनकी बेंच बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और अन्य सिविल मामलों को देख रही थी।


अन्य बेंचों में प्रमुख बदलाव

1. सिविल रिट मामलों का पुनर्वितरण

अब कोड बुक में शामिल न किए गए शेष सिविल रिट मामलों को Justice Saral Srivastava और Justice Garima Prasad की बेंच को सौंपा गया है।


2. जस्टिस अरिंदम सिन्हा की बेंच

इस बेंच को अब:

  • परिवहन से जुड़े ‘रिट A’ मामले
  • सेवा संबंधी सभी विवाद
  • खनन और खनिज से जुड़े ‘रिट C’ मामले

सौंपे गए हैं, जिससे इन मामलों का विशेषज्ञता के आधार पर निपटान संभव होगा।


3. जस्टिस प्रकाश पाडिया का बदला कार्यक्षेत्र

Justice Prakash Padia के रोस्टर में पूर्ण परिवर्तन हुआ है:

  • पहले: भूमि और राजस्व मामलों की सुनवाई
  • अब: वर्ष 2024 से जुड़े सरकारी सेवा मामलों की सुनवाई

4. जस्टिस सलिल कुमार राय

Justice Salil Kumar Rai अब सुप्रीम कोर्ट से जुड़े त्वरित आपराधिक अपील मामलों की सुनवाई जारी रखेंगे और Justice Devendra Singh I के साथ बैठेंगे।


स्थिरता बनाए रखने वाली बेंचें

कुछ बेंचों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे न्यायिक निरंतरता बनी रहे:

  • Justice Arun Bhansali व जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच—PIL, कमर्शियल अपील और ट्रिब्यूनल मामलों की सुनवाई जारी रखेगी
  • जस्टिस एम.सी. त्रिपाठी व जस्टिस कुणाल रवि सिंह—भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मामलों की सुनवाई

प्राथमिकता वाले मामलों पर विशेष निर्देश

नए रोस्टर में कुछ मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं:

  • 7 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद कैदियों की अपीलें
  • एसिड अटैक के मामले
  • सुप्रीम कोर्ट के त्वरित मामले
  • हत्या, बलात्कार, डकैती और अपहरण जैसे गंभीर अपराध
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाएं
  • Juvenile Justice Act 2015 के अंतर्गत मामले

यह निर्देश न्यायपालिका के उस दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जिसमें संवेदनशील और गंभीर मामलों को शीघ्रता से निपटाने पर जोर दिया गया है।


न्यायिक दक्षता और सुधार की दिशा

यह नया रोस्टर कई स्तरों पर सुधार का संकेत देता है:

  • मामलों का विशेषज्ञता आधारित वितरण
  • लंबित मामलों को कम करने का प्रयास
  • संवेदनशील मामलों पर प्राथमिक ध्यान

Allahabad High Court का यह कदम न्यायिक प्रशासन को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।


निष्कर्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट का नया रोस्टर यह दर्शाता है कि न्यायपालिका लगातार अपनी कार्यप्रणाली को सुधारने के प्रयास कर रही है। मुख्य न्यायाधीश Justice Arun Bhansali के नेतृत्व में किए गए ये बदलाव न्याय वितरण प्रणाली को तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने में सहायक हो सकते हैं।

अंततः, ऐसे प्रशासनिक सुधार ही “देरी से न्याय” की समस्या को कम कर “समय पर न्याय” के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।