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अंतरराष्ट्रीय कस्टडी विवाद पर गुजरात हाईकोर्ट का अहम फैसला: बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि, पिता को सौंपनी होगी कस्टडी

अंतरराष्ट्रीय कस्टडी विवाद पर गुजरात हाईकोर्ट का अहम फैसला: बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि, पिता को सौंपनी होगी कस्टडी

अंतरराष्ट्रीय पारिवारिक विवादों में बच्चों की कस्टडी को लेकर अदालतों का दृष्टिकोण हमेशा संवेदनशील और संतुलित रहा है। इसी क्रम में गुजरात उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए एक पिता को निर्देश दिया कि वह अपने 5 वर्षीय बेटे की कस्टडी उसकी मां को सौंपे, ताकि बच्चे को कनाडा वापस भेजा जा सके। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि मां की अनुमति के बिना बच्चे को कनाडा से भारत लाना अवैध है और इसे बच्चे के हित में नहीं माना जा सकता।


मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक ऐसे दंपत्ति से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 2018 में कनाडा के टोरंटो में हुई थी। वर्ष 2020 में उनके बेटे का जन्म भी कनाडा में हुआ और वह जन्म से लेकर अब तक वहीं पला-बढ़ा था।

पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद बढ़ने पर पति मार्च 2024 में भारत लौट आया, जबकि बच्चा अपनी मां के साथ कनाडा में ही रह रहा था। इसी दौरान मां ने कनाडा की अदालत में याचिका दायर कर अपने बेटे की कानूनी संरक्षकता (guardianship) प्राप्त कर ली।

इसके बावजूद दिसंबर 2025 में पिता बिना मां की अनुमति के बच्चे को भारत ले आया। इसके बाद मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बच्चे को वापस दिलाने की मांग की।


 मां की दलील

मां की ओर से अदालत में कहा गया:

  • कनाडा की अदालत ने उसे बच्चे का कानूनी संरक्षक घोषित किया है
  • पिता ने बिना अनुमति बच्चे को भारत लाकर अवैध रूप से अपने पास रखा
  • बच्चे को उसके परिचित और सुरक्षित वातावरण से दूर कर दिया गया

मां ने यह भी तर्क दिया कि बच्चे का “habitual residence” कनाडा है, इसलिए वहीं उसकी परवरिश और शिक्षा के हित सुरक्षित हैं।


 पिता की दलील

पिता ने कस्टडी अपने पास रखने के लिए कई तर्क दिए:

  • बच्चे को भारत में हिंदू संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों के साथ पाला जाना चाहिए
  • मां के कथित निजी संबंध बच्चे के मानसिक विकास के लिए हानिकारक हो सकते हैं
  • भारत में पारिवारिक वातावरण बेहतर रहेगा

हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।


 अदालत का विश्लेषण

गुजरात उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया:

1. बच्चे का सर्वोत्तम हित (Best Interest of Child)

अदालत ने स्पष्ट किया कि:

 कस्टडी के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत “बच्चे का सर्वोत्तम हित” होता है

कोर्ट ने कहा कि:

  • बच्चा जन्म से कनाडा में पला-बढ़ा
  • वहां उसका सामाजिक, शैक्षणिक और भावनात्मक आधार स्थापित है

ऐसे में उसे अचानक भारत लाना उसके लिए “पीड़ादायक अनुभव” है।


2. अवैध तरीके से बच्चे को लाना

अदालत ने पाया कि:

  • पिता ने मां की अनुमति के बिना बच्चे को भारत लाया
  • यह अंतरराष्ट्रीय कानून और कस्टडी नियमों के खिलाफ है

इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि:

 पिता की कस्टडी “गैर-कानूनी” है


3. विदेशी अदालत के आदेश का सम्मान

कोर्ट ने यह भी माना कि:

  • कनाडा की अदालत ने मां को वैध संरक्षक घोषित किया है
  • ऐसे आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए

यह अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग (comity of courts) का हिस्सा है।


4. सांस्कृतिक तर्क को खारिज

पिता द्वारा दिए गए “हिंदू संस्कृति” वाले तर्क को अदालत ने खारिज करते हुए कहा:

 बच्चे के हित को किसी एक सांस्कृतिक या धार्मिक तर्क के आधार पर नहीं तय किया जा सकता


5. बच्चे पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव

अदालत ने कहा:

  • बच्चे को अचानक नए और अनजान माहौल में लाना
  • उसे मां से अलग करना
  • और नए लोगों के बीच रहने के लिए मजबूर करना

यह उसके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए हानिकारक हो सकता है।


 अदालत का आदेश

अंततः अदालत ने निम्नलिखित आदेश दिए:

  • बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी जाए
  • पिता को बच्चे का पासपोर्ट और OCI कार्ड लौटाने का निर्देश
  • बच्चे को सुरक्षित कनाडा वापस भेजने की व्यवस्था की जाए
  • अस्थायी रूप से कस्टडी नाना-नानी को सौंपी गई, ताकि वे बच्चे को वापस ले जा सकें

 कानूनी महत्व

यह फैसला कई महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट करता है:

 1. “Best Interest of Child” सर्वोपरि

किसी भी कस्टडी विवाद में अदालत का प्राथमिक ध्यान बच्चे के हित पर होता है, न कि माता-पिता के अधिकारों पर।


 2. अंतरराष्ट्रीय कस्टडी विवादों में संतुलन

यह निर्णय दिखाता है कि भारतीय अदालतें विदेशी अदालतों के आदेशों का सम्मान करती हैं, विशेषकर जब मामला बच्चे के हित से जुड़ा हो।


 3. अवैध रूप से बच्चे को हटाना अस्वीकार्य

यदि कोई अभिभावक बिना अनुमति बच्चे को एक देश से दूसरे देश ले जाता है, तो यह अदालत के लिए गंभीर चिंता का विषय होता है।


 4. सांस्कृतिक तर्क सीमित महत्व रखते हैं

केवल संस्कृति या धर्म के आधार पर कस्टडी का निर्णय नहीं किया जा सकता।


अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

आज के वैश्विक दौर में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां:

  • माता-पिता अलग-अलग देशों में रहते हैं
  • कस्टडी को लेकर विवाद होता है
  • एक पक्ष बच्चे को दूसरे देश ले जाता है

ऐसे मामलों में अदालतें “habitual residence” और “child welfare” जैसे सिद्धांतों को प्राथमिकता देती हैं।


 उदाहरण से समझें

मान लीजिए:

  • बच्चा अमेरिका में पला-बढ़ा
  • पिता उसे बिना मां की अनुमति भारत ले आता है

ऐसी स्थिति में:

  • भारतीय अदालत बच्चे को वापस भेज सकती है
  • यदि यह उसके हित में हो

 निष्कर्ष

गुजरात उच्च न्यायालय का यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल है, जो यह स्पष्ट करता है कि बच्चों के मामलों में अदालतें अत्यंत संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाती हैं।

इस निर्णय से यह संदेश मिलता है कि:

  • बच्चे का हित सर्वोपरि है
  • किसी भी अभिभावक को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता
  • अंतरराष्ट्रीय कस्टडी मामलों में नियमों और आदेशों का पालन अनिवार्य है

अंततः, यह फैसला यह दर्शाता है कि
“बच्चा किसी विवाद का विषय नहीं, बल्कि उसकी भलाई ही न्याय का मूल आधार है।”