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श्रीदेवी की संपत्ति विवाद: बोनी कपूर और बेटियों की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई, ट्रायल पर अंतरिम रोक जारी

श्रीदेवी की संपत्ति विवाद: बोनी कपूर और बेटियों की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई, ट्रायल पर अंतरिम रोक जारी

दिवंगत अभिनेत्री Sridevi से जुड़ी संपत्ति विवाद का मामला एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। फिल्म निर्माता Boney Kapoor और उनकी बेटियां Janhvi Kapoor तथा Khushi Kapoor ने Madras High Court का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने चेंगलपट्टू की एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ईस्ट कोस्ट रोड के पास स्थित श्रीदेवी की कथित संपत्ति से जुड़े मुकदमे को खारिज करने से इनकार कर दिया गया था।

सोमवार (16 मार्च) को जब यह मामला न्यायमूर्ति T. V. Tamilselvi के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो अदालत ने इसे अंतिम निपटारे के लिए 26 मार्च 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया। साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर पहले से लगी अंतरिम रोक को भी आगे बढ़ा दिया।


चेंगलपट्टू कोर्ट में दायर किया गया था मूल मुकदमा

यह विवाद Chengalpattu की अदालत में दायर एक सिविल मुकदमे से जुड़ा है। यह मुकदमा एम.सी. शिवकामी, उनकी बहन एम.सी. नटराजन और उनकी मां चंद्रभानु द्वारा दायर किया गया था।

वादियों ने दावा किया कि ईस्ट कोस्ट रोड के पास स्थित लगभग 4.7 एकड़ जमीन उनके दादा की संपत्ति थी और इस पर उनका भी वैध अधिकार है। उन्होंने अदालत से उन चार बिक्री दस्तावेजों (सेल डीड्स) को रद्द घोषित करने की मांग की, जिनके जरिए श्रीदेवी और उनकी बहन ने इस जमीन को खरीदा था।

वादियों का आरोप है कि ये बिक्री दस्तावेज फर्जी थे और इन्हें धोखाधड़ी के माध्यम से तैयार किया गया था।


कपूर परिवार ने वाद खारिज करने की मांग की

इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए बोनी कपूर और उनके परिवार ने सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों का सहारा लिया। उन्होंने Order VII Rule 11 of the Code of Civil Procedure के उपबंध (a) और (b) तथा Section 151 of the Code of Civil Procedure के तहत आवेदन दाखिल किया।

कपूर परिवार का तर्क था कि वादियों द्वारा किया गया दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि चंद्रभानु का विवाह ही कानूनी रूप से वैध नहीं था, क्योंकि कथित तौर पर यह विवाह उनके पहले विवाह के अस्तित्व में रहते हुए किया गया था। कपूर परिवार ने कहा कि इस स्थिति में यह विवाह कानून के अनुसार प्रारंभ से ही अमान्य (Void Ab Initio) माना जाएगा और यह द्विविवाह (Bigamy) की श्रेणी में आता है।


तथ्य छिपाने का लगाया आरोप

कपूर परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि वादियों ने अपनी याचिका में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है।

उनका कहना था कि यदि चंद्रभानु का विवाह ही वैध नहीं था, तो वादियों का संपत्ति पर दावा भी कानूनी रूप से टिक नहीं सकता। कपूर परिवार के अनुसार इस तथ्य को याचिका में छिपाना अदालत को गुमराह करने का प्रयास है और यह धोखाधड़ी के समान है।

उनका यह भी कहना था कि जब मुकदमे की बुनियाद ही कमजोर है, तो इसे आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।


37 साल बाद चुनौती पर भी उठाया सवाल

कपूर परिवार ने इस मुकदमे के समय को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि वादी 1988 के दस्तावेजों को लगभग 37 साल बाद चुनौती दे रहे हैं।

उनके अनुसार इतनी लंबी अवधि के बाद दायर की गई याचिका समय-सीमा (Limitation) के आधार पर खारिज किए जाने योग्य है।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जिस संपत्ति के संबंध में विवाद उठाया गया है, उसके लिए जारी किया गया पट्टा तहसीलदार द्वारा पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही दिया गया था।


वादियों ने आरोपों का किया खंडन

वादियों ने कपूर परिवार की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे तथ्यों के विवादित प्रश्न हैं, जिनकी जांच केवल ट्रायल के दौरान ही की जा सकती है।

उनका कहना था कि कपूर परिवार के पास यह साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं है कि उन्होंने संपत्ति कानूनी रूप से खरीदी थी।

वादियों ने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए कपूर परिवार पितृत्व जैसे निजी मामलों को उठाकर व्यक्तिगत हमले कर रहा है।


लिमिटेशन पर वादियों की दलील

समय-सीमा के मुद्दे पर वादियों ने अदालत को बताया कि यदि कोई अचल संपत्ति अब तक विभाजित नहीं हुई है, तो उसके बंटवारे के लिए मुकदमा दायर करने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती।

उनका कहना था कि जब तक संपत्ति का विधिवत विभाजन नहीं हो जाता, तब तक परिवार के सदस्य उस पर अपना दावा पेश कर सकते हैं।


ट्रायल कोर्ट ने वाद खारिज करने से किया इनकार

निचली अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि किसी वाद को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों का होना आवश्यक है।

अदालत ने कहा कि वाद तभी खारिज किया जा सकता है जब:

  • वाद में मुकदमे का कारण (Cause of Action) न बताया गया हो
  • मांगी गई राहत का मूल्य कम आंका गया हो
  • वाद पर पर्याप्त स्टांप न लगाया गया हो
  • मुकदमा कानून द्वारा वर्जित हो
  • वाद की आवश्यक प्रतियां न हों
  • वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन न किया गया हो

ट्रायल कोर्ट ने पाया कि वादियों के पास मुकदमा दायर करने का स्पष्ट कारण मौजूद है और मामला निर्धारित समय सीमा के भीतर ही दायर किया गया है।

इसी आधार पर अदालत ने वाद को खारिज करने से इनकार कर दिया।


हाईकोर्ट में चुनौती

निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ बोनी कपूर और उनके परिवार ने Madras High Court में याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फिलहाल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक को जारी रखते हुए मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 26 मार्च 2026 को सूचीबद्ध कर दिया है।


पहले भी अदालत पहुंच चुका है विवाद

यह विवाद पहले भी अदालत के समक्ष आ चुका है। शिवकामी ने एक रिट याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सड़क चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले राज्य राजमार्ग विभाग ने कपूर परिवार को अधिक मुआवजा दिया।

उस याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने राजमार्ग विभाग को निर्देश दिया था कि वे शिवकामी द्वारा दिए गए अभ्यावेदन पर विचार करें और उचित आदेश पारित करें।


मामले का शीर्षक

यह मामला Boney Kapoor and Others v. MC Sivakami and Others के नाम से अदालत में लंबित है।


निष्कर्ष

श्रीदेवी की संपत्ति से जुड़ा यह विवाद अब एक जटिल कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। एक ओर वादी परिवार संपत्ति में अपने हिस्से का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कपूर परिवार इन दावों को कानूनी रूप से निराधार बता रहा है।

अब सबकी नजरें Madras High Court की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मुकदमा आगे ट्रायल के लिए जारी रहेगा या प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जाएगा।