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बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: खेल कोटे में शामिल होगी बॉडीबिल्डिंग, सरकारी नौकरियों में मिलेगा लाभ

बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला: खेल कोटे में शामिल होगी बॉडीबिल्डिंग, सरकारी नौकरियों में मिलेगा लाभ

खेल के क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण न्यायिक पहल में Bombay High Court की नागपुर पीठ ने बॉडीबिल्डिंग को खेल कोटे (Sports Quota) के अंतर्गत शामिल करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में दिए जाने वाले 5 प्रतिशत खेल आरक्षण के लिए बॉडीबिल्डिंग को भी एक पात्र खेल माना जाना चाहिए।

यह निर्णय उन हजारों युवाओं और खिलाड़ियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो वर्षों से बॉडीबिल्डिंग को खेल के रूप में मान्यता दिलाने और इसके आधार पर रोजगार के अवसर प्राप्त करने की मांग कर रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी खेल को बिना ठोस कारण के नीति से बाहर करना न्यायसंगत नहीं है और यह संविधान के समानता के सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है।

यह फैसला न्यायमूर्ति Mukulika Jawalkar और न्यायमूर्ति Nandesh Deshpande की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता दीपक पवार द्वारा दायर याचिका पर सुनाया।


याचिका से शुरू हुआ पूरा मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब एक बॉडीबिल्डिंग खिलाड़ी दीपक पवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि राज्य सरकार की पुरानी खेल नीति में बॉडीबिल्डिंग को खेल के रूप में मान्यता दी गई थी, लेकिन बाद में 2016 में जारी नई नीति से इसे हटा दिया गया।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इस फैसले से बॉडीबिल्डिंग खिलाड़ियों के साथ अन्याय हुआ है क्योंकि वे खेल कोटे के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरियों और अन्य सुविधाओं से वंचित हो गए।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बॉडीबिल्डिंग एक संगठित और प्रतिस्पर्धी खेल है, जिसमें खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग लेते हैं। इसके बावजूद इसे खेल नीति से बाहर करना मनमाना और अनुचित निर्णय है।


अदालत की टिप्पणी: मनमाना था बॉडीबिल्डिंग को हटाना

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2005 की खेल नीति में बॉडीबिल्डिंग को एक मान्यता प्राप्त खेल के रूप में शामिल किया गया था। लेकिन 2016 में जारी नई नीति में इसे हटा दिया गया।

अदालत ने कहा कि किसी खेल को नीति से हटाने के लिए सरकार के पास ठोस और तार्किक कारण होने चाहिए। यदि बिना पर्याप्त कारण के ऐसा किया जाता है तो यह मनमाना निर्णय माना जाएगा।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि बॉडीबिल्डिंग को खेल नीति से हटाना संविधान के समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे खिलाड़ियों के अधिकार प्रभावित होते हैं।


जिम्नास्टिक्स की उपशाखा के रूप में मान्यता

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि बॉडीबिल्डिंग मूल रूप से जिम्नास्टिक्स की एक उपशाखा के रूप में देखी जा सकती है क्योंकि इसमें शरीर की संरचना, संतुलन, शक्ति और प्रदर्शन की कला शामिल होती है।

अदालत ने माना कि इस खेल में भी उच्च स्तर की शारीरिक क्षमता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे खेल की श्रेणी से बाहर रखना तर्कसंगत नहीं है।

इस आधार पर अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि बॉडीबिल्डिंग को खेल कोटे के अंतर्गत शामिल करना पूरी तरह उचित है।


चार सप्ताह के भीतर नीति में संशोधन का आदेश

अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि 1 जुलाई 2016 के शासन निर्णय (GR) में संशोधन किया जाए और बॉडीबिल्डिंग को खेल कोटे के लिए पात्र खेलों की सूची में शामिल किया जाए।

इसके लिए अदालत ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि के भीतर सरकार को आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई कर नई अधिसूचना जारी करनी होगी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी खिलाड़ी को केवल इस आधार पर अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसका खेल ओलंपिक या राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल नहीं है।


ओलंपिक तक सीमित नहीं हो सकती खेलों की मान्यता

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तर्क भी आया कि कुछ खेलों को इसलिए प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि वे ओलंपिक, एशियाई खेलों या राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल हैं।

इस पर अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि खेलों की मान्यता को केवल इन प्रतियोगिताओं तक सीमित रखना उचित नहीं है। देश में कई ऐसे खेल हैं जो इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन फिर भी उनका बड़ा खिलाड़ी समुदाय और प्रतिस्पर्धी ढांचा मौजूद है।

इसलिए किसी खेल की पात्रता का निर्धारण केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह ओलंपिक में शामिल है या नहीं।


अर्जुन पुरस्कार से भी मिली मान्यता

अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि भारत सरकार द्वारा कई बॉडीबिल्डिंग खिलाड़ियों को Arjuna Award से सम्मानित किया जा चुका है।

यह पुरस्कार भारत के सबसे प्रतिष्ठित खेल सम्मानों में से एक माना जाता है। अदालत ने कहा कि जब केंद्र सरकार स्वयं बॉडीबिल्डिंग खिलाड़ियों को इस स्तर का सम्मान दे रही है तो यह स्पष्ट है कि इस खेल को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

इस तथ्य को देखते हुए अदालत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस खेल को खेल नीति से बाहर रखना उचित नहीं कहा जा सकता।


सरकारी पत्रों को किया रद्द

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 24 अक्टूबर 2018 और 21 मार्च 2023 को जारी किए गए उन सरकारी पत्रों को भी रद्द करने का आदेश दिया जिनके माध्यम से बॉडीबिल्डिंग को खेल कोटे के लाभ से बाहर रखा गया था।

अदालत ने कहा कि ये आदेश भेदभावपूर्ण प्रतीत होते हैं और खिलाड़ियों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं।

इसलिए इन आदेशों को निरस्त करना आवश्यक है ताकि खिलाड़ियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सके।


खिलाड़ियों के लिए खुलेंगे नए अवसर

अदालत के इस फैसले को बॉडीबिल्डिंग खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अब इस खेल से जुड़े खिलाड़ी भी सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में खेल कोटे के तहत आवेदन कर सकेंगे।

इससे न केवल खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे बल्कि युवाओं में इस खेल के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार खेलों को बढ़ावा देना चाहती है तो उसे विभिन्न खेलों को समान अवसर देना होगा।


खेल नीति में संतुलन की जरूरत

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि खेल नीति बनाते समय सरकार को किन मानदंडों को ध्यान में रखना चाहिए। केवल कुछ चुनिंदा खेलों को प्राथमिकता देना अन्य खेलों के खिलाड़ियों के साथ अन्याय हो सकता है।

भारत जैसे विशाल देश में विभिन्न प्रकार के खेल लोकप्रिय हैं। इसलिए नीति बनाते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी खेलों को उचित अवसर और समर्थन मिले।


न्यायालय का व्यापक संदेश

इस फैसले के माध्यम से अदालत ने यह संदेश दिया है कि सरकारी नीतियां निष्पक्ष, तर्कसंगत और संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

यदि किसी नीति से किसी वर्ग के साथ अनुचित व्यवहार होता है तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है।

यह फैसला केवल बॉडीबिल्डिंग तक सीमित नहीं है बल्कि यह उन सभी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो अपने खेल को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


निष्कर्ष

Bombay High Court की नागपुर पीठ का यह निर्णय भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी खेल को बिना उचित कारण के नीति से बाहर नहीं किया जा सकता।

अब राज्य सरकार के लिए यह आवश्यक होगा कि वह अदालत के आदेश का पालन करते हुए बॉडीबिल्डिंग को खेल कोटे के अंतर्गत शामिल करे और खिलाड़ियों को समान अवसर प्रदान करे।

इस फैसले से न केवल बॉडीबिल्डिंग खिलाड़ियों को राहत मिलेगी बल्कि देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण भी मजबूत होगा।