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कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट RTI के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट ने माना ‘पब्लिक अथॉरिटी’

कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट RTI के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट ने माना ‘पब्लिक अथॉरिटी’

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक माना जाता है। इस कानून का उद्देश्य यह है कि नागरिक सरकारी संस्थाओं और सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्थाओं से जानकारी प्राप्त कर सकें। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने M/s Cochin International Airport Limited बनाम State Information Commission & Another मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) सूचना के अधिकार कानून के तहत एक “पब्लिक अथॉरिटी” है और इसलिए यह RTI के दायरे में आएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि चूंकि इस कंपनी में सरकार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और नियंत्रण है, इसलिए इसे RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केवल कंपनी का स्वरूप निजी या पब्लिक लिमिटेड होना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना जरूरी है कि उसमें सरकारी नियंत्रण और सार्वजनिक हित कितना जुड़ा हुआ है।

मामले की पृष्ठभूमि

कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड भारत का पहला ऐसा एयरपोर्ट है जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया गया था। इस कंपनी में राज्य सरकार, सार्वजनिक संस्थानों और निजी निवेशकों की हिस्सेदारी है।

समय के साथ यह सवाल उठा कि क्या यह कंपनी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” मानी जाएगी या नहीं। एक नागरिक द्वारा RTI आवेदन के माध्यम से कंपनी से कुछ जानकारी मांगी गई थी। जब कंपनी ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार किया कि वह RTI के दायरे में नहीं आती, तब यह मामला सूचना आयोग और बाद में अदालतों तक पहुंच गया।

सूचना आयोग और हाईकोर्ट का फैसला

मामला पहले केरल राज्य सूचना आयोग के सामने आया। आयोग ने यह माना कि कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड एक सार्वजनिक प्राधिकरण है और इसे RTI के तहत जानकारी देनी होगी।

इसके बाद कंपनी ने इस आदेश को केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने भी सूचना आयोग के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि कंपनी की संरचना, सरकारी हिस्सेदारी और सार्वजनिक महत्व को देखते हुए यह RTI अधिनियम के दायरे में आती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी संस्था में सरकार की महत्वपूर्ण भागीदारी है और वह सार्वजनिक कार्य कर रही है, तो उसे पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट में अपील

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया कि वह एक कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत निजी कंपनी है और इसलिए उसे RTI के दायरे में नहीं लाया जा सकता।

कंपनी ने यह भी कहा कि उसके अधिकांश शेयर निजी निवेशकों के पास हैं और इसलिए उसे सरकारी संस्था नहीं माना जा सकता।

दूसरी ओर राज्य सूचना आयोग और अन्य पक्षों ने यह तर्क दिया कि कंपनी में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसलिए इसे RTI से बाहर रखना कानून की मंशा के विपरीत होगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि RTI अधिनियम की धारा 2(h) में “पब्लिक अथॉरिटी” की परिभाषा दी गई है। इसके अनुसार कोई भी संस्था यदि सरकार द्वारा स्थापित, नियंत्रित या पर्याप्त रूप से वित्तपोषित (substantially financed) है, तो उसे पब्लिक अथॉरिटी माना जा सकता है।

अदालत ने पाया कि कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड में केरल सरकार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और नियंत्रण मौजूद है। इसके अलावा कंपनी द्वारा संचालित सेवा भी पूरी तरह सार्वजनिक महत्व की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का संचालन केवल व्यावसायिक गतिविधि नहीं बल्कि सार्वजनिक सेवा से भी जुड़ा हुआ है।

सरकारी नियंत्रण का महत्व

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी संस्था को पब्लिक अथॉरिटी मानने के लिए यह जरूरी नहीं है कि सरकार के पास पूर्ण स्वामित्व हो। यदि सरकार का प्रभावी नियंत्रण या महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान है, तो भी संस्था RTI के दायरे में आ सकती है।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार की हिस्सेदारी, प्रशासनिक भूमिका और कंपनी के कार्य की प्रकृति यह दर्शाती है कि यह पूरी तरह निजी संस्था नहीं है।

इसलिए इसे RTI कानून से बाहर नहीं रखा जा सकता।

पारदर्शिता और जवाबदेही का सिद्धांत

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि RTI अधिनियम का मूल उद्देश्य सरकारी कार्यों और सार्वजनिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।

यदि ऐसी संस्थाओं को RTI से बाहर रखा जाए जो सार्वजनिक सेवाएं प्रदान कर रही हैं और जिनमें सरकारी भागीदारी है, तो इससे कानून का उद्देश्य कमजोर हो जाएगा।

अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे सार्वजनिक महत्व की संस्थाओं के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

PPP मॉडल वाली संस्थाओं पर प्रभाव

यह फैसला विशेष रूप से उन संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर काम करती हैं। भारत में कई बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे एयरपोर्ट, मेट्रो, हाईवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं इसी मॉडल के तहत संचालित होती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि यदि ऐसी संस्थाओं में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका या वित्तीय भागीदारी है, तो उन्हें RTI कानून के दायरे में लाया जा सकता है।

इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

नागरिकों के अधिकार मजबूत

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय नागरिकों के सूचना के अधिकार को मजबूत करता है। अब ऐसी संस्थाओं से भी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी जो सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करती हैं लेकिन खुद को निजी संस्था बताकर RTI से बाहर रहने की कोशिश करती हैं।

यह फैसला यह भी संकेत देता है कि अदालतें पारदर्शिता के सिद्धांत को अत्यंत महत्वपूर्ण मानती हैं।

निष्कर्ष

M/s Cochin International Airport Limited बनाम State Information Commission & Another मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सूचना के अधिकार कानून की प्रभावशीलता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी संस्था में सरकारी नियंत्रण या पर्याप्त वित्तीय भागीदारी है और वह सार्वजनिक महत्व की सेवा प्रदान करती है, तो उसे “पब्लिक अथॉरिटी” माना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने से यह सिद्धांत और मजबूत हो गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक शासन की मूल आधारशिला हैं। यह निर्णय भविष्य में PPP मॉडल पर चलने वाली कई संस्थाओं के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है और नागरिकों के सूचना के अधिकार को और अधिक प्रभावी बना सकता है।