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पटना हाईकोर्ट सख्त: वायु और ध्वनि प्रदूषण पर राज्य सरकार से मांगी कार्ययोजना, कई थानाध्यक्षों को किया तलब

पटना हाईकोर्ट सख्त: वायु और ध्वनि प्रदूषण पर राज्य सरकार से मांगी कार्ययोजना, कई थानाध्यक्षों को किया तलब

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में बढ़ते वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन को प्रभावी और ठोस कदम उठाने होंगे।

न्यायमूर्ति राजीव राय की एकल पीठ ने यह आदेश सुरेंद्र कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए और उसे लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।


पुलिस अधिकारियों को अदालत में तलब

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कार्रवाई का पूरा विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया है।

इस पर अदालत ने रूपसपुर और बुद्धा कॉलोनी थाना के थानाध्यक्षों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों ने अब तक अदालत को यह नहीं बताया कि ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए उनके स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है, क्योंकि ध्वनि प्रदूषण सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।


डीजे और लाउडस्पीकर पर कार्रवाई का ब्यौरा मांगा

अदालत के समक्ष एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अजय ने बताया कि गांधी मैदान, पिरबहोर और कदमकुआं थानों की ओर से जो जवाब दाखिल किया गया है, उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि डीजे और लाउडस्पीकर के खिलाफ कितनी कार्रवाई की गई।

जवाब में यह भी नहीं बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण के मामलों में कितने जुर्माने लगाए गए या कितने उपकरण जब्त किए गए।

इस पर अदालत ने तीनों थानाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे 15 नवंबर 2025 से 13 मार्च 2026 तक की अवधि में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का विस्तृत ब्यौरा अदालत में पेश करें।


मसौढ़ी प्रशासन की सराहना

जहां अदालत ने कुछ अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई, वहीं मसौढ़ी के प्रशासनिक अधिकारियों की सराहना भी की।

अदालत ने कहा कि मसौढ़ी के एसडीएम और एसपी ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जो कदम उठाए हैं, वे सराहनीय हैं।

सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने अदालत को बताया कि मसौढ़ी के एसडीएम ने ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के लिए आम लोगों को एक विशेष टेलीफोन नंबर उपलब्ध कराया है।


मैरिज हॉल संचालकों का आश्वासन

अदालत को यह भी बताया गया कि कई मैरिज हॉल संचालकों ने यह आश्वासन दिया है कि वे बिहार लाउडस्पीकर अधिनियम, 1955 का पूरी तरह से पालन करेंगे।

इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में पोस्टर लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

अदालत ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनजागरूकता भी प्रदूषण नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश

सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक ने 24 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी किया था।

इस आदेश में तीनों सिटी एसपी (पूर्वी, पश्चिमी और केंद्रीय), शहरी और ग्रामीण एसपी तथा सभी थानाध्यक्षों को ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

अदालत ने इन कदमों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन को इसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई जारी रखनी चाहिए।


अन्य संस्थाओं से भी अपेक्षा

न्यायमूर्ति राजीव राय ने अपने आदेश में कहा कि केवल पुलिस और प्रशासन ही नहीं बल्कि राज्य की अन्य संस्थाओं को भी जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

अदालत ने कहा कि वायु और ध्वनि प्रदूषण केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या भी है।


वायु गुणवत्ता के आंकड़ों पर चर्चा

सुनवाई के दौरान बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश सिंह ने अदालत को वायु गुणवत्ता से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए।

उन्होंने बताया कि ये एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़े दानापुर, प्लेनेटोरियम और पाटलिपुत्र क्षेत्रों से लिए गए हैं।

अदालत ने इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश

अदालत ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि वायु और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए।

कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन कानूनों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जुर्माना केवल आम लोगों पर ही नहीं बल्कि सरकारी एजेंसियों पर भी लगाया जा सकता है यदि वे नियमों का पालन नहीं करतीं।


कूड़ा और सूखे पत्ते जलाने पर रोक

अदालत ने यह भी कहा कि सड़कों, सार्वजनिक स्थानों, निजी या सरकारी भवनों के आसपास कागज, सूखे पत्ते और कूड़ा जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

यह प्रतिबंध राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप है।

अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि इस प्रकार की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।


अधिकारियों की बैठक बुलाने का निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव नीरज नारायण को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करें।

इस बैठक में राज्य सरकार के अधिवक्ता प्रशांत प्रताप, एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अजय और बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश सिंह भी शामिल होंगे।

अदालत ने कहा कि इस बैठक में वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक योजना पर विचार किया जाए।


अदालत में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

अदालत ने निर्देश दिया कि इस बैठक में जो भी निर्णय लिए जाएं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए और अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाने चाहिए।


अगली सुनवाई की तारीख

पटना हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है।

अदालत ने संकेत दिया है कि अगली सुनवाई में अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी और यह देखा जाएगा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या ठोस प्रगति हुई है।


निष्कर्ष

पटना हाईकोर्ट का यह आदेश यह दर्शाता है कि न्यायपालिका पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से ले रही है।

वायु और ध्वनि प्रदूषण आज शहरी जीवन की बड़ी समस्याओं में से एक बन चुके हैं। ऐसे में अदालत का हस्तक्षेप प्रशासन को अधिक जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां अदालत के निर्देशों का किस प्रकार पालन करती हैं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

संपादकीय एवं कानूनी समीक्षा

एडवोकेट पी.के. निगम (Adv. P.K. Nigam)

वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता एवं मुख्य कानूनी संपादक • Indian Law Notes

भारतीय कानून (BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का सरल हिंदी में प्रामाणिक विधिक विश्लेषण।