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अपकृत्यों के लिए उपचार (Remedies for Torts)

अपकृत्यों के लिए उपचार (Remedies for Torts)

प्रश्न: अपकृत्यों के लिए विभिन्न प्रकार के उपचार क्या हैं? अथवा अपकृत्यों के लिए न्यायिक और गैर-न्यायिक उपचारों की व्याख्या कीजिए।

प्रस्तावना

अपकृत्य (Tort) विधि का उद्देश्य केवल अपराधी को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को हुए नुकसान की भरपाई करना और उसके अधिकारों की रक्षा करना है। जब किसी व्यक्ति के वैधानिक या निजी अधिकार का उल्लंघन किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किया जाता है और उससे उसे हानि पहुँचती है, तो वह व्यक्ति न्यायालय से उपचार (Remedy) प्राप्त कर सकता है।

अपकृत्य विधि का मूल सिद्धांत यह है कि जहाँ अधिकार का उल्लंघन होता है वहाँ उपचार अवश्य होना चाहिए। इसी सिद्धांत को लैटिन उक्ति “Ubi Jus Ibi Remedium” द्वारा व्यक्त किया जाता है।

अपकृत्य के मामलों में उपचार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—

  1. न्यायिक उपचार (Judicial Remedies)
  2. गैर-न्यायिक उपचार (Extra-Judicial Remedies)

इन दोनों प्रकार के उपचारों का उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना और उसके अधिकारों की रक्षा करना है।


1. न्यायिक उपचार (Judicial Remedies)

न्यायिक उपचार वे उपाय हैं जो न्यायालय द्वारा प्रदान किए जाते हैं। जब कोई व्यक्ति अपकृत्य के कारण नुकसान उठाता है, तो वह न्यायालय में वाद दायर करके इन उपचारों को प्राप्त कर सकता है।

मुख्य न्यायिक उपचार निम्नलिखित हैं—

(1) क्षतिपूर्ति (Damages)

अपकृत्य के मामलों में सबसे सामान्य और प्रमुख उपचार क्षतिपूर्ति है। इसका उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक रूप से उस स्थिति में वापस लाना है जिसमें वह अपकृत्य होने से पहले था।

क्षतिपूर्ति के कई प्रकार होते हैं—

(क) सामान्य क्षतिपूर्ति (General Damages)

यह वह क्षतिपूर्ति है जो स्वाभाविक रूप से हुई हानि के लिए दी जाती है। इसमें दर्द, मानसिक कष्ट, प्रतिष्ठा की हानि आदि शामिल होते हैं।

(ख) विशेष क्षतिपूर्ति (Special Damages)

यह वह क्षतिपूर्ति है जिसे विशेष रूप से सिद्ध करना पड़ता है। उदाहरण के लिए—चिकित्सा खर्च, आय की हानि आदि।

(ग) दंडात्मक क्षतिपूर्ति (Exemplary or Punitive Damages)

यह क्षतिपूर्ति प्रतिवादी को दंडित करने और भविष्य में ऐसे कार्यों को रोकने के लिए दी जाती है।

(घ) नाममात्र क्षतिपूर्ति (Nominal Damages)

जब अधिकार का उल्लंघन हुआ हो परंतु वास्तविक हानि नहीं हुई हो, तब न्यायालय बहुत कम राशि की क्षतिपूर्ति देता है।

(ङ) तिरस्कारात्मक क्षतिपूर्ति (Contemptuous Damages)

जब न्यायालय यह मानता है कि वादी का दावा तकनीकी रूप से सही है, परंतु उसका महत्व बहुत कम है, तब यह क्षतिपूर्ति दी जाती है।


(2) निषेधाज्ञा (Injunction)

निषेधाज्ञा न्यायालय का वह आदेश है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को किसी कार्य को करने से रोका जाता है या किसी कार्य को करने के लिए बाध्य किया जाता है।

निषेधाज्ञा के प्रकार—

(क) अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction)

यह मुकदमे के दौरान दी जाती है और मुकदमे के निर्णय तक प्रभावी रहती है।

(ख) स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction)

यह मुकदमे के अंतिम निर्णय के बाद दी जाती है और स्थायी रूप से लागू रहती है।

(ग) अनिवार्य निषेधाज्ञा (Mandatory Injunction)

इसमें न्यायालय प्रतिवादी को किसी कार्य को करने का आदेश देता है।

निषेधाज्ञा का उद्देश्य अपकृत्य को होने से रोकना या उसके प्रभाव को समाप्त करना होता है।


(3) संपत्ति की वापसी (Restitution of Property)

यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति को अवैध रूप से छीन लिया गया हो या कब्जा कर लिया गया हो, तो न्यायालय उसे वापस दिलाने का आदेश दे सकता है।

इस उपचार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित व्यक्ति को उसकी संपत्ति वापस मिल सके।


(4) विशिष्ट पुनर्स्थापन (Specific Restitution)

कुछ मामलों में न्यायालय यह आदेश देता है कि जिस वस्तु को गलत तरीके से लिया गया है, उसे उसी रूप में वापस किया जाए।

उदाहरण के लिए—यदि किसी व्यक्ति की कार या कोई अन्य चल संपत्ति अवैध रूप से ले ली गई हो, तो न्यायालय उसे वापस दिला सकता है।


2. गैर-न्यायिक उपचार (Extra-Judicial Remedies)

गैर-न्यायिक उपचार वे उपाय हैं जिन्हें पीड़ित व्यक्ति स्वयं प्रयोग कर सकता है, बिना न्यायालय की सहायता के।

ये उपचार सीमित परिस्थितियों में ही स्वीकार किए जाते हैं और इन्हें सावधानीपूर्वक प्रयोग करना चाहिए।

मुख्य गैर-न्यायिक उपचार निम्नलिखित हैं—


(1) आत्म-रक्षा (Self-Defence)

यदि किसी व्यक्ति के जीवन, शरीर या संपत्ति पर हमला किया जाता है, तो वह अपनी रक्षा के लिए उचित बल का प्रयोग कर सकता है।

यह सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन और संपत्ति की रक्षा करने का प्राकृतिक अधिकार है।

परंतु आत्म-रक्षा में प्रयोग किया गया बल उचित और आवश्यक होना चाहिए।


(2) अतिक्रमण का निष्कासन (Expulsion of Trespasser)

यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के किसी की भूमि में प्रवेश करता है, तो भूमि का स्वामी उसे वहाँ से बाहर निकाल सकता है।

परंतु ऐसा करते समय अत्यधिक बल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।


(3) वस्तुओं की पुनः प्राप्ति (Re-capture of Goods)

यदि किसी व्यक्ति की वस्तु को अवैध रूप से ले लिया गया हो, तो वह उसे उचित तरीके से वापस ले सकता है।

परंतु इसके लिए बल का प्रयोग सीमित होना चाहिए और सार्वजनिक शांति भंग नहीं होनी चाहिए।


(4) निजी उपद्रव का निवारण (Abatement of Nuisance)

यदि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से पड़ोसी को उपद्रव (Nuisance) होता है, तो वह उस उपद्रव को स्वयं समाप्त कर सकता है।

उदाहरण के लिए—यदि पड़ोसी का पेड़ किसी व्यक्ति की भूमि में फैलकर नुकसान पहुँचा रहा है, तो वह उसकी शाखाओं को काट सकता है।


(5) भूमि की रक्षा (Distress Damage Feasant)

यदि किसी व्यक्ति के पशु किसी अन्य व्यक्ति की भूमि में घुसकर फसल को नुकसान पहुँचाते हैं, तो भूमि का स्वामी उन पशुओं को पकड़कर तब तक रोक सकता है जब तक उसे नुकसान की भरपाई नहीं मिल जाती।


न्यायिक और गैर-न्यायिक उपचारों का महत्व

अपकृत्य के मामलों में उपचारों का विशेष महत्व होता है क्योंकि—

  1. यह पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाते हैं।
  2. यह अपराधी को उत्तरदायी बनाते हैं।
  3. यह समाज में अनुशासन बनाए रखते हैं।
  4. यह भविष्य में ऐसे अपकृत्यों को रोकने का कार्य करते हैं।

न्यायिक उपचार अधिक सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं क्योंकि वे न्यायालय द्वारा नियंत्रित होते हैं।

गैर-न्यायिक उपचार केवल विशेष परिस्थितियों में ही उचित माने जाते हैं।


निष्कर्ष

अपकृत्य विधि का मुख्य उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को हुए नुकसान की भरपाई करना और उसके अधिकारों की रक्षा करना है। इसके लिए कानून ने न्यायिक और गैर-न्यायिक दोनों प्रकार के उपचार प्रदान किए हैं।

न्यायिक उपचारों में मुख्य रूप से क्षतिपूर्ति, निषेधाज्ञा और संपत्ति की वापसी शामिल हैं, जबकि गैर-न्यायिक उपचारों में आत्म-रक्षा, अतिक्रमण का निष्कासन, वस्तुओं की पुनः प्राप्ति और उपद्रव का निवारण शामिल हैं।

इन उपचारों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि समाज में न्याय और संतुलन बना रहे तथा किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होने पर उसे उचित राहत मिल सके।

इस प्रकार, अपकृत्य के लिए उपलब्ध उपचार विधि व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं और वे नागरिक अधिकारों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।