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Information Technology Act, 2000 के अंतर्गत साइबर अपराध (Cyber Crimes) की संकल्पना

Information Technology Act, 2000 के अंतर्गत साइबर अपराध (Cyber Crimes) की संकल्पना : हैकिंग, फिशिंग, साइबर स्टॉकिंग, पहचान चोरी तथा साइबर आतंकवाद का विश्लेषण


1. प्रस्तावना

इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने मानव जीवन को अत्यधिक सरल, तीव्र और प्रभावी बनाया है। आज बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा, प्रशासन, संचार और मनोरंजन – सभी क्षेत्र डिजिटल माध्यमों पर आधारित हो चुके हैं। परंतु जहाँ एक ओर तकनीक ने सुविधा दी है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से नए प्रकार के अपराध भी जन्मे हैं, जिन्हें सामान्यतः साइबर अपराध (Cyber Crimes) कहा जाता है।

भारत में साइबर अपराधों को नियंत्रित करने और दंडित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 एक प्रमुख विधिक ढाँचा प्रदान करता है। यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और डिजिटल हस्ताक्षरों को वैधता प्रदान करने के साथ-साथ साइबर अपराधों की पहचान, परिभाषा और दंड का भी प्रावधान करता है।


2. साइबर अपराध की संकल्पना (Concept of Cyber Crime)

साइबर अपराध से अभिप्राय ऐसे किसी भी अवैध कृत्य से है जिसमें कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, कंप्यूटर नेटवर्क या इंटरनेट का उपयोग अपराध करने के साधन के रूप में किया जाता है या जिनका लक्ष्य स्वयं कंप्यूटर प्रणाली होती है।

दूसरे शब्दों में, साइबर अपराध वह अपराध है जिसमें—

  • कंप्यूटर अपराध का साधन हो, या
  • कंप्यूटर अपराध का लक्ष्य हो, या
  • कंप्यूटर अपराध को सुगम बनाने का माध्यम हो।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 प्रत्यक्ष रूप से “Cyber Crime” शब्द की परिभाषा नहीं देता, किंतु अधिनियम की विभिन्न धाराओं में ऐसे कृत्यों को अपराध घोषित किया गया है जो साइबर अपराध की श्रेणी में आते हैं।


3. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत साइबर अपराधों का ढाँचा

अधिनियम में मुख्यतः दो प्रकार की देयताएँ निर्धारित की गई हैं—

  1. नागरिक देयता (Civil Liability) – क्षतिपूर्ति (Compensation)
  2. आपराधिक देयता (Criminal Liability) – कारावास और जुर्माना

धारा 43, 65, 66 तथा 66A से 66F (संशोधन 2008 के पश्चात) साइबर अपराधों से संबंधित प्रमुख प्रावधान हैं।


4. हैकिंग (Hacking)

(क) अर्थ

हैकिंग का अर्थ है बिना अनुमति किसी कंप्यूटर प्रणाली या नेटवर्क में प्रवेश करना और उसमें संग्रहित डेटा को नष्ट करना, परिवर्तित करना या चुराना।

(ख) विधिक प्रावधान

धारा 43 और धारा 66 के अंतर्गत हैकिंग को दंडनीय अपराध माना गया है। यदि कोई व्यक्ति बेईमानी या धोखाधड़ी की नीयत से किसी कंप्यूटर संसाधन तक अनधिकृत पहुँच प्राप्त करता है, तो वह अपराध का दोषी होगा।

(ग) आवश्यक तत्व

  1. कंप्यूटर प्रणाली में अनधिकृत प्रवेश
  2. डेटा का नुकसान, परिवर्तन या चोरी
  3. बेईमानी या धोखाधड़ी की मंशा

(घ) दंड

कारावास तथा जुर्माना या दोनों।

(ङ) महत्व

हैकिंग आधुनिक समय का एक गंभीर साइबर अपराध है क्योंकि इससे बैंकिंग प्रणाली, सरकारी डेटाबेस, रक्षा प्रणालियाँ और व्यक्तिगत जानकारी प्रभावित हो सकती है।


5. फिशिंग (Phishing)

(क) अर्थ

फिशिंग वह प्रक्रिया है जिसमें अपराधी स्वयं को किसी विश्वसनीय संस्था या व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करके पीड़ित से पासवर्ड, बैंक विवरण, OTP आदि प्राप्त करता है।

(ख) विधिक स्थिति

फिशिंग को मुख्यतः धोखाधड़ी (Fraud) और पहचान चोरी के अंतर्गत दंडित किया जाता है। धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से धोखाधड़ी) इस अपराध से संबंधित है।

(ग) आवश्यक तत्व

  1. झूठी पहचान
  2. धोखा देकर सूचना प्राप्त करना
  3. अवैध लाभ की मंशा

(घ) दंड

कारावास और जुर्माना।

(ङ) प्रभाव

फिशिंग के माध्यम से लाखों लोगों की आर्थिक क्षति होती है और डिजिटल लेन-देन में विश्वास कमजोर पड़ता है।


6. साइबर स्टॉकिंग (Cyber Stalking)

(क) अर्थ

साइबर स्टॉकिंग वह कृत्य है जिसमें कोई व्यक्ति इंटरनेट या डिजिटल माध्यमों से किसी व्यक्ति का बार-बार पीछा करता है, धमकाता है, परेशान करता है या उसकी निजता में हस्तक्षेप करता है।

(ख) विधिक प्रावधान

धारा 66E (निजता का उल्लंघन) तथा अन्य संबंधित धाराओं के अंतर्गत यह अपराध दंडनीय है।

(ग) रूप

  • सोशल मीडिया पर लगातार संदेश भेजना
  • धमकी देना
  • निजी तस्वीरें साझा करना

(घ) दंड

कारावास तथा जुर्माना।

(ङ) महत्व

यह अपराध विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।


7. पहचान चोरी (Identity Theft)

(क) अर्थ

किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, आधार संख्या, बैंक विवरण, पासवर्ड आदि का अवैध रूप से उपयोग करना पहचान चोरी कहलाता है।

(ख) विधिक प्रावधान

धारा 66C पहचान चोरी से संबंधित है।

(ग) आवश्यक तत्व

  1. किसी की पहचान संबंधी जानकारी का अनधिकृत उपयोग
  2. बेईमानी की मंशा

(घ) दंड

कारावास तथा जुर्माना।

(ङ) प्रभाव

इससे न केवल आर्थिक हानि होती है, बल्कि व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है।


8. साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism)

(क) अर्थ

साइबर आतंकवाद वह कृत्य है जिसमें कंप्यूटर या नेटवर्क के माध्यम से देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा या आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाला जाता है।

(ख) विधिक प्रावधान

धारा 66F साइबर आतंकवाद से संबंधित है।

(ग) आवश्यक तत्व

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा
  2. कंप्यूटर या नेटवर्क का उपयोग
  3. भय या अस्थिरता उत्पन्न करने की मंशा

(घ) दंड

आजीवन कारावास तक का प्रावधान।

(ङ) महत्व

यह आधुनिक युग में आतंकवाद का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है।


9. साइबर अपराधों के दुष्प्रभाव

  1. आर्थिक क्षति
  2. निजता का उल्लंघन
  3. राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा
  4. डिजिटल प्रणाली में अविश्वास

10. आलोचनात्मक मूल्यांकन

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ने भारत में साइबर अपराधों से निपटने के लिए ठोस आधार प्रदान किया है, किंतु तकनीक के तीव्र विकास के कारण निरंतर संशोधन आवश्यक हैं। प्रवर्तन एजेंसियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना भी अत्यंत आवश्यक है।


11. निष्कर्ष

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत साइबर अपराधों की संकल्पना व्यापक और व्यावहारिक है। हैकिंग, फिशिंग, साइबर स्टॉकिंग, पहचान चोरी तथा साइबर आतंकवाद जैसे अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दंड का प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम भारत के साइबर विधिक ढाँचे की रीढ़ है और डिजिटल युग में कानून एवं तकनीक के बीच संतुलन स्थापित करता है।

नीचे साइबर अपराध तथा Information Technology Act, 2000 से संबंधित 5 महत्वपूर्ण Short Answer Type प्रश्न–उत्तर प्रस्तुत हैं:


1. साइबर अपराध (Cyber Crime) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:
साइबर अपराध वह अवैध कृत्य है जिसमें कंप्यूटर, कंप्यूटर नेटवर्क या इंटरनेट का उपयोग अपराध के साधन, लक्ष्य या माध्यम के रूप में किया जाता है।


2. हैकिंग (Hacking) क्या है?

उत्तर:
हैकिंग का अर्थ है बिना अनुमति किसी कंप्यूटर प्रणाली या नेटवर्क में प्रवेश कर डेटा को नष्ट करना, परिवर्तित करना या चोरी करना।


3. फिशिंग (Phishing) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर:
फिशिंग वह प्रक्रिया है जिसमें अपराधी स्वयं को किसी विश्वसनीय संस्था के रूप में प्रस्तुत कर पीड़ित से बैंक विवरण, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी प्राप्त करता है।


4. पहचान चोरी (Identity Theft) क्या है?

उत्तर:
किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी का अनधिकृत रूप से उपयोग करना पहचान चोरी कहलाता है।


5. साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism) क्या है?

उत्तर:
साइबर आतंकवाद वह कृत्य है जिसमें कंप्यूटर या नेटवर्क के माध्यम से देश की सुरक्षा, संप्रभुता या अखंडता को खतरे में डाला जाता है।