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राज्य बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ताओं की नामावली (Roll of Advocates) का संधारण: विधिक उपबंध एवं प्रक्रिया का विस्तृत विवेचन

राज्य बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ताओं की नामावली (Roll of Advocates) का संधारण: विधिक उपबंध एवं प्रक्रिया का विस्तृत विवेचन


भूमिका

भारत में विधि व्यवसाय (Legal Profession) को सुव्यवस्थित, संगठित एवं नियंत्रित रखने के लिए संसद द्वारा अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) अधिनियमित किया गया। इस अधिनियम के अंतर्गत अधिवक्ताओं के नामांकन, उनके अधिकार, कर्तव्य, अनुशासनात्मक नियंत्रण तथा बार काउंसिलों की स्थापना का विस्तृत प्रावधान किया गया है।

राज्य बार काउंसिल (State Bar Council) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य अपने राज्य में नामांकित सभी अधिवक्ताओं की नामावली (Roll of Advocates) को तैयार करना तथा उसका संधारण (Maintenance) करना है। यही नामावली यह प्रमाणित करती है कि कौन व्यक्ति विधिवत रूप से अधिवक्ता है और उसे विधि व्यवसाय करने का अधिकार प्राप्त है।

इस संपूर्ण व्यवस्था का समन्वय और पर्यवेक्षण Bar Council of India द्वारा किया जाता है।


1. अधिवक्ताओं की नामावली (Roll of Advocates) का अर्थ

नामावली से तात्पर्य उस आधिकारिक सूची से है जिसमें किसी राज्य बार काउंसिल के अंतर्गत नामांकित सभी अधिवक्ताओं के नाम, पते तथा अन्य आवश्यक विवरण दर्ज होते हैं।

यह सूची यह निर्धारित करती है कि—

  • कौन व्यक्ति अधिवक्ता है,
  • किस राज्य बार काउंसिल के अंतर्गत नामांकित है,
  • और उसे विधि व्यवसाय करने का वैध अधिकार प्राप्त है।

2. विधिक आधार (Legal Basis)

अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अध्याय III में अधिवक्ताओं के नामांकन तथा नामावली के संधारण से संबंधित उपबंध दिए गए हैं। विशेष रूप से—

  • धारा 17 – राज्य बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ताओं की नामावली का संधारण
  • धारा 18 – नामावली की प्रमाणित प्रतिलिपि
  • धारा 19 – बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सूचना

इन धाराओं के अंतर्गत राज्य बार काउंसिल पर यह वैधानिक दायित्व डाला गया है कि वह अपने राज्य की अधिवक्ताओं की सूची बनाए और उसे अद्यतन रखे।


3. राज्य बार काउंसिल द्वारा नामावली का संधारण

(क) नामावली की स्थापना

प्रत्येक राज्य बार काउंसिल अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत एक आधिकारिक नामावली बनाए रखती है। इसमें उन सभी व्यक्तियों के नाम दर्ज होते हैं जिन्हें उस राज्य बार काउंसिल ने अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया है।


(ख) नामावली में सम्मिलित विवरण

सामान्यतः नामावली में निम्नलिखित विवरण अंकित किए जाते हैं—

  1. अधिवक्ता का पूरा नाम
  2. पिता/पति का नाम
  3. स्थायी पता
  4. नामांकन संख्या
  5. नामांकन की तिथि
  6. शैक्षणिक योग्यता
  7. फोटो और हस्ताक्षर

ये विवरण अधिवक्ता की पहचान तथा उसकी वैधानिक स्थिति को प्रमाणित करते हैं।


(ग) नामांकन के पश्चात प्रविष्टि

जब कोई व्यक्ति राज्य बार काउंसिल द्वारा नामांकित किया जाता है, तो—

  1. उसका नाम नामावली में दर्ज किया जाता है।
  2. उसे नामांकन प्रमाणपत्र (Certificate of Enrolment) प्रदान किया जाता है।

यह प्रमाणपत्र इस बात का साक्ष्य होता है कि व्यक्ति विधिवत अधिवक्ता है।


(घ) नामावली का अद्यतन (Updating of Roll)

राज्य बार काउंसिल का कर्तव्य है कि वह समय-समय पर नामावली को अद्यतन रखे। इसके अंतर्गत—

  • नए नामांकनों को जोड़ा जाता है।
  • स्थानांतरण (Transfer) के मामलों में संशोधन किया जाता है।
  • निलंबित या अपदस्थ (Disbarred) अधिवक्ताओं के नाम हटाए जाते हैं या उनके समक्ष उचित टिप्पणी की जाती है।

4. एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण

यदि कोई अधिवक्ता अपना नामांकन एक राज्य बार काउंसिल से दूसरे राज्य बार काउंसिल में स्थानांतरित कराना चाहता है, तो—

  1. वह संबंधित राज्य बार काउंसिल में आवेदन करता है।
  2. आवश्यक जाँच के बाद उसका नाम पुराने राज्य की नामावली से हटाकर नए राज्य की नामावली में दर्ज किया जाता है।

इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि किसी अधिवक्ता का नाम एक समय में केवल एक राज्य की नामावली में ही दर्ज रहे।


5. नामावली की प्रमाणित प्रतिलिपि (Certified Copy)

धारा 18 के अनुसार—

  • राज्य बार काउंसिल नामावली की प्रमाणित प्रतिलिपि सार्वजनिक निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराएगी।
  • कोई भी व्यक्ति निर्धारित शुल्क पर इसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त कर सकता है।

इससे पारदर्शिता बनी रहती है।


6. बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सूचना

प्रत्येक राज्य बार काउंसिल को समय-समय पर अपनी नामावली की प्रति Bar Council of India को भेजनी होती है।

इससे पूरे देश में अधिवक्ताओं का एक केंद्रीय रिकॉर्ड तैयार रहता है।


7. निलंबन एवं नाम हटाने की स्थिति में नामावली का संशोधन

यदि किसी अधिवक्ता के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही में—

  • निलंबन (Suspension)
    या
  • नामांकन रद्द (Removal)

का आदेश पारित होता है, तो राज्य बार काउंसिल उसकी प्रविष्टि में आवश्यक संशोधन करती है।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि ऐसा व्यक्ति विधि व्यवसाय न कर सके।


8. नामावली संधारण का उद्देश्य

राज्य बार काउंसिल द्वारा नामावली संधारण के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  1. विधि व्यवसाय को नियंत्रित करना
  2. केवल योग्य व्यक्तियों को प्रैक्टिस की अनुमति देना
  3. जनता को यह जानकारी देना कि कौन व्यक्ति अधिवक्ता है
  4. अनुशासनात्मक नियंत्रण को प्रभावी बनाना

9. नामावली और विधि व्यवसाय का अधिकार

केवल वही व्यक्ति विधि व्यवसाय कर सकता है जिसका नाम राज्य बार काउंसिल की नामावली में दर्ज हो।

यदि किसी व्यक्ति का नाम नामावली में नहीं है, तो उसे न्यायालयों में प्रैक्टिस करने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।


10. न्यायिक दृष्टिकोण

न्यायालयों ने अनेक मामलों में यह स्पष्ट किया है कि अधिवक्ताओं की नामावली विधि व्यवसाय की नींव है। यह न केवल अधिवक्ताओं की पहचान का साधन है, बल्कि न्याय प्रणाली की शुद्धता बनाए रखने का महत्वपूर्ण उपकरण भी है।


11. आधुनिक युग में डिजिटल नामावली

आज कई राज्य बार काउंसिल नामावली को डिजिटल रूप में भी संधारित कर रही हैं। इससे—

  • सूचना शीघ्र उपलब्ध होती है
  • पारदर्शिता बढ़ती है
  • प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होती है

12. नामावली संधारण का महत्व

  • विधि व्यवसाय की गरिमा बनी रहती है
  • अयोग्य व्यक्तियों को पेशे से दूर रखा जाता है
  • जनता का विश्वास कायम रहता है

निष्कर्ष

राज्य बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ताओं की नामावली का संधारण अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की एक केंद्रीय विशेषता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि विधि व्यवसाय केवल योग्य, सक्षम और नैतिक व्यक्तियों द्वारा ही किया जाए।

अतः कहा जा सकता है कि अधिवक्ताओं की नामावली न केवल एक प्रशासनिक रिकॉर्ड है, बल्कि न्याय-प्रणाली की शुद्धता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता का आधार स्तंभ है।