IndianLawNotes.com

विधि व्यवसाय (Legal Profession) करने के लिए आवश्यक योग्यताएँ: एक विस्तृत अध्ययन

विधि व्यवसाय (Legal Profession) करने के लिए आवश्यक योग्यताएँ: एक विस्तृत अध्ययन


प्रस्तावना

विधि व्यवसाय (Legal Profession) किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। न्याय-प्रणाली की प्रभावशीलता, विधि-शासन (Rule of Law) की स्थापना तथा नागरिक अधिकारों की रक्षा में अधिवक्ताओं की केंद्रीय भूमिका होती है। अतः यह अनिवार्य है कि विधि व्यवसाय में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों के लिए कुछ निश्चित योग्यताएँ, मानक एवं प्रक्रिया निर्धारित हों।

भारत में विधि व्यवसाय को विनियमित करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) लागू है। इस अधिनियम के अंतर्गत विधि व्यवसाय करने के लिए आवश्यक योग्यताओं, अयोग्यताओं और नामांकन की प्रक्रिया का विस्तृत प्रावधान किया गया है।

विधि व्यवसाय को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च संस्था Bar Council of India है, जो अधिनियम की धारा 49 के अंतर्गत नियम बनाती है तथा विधि शिक्षा और अधिवक्ताओं के आचरण को नियंत्रित करती है।


1. विधि व्यवसाय का अर्थ

विधि व्यवसाय से तात्पर्य न्यायालयों, अधिकरणों (Tribunals), वैधानिक प्राधिकरणों तथा अन्य विधिक मंचों के समक्ष पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करना, विधिक सलाह देना, वकालतनामा प्रस्तुत करना तथा न्यायिक कार्यवाही में भाग लेना है।

यह केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि न्याय के प्रशासन में सहयोग का दायित्वपूर्ण कार्य है।


2. विधि व्यवसाय करने का विधिक आधार

भारत में कोई भी व्यक्ति तभी विधि व्यवसाय कर सकता है जब—

  1. वह राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हो।
  2. उसे विधि व्यवसाय करने का प्रमाणपत्र (Certificate of Practice) प्राप्त हो।

यह प्रावधान अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अंतर्गत निर्धारित है।


3. विधि व्यवसाय हेतु आवश्यक योग्यताएँ

विधि व्यवसाय करने के लिए निम्नलिखित आवश्यक योग्यताएँ अनिवार्य हैं—


(क) नागरिकता (Citizenship)

सामान्यतः व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है।

हालाँकि, पारस्परिकता (Reciprocity) के सिद्धांत के आधार पर अन्य देशों के नागरिकों को भी अनुमति दी जा सकती है, यदि उनके देश में भारतीय नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हों।


(ख) शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification)

यह विधि व्यवसाय की सबसे महत्वपूर्ण योग्यता है।

1. मान्यता प्राप्त विधि डिग्री

व्यक्ति को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से—

  • तीन वर्षीय LL.B.
    या
  • पाँच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम (जैसे BA LL.B., BBA LL.B. आदि)

उत्तीर्ण करना आवश्यक है।

2. मान्यता का महत्व

डिग्री उस विश्वविद्यालय से प्राप्त होनी चाहिए जो विधि शिक्षा प्रदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त हो।


(ग) आयु (Age Requirement)

नामांकन के समय व्यक्ति की आयु बालिग (18 वर्ष या उससे अधिक) होनी चाहिए।


(घ) राज्य बार काउंसिल में नामांकन (Enrolment)

विधि व्यवसाय करने के लिए व्यक्ति का नाम किसी राज्य बार काउंसिल की सूची में दर्ज होना आवश्यक है।

राज्य बार काउंसिल अधिवक्ताओं की सूची तैयार करती है और नामांकन प्रमाणपत्र जारी करती है।


(ङ) अखिल भारतीय बार परीक्षा (All India Bar Examination)

नामांकन के पश्चात व्यक्ति को अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है।

यह परीक्षा इस उद्देश्य से आयोजित की जाती है कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिवक्ता में न्यूनतम व्यावसायिक दक्षता (Minimum Professional Competence) हो।


(च) उत्तम चरित्र (Good Moral Character)

विधि व्यवसाय उच्च नैतिक मानकों की अपेक्षा करता है।

अतः आवेदक का चरित्र उत्तम होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति—

  • नैतिक अधमता (Moral Turpitude) वाले अपराध में दोषसिद्ध है,
    तो वह विधि व्यवसाय करने के लिए अयोग्य हो सकता है।

(छ) निर्धारित शुल्क का भुगतान

नामांकन के समय निर्धारित शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है।


4. अयोग्यताएँ (Disqualifications)

निम्न परिस्थितियों में व्यक्ति विधि व्यवसाय करने के लिए अयोग्य हो सकता है—

  1. यदि वह किसी गंभीर अपराध में दोषसिद्ध हो।
  2. यदि वह किसी सरकारी सेवा में कार्यरत हो और विधि व्यवसाय करने की अनुमति न हो।
  3. यदि वह मानसिक रूप से अक्षम हो।

5. विधि व्यवसाय के अधिकार

आवश्यक योग्यताएँ पूर्ण करने और नामांकन के पश्चात व्यक्ति को—

  • उच्चतम न्यायालय से लेकर अधीनस्थ न्यायालयों तक प्रैक्टिस करने का अधिकार
  • विधिक परामर्श देने का अधिकार
  • वकालतनामा प्रस्तुत करने का अधिकार

प्राप्त होता है।


6. विधि व्यवसाय और नैतिक दायित्व

योग्यता केवल डिग्री और नामांकन तक सीमित नहीं है। एक अधिवक्ता को—

  • न्यायालय के प्रति सम्मान
  • मुवक्किल के प्रति निष्ठा
  • समाज के प्रति उत्तरदायित्व

का पालन करना होता है।


7. विधि व्यवसाय का महत्व

विधि व्यवसाय लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ है। अधिवक्ता—

  • नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है
  • अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाता है
  • संविधान की व्याख्या में सहायता करता है

8. योग्यता निर्धारण का उद्देश्य

इन योग्यताओं का उद्देश्य है—

  1. विधि व्यवसाय में केवल योग्य और सक्षम व्यक्तियों को प्रवेश देना।
  2. पेशे की गरिमा बनाए रखना।
  3. न्याय प्रणाली में जनता का विश्वास कायम रखना।

9. आधुनिक युग में आवश्यक अतिरिक्त दक्षताएँ

आज के समय में केवल विधि डिग्री पर्याप्त नहीं है। एक सफल अधिवक्ता के लिए—

  • विधिक शोध (Legal Research) कौशल
  • संप्रेषण कौशल (Communication Skills)
  • तकनीकी दक्षता (Technology Skills)
  • विश्लेषणात्मक क्षमता (Analytical Ability)

भी आवश्यक हैं।


10. निष्कर्ष

विधि व्यवसाय करने के लिए निर्धारित योग्यताएँ केवल औपचारिकताएँ नहीं हैं, बल्कि न्याय-प्रणाली की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साधन हैं।

एक व्यक्ति तभी विधि व्यवसाय कर सकता है जब वह—

  • विधि में शिक्षित हो,
  • विधिवत नामांकित हो,
  • नैतिक रूप से योग्य हो,
  • तथा निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका हो।

अतः यह कहा जा सकता है कि विधि व्यवसाय करने के लिए आवश्यक योग्यताएँ न्याय-प्रणाली की शुचिता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बनाए रखने का मूल आधार हैं।