IndianLawNotes.com

व्यावसायिक नैतिकता (Professional Ethics) की आवश्यकता एवं उद्देश्य: एक विस्तृत विवेचना

व्यावसायिक नैतिकता (Professional Ethics) की आवश्यकता एवं उद्देश्य: एक विस्तृत विवेचना


भूमिका

मानव समाज का विकास केवल वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि नैतिक मूल्यों, आचरण और उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार से भी होता है। प्रत्येक पेशा (Profession) समाज के लिए कोई न कोई विशिष्ट सेवा प्रदान करता है—जैसे विधि, चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासन, पत्रकारिता, इंजीनियरिंग आदि। इन सभी पेशों से जुड़े व्यक्तियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कार्यों को केवल कानूनी ढांचे के भीतर ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के अनुरूप भी करें। इसी विचारधारा से व्यावसायिक नैतिकता (Professional Ethics) की अवधारणा विकसित हुई।

व्यावसायिक नैतिकता उन सिद्धांतों, नियमों और मानकों का समूह है जो किसी पेशे से जुड़े व्यक्ति के आचरण, व्यवहार और कर्तव्यों को निर्देशित करते हैं। यह पेशे की गरिमा बनाए रखने, समाज में विश्वास उत्पन्न करने और सेवा-भाव को सुदृढ़ करने का आधार है।


1. व्यावसायिक नैतिकता का अर्थ (Meaning of Professional Ethics)

व्यावसायिक नैतिकता से तात्पर्य उन नैतिक सिद्धांतों और मूल्यों से है जो किसी विशेष पेशे के सदस्यों के आचरण को नियंत्रित करते हैं। यह निर्धारित करती है कि किसी पेशेवर को अपने ग्राहकों, सहकर्मियों, संस्था और समाज के प्रति किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए।

दूसरे शब्दों में, व्यावसायिक नैतिकता वह आचार संहिता है जो यह बताती है कि क्या सही है और क्या गलत है—केवल कानून की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि नैतिक दृष्टि से भी।


2. व्यावसायिक नैतिकता की पृष्ठभूमि और विकास

प्राचीन काल से ही विभिन्न पेशों के लिए कुछ नैतिक मानक निर्धारित किए जाते रहे हैं। जैसे—

  • वैद्य (Doctor) के लिए रोगी की सेवा को सर्वोपरि माना गया।
  • गुरु के लिए शिष्य को ज्ञान और चरित्र निर्माण देना प्रमुख कर्तव्य रहा।
  • न्यायाधीश और अधिवक्ता के लिए निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा आवश्यक मानी गई।

आधुनिक काल में पेशों के संगठनात्मक स्वरूप के कारण इन नैतिक मानकों को विधिक रूप भी दिया गया, ताकि उनका पालन अनिवार्य हो सके।


3. व्यावसायिक नैतिकता की आवश्यकता (Necessity of Professional Ethics)

(क) पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए

हर पेशे की एक सामाजिक प्रतिष्ठा होती है। यदि उस पेशे से जुड़े लोग अनैतिक आचरण करें, तो पूरे पेशे की साख प्रभावित होती है। व्यावसायिक नैतिकता पेशे की गरिमा बनाए रखने में सहायक होती है।

(ख) जनता के विश्वास की रक्षा के लिए

लोग अपने महत्वपूर्ण कार्य—जैसे इलाज, मुकदमा, शिक्षा—पेशेवरों को सौंपते हैं। यह तभी संभव है जब उन्हें उन पर भरोसा हो। व्यावसायिक नैतिकता इस विश्वास को बनाए रखती है।

(ग) शक्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए

कई पेशों में व्यक्तियों को विशेष अधिकार और शक्तियां प्राप्त होती हैं। यदि इनका दुरुपयोग किया जाए तो समाज को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। नैतिकता इन शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाती है।

(घ) सेवा-भाव को प्रोत्साहित करने के लिए

व्यावसायिक नैतिकता यह सिखाती है कि पेशा केवल धन अर्जन का साधन नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम भी है।

(ङ) पेशागत संघर्षों के समाधान के लिए

कई बार पेशेवर के सामने हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति उत्पन्न होती है। नैतिक सिद्धांत ऐसे संघर्षों में सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।


4. व्यावसायिक नैतिकता के उद्देश्य (Objects of Professional Ethics)

(क) उच्च नैतिक मानकों की स्थापना

व्यावसायिक नैतिकता का प्रमुख उद्देश्य पेशे में उच्च नैतिक स्तर स्थापित करना है।

(ख) कर्तव्यबोध विकसित करना

यह पेशेवरों में अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता उत्पन्न करती है।

(ग) पेशागत अनुशासन सुनिश्चित करना

नैतिकता के नियम पेशेवरों को अनुशासित रखते हैं।

(घ) समाज के हितों की रक्षा

व्यावसायिक नैतिकता समाज के व्यापक हितों को प्राथमिकता देती है।

(ङ) न्याय और निष्पक्षता को बढ़ावा देना

हर पेशे में निष्पक्षता और न्याय की भावना विकसित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।


5. विभिन्न पेशों में व्यावसायिक नैतिकता का महत्व

(क) विधि पेशा (Legal Profession)

अधिवक्ता और न्यायाधीश न्याय-प्रणाली के स्तंभ हैं। उनकी नैतिकता से ही न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहती है। भारत में अधिवक्ताओं की आचार संहिता निर्धारित करने का कार्य Bar Council of India करता है।

(ख) चिकित्सा पेशा (Medical Profession)

डॉक्टर का कर्तव्य है कि वह रोगी के जीवन की रक्षा करे। लालच या लापरवाही नैतिकता के विरुद्ध है।

(ग) शिक्षा क्षेत्र

शिक्षक केवल ज्ञानदाता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माता भी है। उसकी नैतिकता समाज की भावी पीढ़ी को प्रभावित करती है।

(घ) प्रशासनिक सेवाएं

प्रशासनिक अधिकारियों से निष्पक्षता, ईमानदारी और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है।


6. व्यावसायिक नैतिकता और कानून का संबंध

कानून न्यूनतम मानक निर्धारित करता है, जबकि नैतिकता उससे ऊंचे आदर्श स्थापित करती है। कोई कार्य कानूनी हो सकता है, परंतु अनैतिक भी हो सकता है। व्यावसायिक नैतिकता पेशेवर को केवल कानून का पालन करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे नैतिक रूप से सही कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।


7. व्यावसायिक नैतिकता के अभाव के दुष्परिणाम

  • भ्रष्टाचार में वृद्धि
  • जनता का विश्वास समाप्त होना
  • पेशे की प्रतिष्ठा को नुकसान
  • सामाजिक असंतोष

8. व्यावसायिक नैतिकता के पालन से होने वाले लाभ

  • पेशे की प्रतिष्ठा बढ़ती है
  • समाज में विश्वास और स्थिरता आती है
  • कार्य की गुणवत्ता सुधरती है
  • पेशेवर संतोष प्राप्त होता है

9. आधुनिक युग में व्यावसायिक नैतिकता की बढ़ती आवश्यकता

वैश्वीकरण, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी विकास के कारण आज पेशेवरों के सामने नई चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों में नैतिकता का महत्व और भी बढ़ गया है, ताकि पेशे केवल लाभ-केन्द्रित न होकर मानव-कल्याण केन्द्रित बने रहें।


10. निष्कर्ष

व्यावसायिक नैतिकता किसी भी सभ्य और विकसित समाज की आधारशिला है। यह पेशेवरों को न केवल बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है, बल्कि उन्हें अच्छा इंसान बनने की दिशा भी दिखाती है।

अतः कहा जा सकता है कि व्यावसायिक नैतिकता की आवश्यकता और उद्देश्य दोनों ही समाज के नैतिक, सामाजिक और विधिक विकास से गहराई से जुड़े हुए हैं। इसके बिना न तो पेशों की गरिमा सुरक्षित रह सकती है और न ही समाज में न्याय, विश्वास और सद्भाव की स्थापना संभव है।