अधिवक्ता के लिए आचार संहिता (Code of Conduct for an Advocate): परिभाषा, स्वरूप एवं विधिक उपबंधों सहित विस्तृत विवेचना
भूमिका
अधिवक्ता (Advocate) का स्थान न्याय-प्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह न केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधि होता है, बल्कि न्यायालय का अधिकारी (Officer of the Court) भी होता है। इस दोहरे दायित्व के कारण अधिवक्ता से अपेक्षा की जाती है कि उसका आचरण उच्चतम नैतिक, विधिक एवं पेशागत मानकों के अनुरूप हो। इसी उद्देश्य से अधिवक्ताओं के लिए एक सुव्यवस्थित आचार संहिता (Code of Conduct) निर्धारित की गई है, जो उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं आचरण के मानकों को नियंत्रित करती है।
भारत में अधिवक्ताओं की आचार संहिता का प्रमुख स्रोत Bar Council of India द्वारा बनाए गए नियम हैं, जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49 के अंतर्गत बनाए गए हैं। ये नियम अधिवक्ताओं के पेशागत आचरण एवं शिष्टाचार (Standards of Professional Conduct and Etiquette) से संबंधित हैं।
1. आचार संहिता का अर्थ (Meaning of Code of Conduct)
आचार संहिता से तात्पर्य उन नैतिक एवं विधिक नियमों के समूह से है, जिनका पालन अधिवक्ता को अपने पेशे के निर्वहन के दौरान करना आवश्यक होता है। ये नियम यह निर्धारित करते हैं कि अधिवक्ता—
- न्यायालय के समक्ष कैसे आचरण करेगा,
- मुवक्किल के प्रति उसका दायित्व क्या होगा,
- अपने सह-अधिवक्ताओं एवं प्रतिपक्ष के प्रति उसका व्यवहार कैसा होगा।
अतः आचार संहिता अधिवक्ता के चरित्र और पेशे की गरिमा की रक्षक है।
2. आचार संहिता का विधिक आधार (Legal Basis)
भारत में अधिवक्ताओं की आचार संहिता निम्न विधिक स्रोतों पर आधारित है—
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961
- Bar Council of India द्वारा बनाए गए नियम
- न्यायालयों के निर्णय एवं परंपराएं
धारा 49(1)(c) के अंतर्गत बार काउंसिल को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अधिवक्ताओं के पेशागत आचरण के मानक निर्धारित करे।
3. न्यायालय के प्रति अधिवक्ता का कर्तव्य
(क) न्यायालय का सम्मान
नियमों के अनुसार अधिवक्ता को न्यायालय के प्रति पूर्ण सम्मान प्रदर्शित करना चाहिए। वह ऐसी कोई बात या कार्य नहीं करेगा जिससे न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचे।
(ख) सत्य और ईमानदारी
अधिवक्ता को न्यायालय के समक्ष झूठे तथ्य या कूटरचित साक्ष्य प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।
(ग) अनुचित साधनों का प्रयोग निषिद्ध
किसी प्रकार की रिश्वत, दबाव या प्रभाव का प्रयोग करना आचार संहिता का उल्लंघन है।
4. मुवक्किल के प्रति अधिवक्ता का कर्तव्य
(क) निष्ठा (Fidelity)
अधिवक्ता को अपने मुवक्किल के हितों की रक्षा पूरी निष्ठा से करनी चाहिए।
(ख) गोपनीयता
मुवक्किल द्वारा दी गई सूचनाओं को गोपनीय रखना अधिवक्ता का अनिवार्य कर्तव्य है।
(ग) उचित परामर्श
अधिवक्ता को सही और निष्पक्ष कानूनी सलाह देनी चाहिए।
5. प्रतिपक्ष के प्रति अधिवक्ता का कर्तव्य
अधिवक्ता को प्रतिपक्ष के साथ शालीनता से व्यवहार करना चाहिए।
- अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए
- व्यक्तिगत आक्षेप से बचना चाहिए
6. सह-अधिवक्ताओं के प्रति कर्तव्य
अधिवक्ता को अपने सहकर्मियों के प्रति सौहार्दपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए।
- किसी अन्य अधिवक्ता को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं करना चाहिए
- पेशागत सहयोग बनाए रखना चाहिए
7. फीस से संबंधित प्रावधान
नियमों के अनुसार—
- अधिवक्ता को अत्यधिक या अनुचित फीस नहीं लेनी चाहिए
- फीस का निर्धारण पारदर्शी होना चाहिए
8. विज्ञापन पर प्रतिबंध
अधिवक्ता अपने पेशे का प्रचार नहीं कर सकता।
वह किसी भी प्रकार का विज्ञापन या स्वयं-प्रशंसा नहीं करेगा।
9. हितों के टकराव (Conflict of Interest)
यदि किसी मामले में अधिवक्ता का व्यक्तिगत हित जुड़ा हो, तो वह उस मामले में पेश नहीं हो सकता।
10. पेशागत दुराचार (Professional Misconduct)
निम्नलिखित कार्य पेशागत दुराचार माने जाते हैं—
- मुवक्किल से धोखाधड़ी
- न्यायालय की अवमानना
- रिश्वत लेना या देना
11. अनुशासनात्मक कार्यवाही
आचार संहिता के उल्लंघन पर अधिवक्ता के विरुद्ध—
- चेतावनी
- निलंबन
- नामांकन रद्द
की कार्यवाही की जा सकती है।
12. आचार संहिता का महत्व
- न्याय प्रणाली की गरिमा बनी रहती है
- जनता का विश्वास बढ़ता है
- विधि शासन स्थापित होता है
13. निष्कर्ष
अधिवक्ता की आचार संहिता न्याय प्रणाली की आत्मा है। इसका पालन प्रत्येक अधिवक्ता का नैतिक एवं विधिक दायित्व है। आचार संहिता के माध्यम से ही अधिवक्ता अपने पेशे की गरिमा बनाए रखते हुए समाज में न्याय की स्थापना कर सकता है।