Act of God (दैवी कार्य) तथा Inevitable Accident (अनिवार्य दुर्घटना)
भूमिका
अपकृत्य विधि (Law of Torts) का मूल सिद्धांत यह है कि यदि किसी व्यक्ति के गलत कार्य या चूक से किसी अन्य व्यक्ति को विधिक हानि पहुँचती है, तो वह व्यक्ति क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी होगा। परंतु यह दायित्व पूर्ण (absolute) नहीं है। कुछ परिस्थितियों में कानून प्रतिवादी को दायित्व से मुक्त कर देता है। इन्हें सामान्य प्रतिरक्षाएँ (General Defences) कहा जाता है।
इन सामान्य प्रतिरक्षाओं में दो अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतिरक्षाएँ हैं—
- Act of God (दैवी कार्य)
- Inevitable Accident (अनिवार्य या अपरिहार्य दुर्घटना)
दोनों प्रतिरक्षाओं का उद्देश्य यह दिखाना है कि हानि प्रतिवादी की किसी लापरवाही या दोष से नहीं हुई, बल्कि ऐसी परिस्थितियों के कारण हुई जो मानव नियंत्रण से परे थीं।
भाग – I
Act of God (दैवी कार्य)
1. अर्थ एवं परिभाषा
Act of God का शाब्दिक अर्थ है—ईश्वर का कार्य या प्राकृतिक शक्तियों द्वारा किया गया ऐसा कार्य जिसे मानव न तो रोक सकता है और न ही नियंत्रित कर सकता है।
सरल शब्दों में, जब कोई हानि केवल प्राकृतिक कारणों (जैसे—भूकंप, बाढ़, तूफान, ज्वालामुखी, बिजली गिरना आदि) से होती है और उसमें मानव हस्तक्षेप नहीं होता, तो उसे Act of God कहा जाता है।
2. परिभाषा (Legal Meaning)
Act of God वह घटना है—
- जो पूर्णतः प्राकृतिक शक्तियों के कारण घटित हो
- जो असाधारण (extraordinary) हो
- जिसे मानव की सामान्य सावधानी से रोका न जा सके
3. आवश्यक तत्व (Essential Elements of Act of God)
Act of God की प्रतिरक्षा लेने के लिए निम्नलिखित तत्व आवश्यक हैं—
- घटना प्राकृतिक शक्तियों से उत्पन्न हुई हो
- वह असाधारण और अप्रत्याशित हो
- मानव नियंत्रण से परे हो
- प्रतिवादी की कोई लापरवाही न हो
4. प्रमुख निर्णय
Nichols v Marsland
इस मामले में प्रतिवादी की भूमि पर कृत्रिम झीलें थीं। असाधारण वर्षा के कारण झीलें टूट गईं और वादी की संपत्ति को नुकसान पहुँचा।
निर्णय –
न्यायालय ने कहा कि अत्यधिक वर्षा एक Act of God है और प्रतिवादी उत्तरदायी नहीं होगा।
महत्व –
यह Act of God की प्रतिरक्षा का प्रमुख उदाहरण है।
5. Act of God के उदाहरण
- भूकंप से इमारत गिरना
- बाढ़ से सड़क बह जाना
- तूफान से जहाज का डूब जाना
6. सीमाएँ
- यदि प्राकृतिक घटना सामान्य हो और अनुमानित की जा सकती हो, तो Act of God लागू नहीं होगा।
- यदि प्रतिवादी ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती, तो वह उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं होगा।
भाग – II
Inevitable Accident (अनिवार्य दुर्घटना)
1. अर्थ एवं परिभाषा
Inevitable Accident का अर्थ है—ऐसी दुर्घटना जो सभी युक्तिसंगत सावधानियाँ बरतने के बावजूद घटित हो जाए और जिसे रोका न जा सके।
यह दुर्घटना प्राकृतिक कारणों से भी हो सकती है और मानवीय कारणों से भी, परंतु इसमें प्रतिवादी की कोई लापरवाही नहीं होती।
2. आवश्यक तत्व
- दुर्घटना अनिवार्य हो
- प्रतिवादी ने उचित सावधानी बरती हो
- दुर्घटना को टालना असंभव हो
3. प्रमुख निर्णय
Stanley v Powell
इस मामले में शिकार के दौरान गोली पेड़ से टकराकर लौट आई और वादी घायल हो गया।
निर्णय –
न्यायालय ने कहा कि यह एक Inevitable Accident है और प्रतिवादी उत्तरदायी नहीं होगा।
महत्व –
यह अनिवार्य दुर्घटना की प्रतिरक्षा का प्रमुख उदाहरण है।
4. Inevitable Accident के उदाहरण
- वाहन की अचानक तकनीकी खराबी से दुर्घटना
- सावधानीपूर्वक चलाए गए हथियार से अप्रत्याशित चोट
भाग – III
Act of God और Inevitable Accident में अंतर
| आधार | Act of God (दैवी कार्य) | Inevitable Accident (अनिवार्य दुर्घटना) |
|---|---|---|
| कारण | केवल प्राकृतिक शक्तियाँ | प्राकृतिक या मानवीय दोनों |
| मानव भूमिका | पूर्णतः अनुपस्थित | हो सकती है, पर बिना लापरवाही |
| प्रकृति | असाधारण प्राकृतिक घटना | अप्रत्याशित दुर्घटना |
| उदाहरण | बाढ़, भूकंप, तूफान | शिकार में दुर्घटनावश चोट |
| प्रतिरक्षा का आधार | प्रकृति की शक्ति | सावधानी के बावजूद दुर्घटना |
भाग – IV
अपकृत्य विधि में महत्व
- ये प्रतिरक्षाएँ न्याय और तर्क पर आधारित हैं।
- निर्दोष व्यक्ति को दायित्व से बचाती हैं।
- यह सिद्ध करती हैं कि हर हानि के लिए प्रतिवादी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
निष्कर्ष
Act of God और Inevitable Accident दोनों ही अपकृत्य विधि में महत्वपूर्ण सामान्य प्रतिरक्षाएँ हैं।
- Act of God केवल प्राकृतिक शक्तियों पर आधारित है।
- Inevitable Accident ऐसी दुर्घटना है जो सावधानी के बावजूद घटती है।
दोनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहाँ प्रतिवादी की कोई गलती नहीं है, वहाँ उसे अपकृत्यात्मक दायित्व से मुक्त किया जाए।
इस प्रकार, ये प्रतिरक्षाएँ अपकृत्य विधि को संतुलित, न्यायसंगत और व्यवहारिक बनाती हैं।