Volenti Non Fit Injuria का सिद्धांत
भूमिका
अपकृत्य विधि (Law of Torts) का मूल उद्देश्य यह है कि यदि किसी व्यक्ति के विधिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है और उसे हानि पहुँची है, तो उसे न्यायालय से उपचार (remedy) प्राप्त हो। परंतु इस सामान्य सिद्धांत के कुछ महत्वपूर्ण अपवाद (exceptions) भी हैं। इन्हीं अपवादों में से एक है Volenti Non Fit Injuria का सिद्धांत।
यह एक लैटिन सूत्र है, जिसका शाब्दिक अर्थ है—
“जो व्यक्ति स्वयं किसी जोखिम को स्वीकार करता है, उसके साथ हुई हानि को कानून अपकृत्य नहीं मानता।”
अर्थात् यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से और पूर्ण ज्ञान के साथ किसी जोखिम को स्वीकार करता है, तो वह बाद में उस जोखिम से उत्पन्न हानि के लिए अपकृत्य का वाद नहीं चला सकता।
यह सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी खतरनाक स्थिति में प्रवेश करता है, तो वह स्वयं उसके परिणामों के लिए उत्तरदायी होता है।
1. सिद्धांत का अर्थ और परिभाषा
Volenti = स्वेच्छा से
Non Fit = लागू नहीं होता
Injuria = हानि / विधिक क्षति
इस प्रकार, Volenti Non Fit Injuria का अर्थ हुआ—
“स्वेच्छा से जोखिम स्वीकार करने वाले व्यक्ति के लिए हानि अपकृत्य नहीं है।”
सरल शब्दों में कहा जाए तो—
यदि वादी (plaintiff) ने जान-बूझकर और अपनी स्वतंत्र इच्छा से किसी जोखिम को स्वीकार किया है, तो प्रतिवादी (defendant) उस हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
2. सिद्धांत का आधार (Basis of the Doctrine)
यह सिद्धांत मुख्यतः निम्न आधारों पर टिका है—
- व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा (Free Consent)
- जोखिम का ज्ञान (Knowledge of Risk)
- जोखिम को स्वीकार करना (Voluntary Acceptance)
कानून यह मानता है कि जब कोई व्यक्ति किसी कार्य के संभावित परिणामों को जानते हुए उसमें भाग लेता है, तो वह उसके दुष्परिणामों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करता है।
3. सिद्धांत के आवश्यक तत्व (Essential Elements)
Volenti Non Fit Injuria के लागू होने के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है—
(1) जोखिम का पूर्ण ज्ञान (Knowledge of Risk)
वादी को उस जोखिम का वास्तविक और पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए, जिससे हानि हो सकती है।
केवल सामान्य जानकारी पर्याप्त नहीं है; जोखिम की प्रकृति और सीमा की जानकारी भी आवश्यक है।
उदाहरण –
यदि कोई व्यक्ति यह जानता है कि रेसिंग ट्रैक पर कार रेस के दौरान दुर्घटना हो सकती है और फिर भी दर्शक के रूप में वहाँ जाता है, तो वह जोखिम को जानता हुआ माना जाएगा।
(2) स्वेच्छा से जोखिम स्वीकार करना (Voluntary Acceptance)
जोखिम को स्वीकार करना पूर्णतः स्वैच्छिक होना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को दबाव, धोखे या विवशता में जोखिम उठाना पड़ा है, तो यह सिद्धांत लागू नहीं होगा।
(3) वादी की सहमति (Consent of Plaintiff)
वादी की सहमति वास्तविक (real) और स्वतंत्र होनी चाहिए।
यदि सहमति धोखे से प्राप्त की गई हो, तो सिद्धांत लागू नहीं होगा।
4. सिद्धांत का उद्देश्य
इस सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—
- व्यक्ति अपने कार्यों के परिणामों के लिए स्वयं उत्तरदायी हो।
- न्यायालयों में अनावश्यक वादों की संख्या कम हो।
- जोखिमपूर्ण गतिविधियों को पूर्णतः प्रतिबंधित किए बिना संतुलन बनाए रखा जाए।
5. न्यायिक निर्णयों द्वारा सिद्धांत का विकास
(क) Hall v Brooklands Auto Racing Club
इस मामले में मोटर रेस के दौरान एक कार दुर्घटनाग्रस्त होकर दर्शकों में जा गिरी, जिससे वादी घायल हो गया।
निर्णय –
न्यायालय ने कहा कि वादी ने स्वेच्छा से मोटर रेस देखने का जोखिम स्वीकार किया था। अतः प्रतिवादी उत्तरदायी नहीं होगा।
महत्व –
यह मामला खेल और मनोरंजन गतिविधियों में Volenti Non Fit Injuria के सिद्धांत का प्रमुख उदाहरण है।
(ख) Wooldridge v Sumner
इस मामले में एक घुड़सवारी प्रतियोगिता के दौरान घोड़ा दर्शकों की ओर मुड़ गया और वादी घायल हो गया।
निर्णय –
न्यायालय ने कहा कि खेल प्रतियोगिता देखने वाला व्यक्ति सामान्य जोखिम को स्वीकार करता है।
महत्व –
यह निर्णय खेल आयोजनों में इस सिद्धांत की पुष्टि करता है।
6. सिद्धांत के अपवाद (Exceptions)
Volenti Non Fit Injuria का सिद्धांत हर स्थिति में लागू नहीं होता। इसके कुछ महत्वपूर्ण अपवाद हैं—
(1) धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुति (Fraud or Misrepresentation)
यदि सहमति धोखे से प्राप्त की गई हो, तो सिद्धांत लागू नहीं होगा।
(2) विवशता (Compulsion)
यदि व्यक्ति विवश होकर जोखिम उठाता है, तो यह सिद्धांत लागू नहीं होगा।
उदाहरण—
यदि कोई कर्मचारी नौकरी बचाने के लिए खतरनाक कार्य करने को मजबूर हो, तो वह Volenti नहीं माना जाएगा।
(3) विधिक कर्तव्य का उल्लंघन (Breach of Statutory Duty)
यदि प्रतिवादी ने किसी वैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन किया है, तो वह इस सिद्धांत का सहारा नहीं ले सकता।
(4) बचाव कार्य (Rescue Cases)
यदि कोई व्यक्ति किसी की जान बचाने के लिए जोखिम उठाता है और घायल हो जाता है, तो उसे Volenti नहीं माना जाएगा।
7. Volenti और लापरवाही (Negligence)
यह सिद्धांत प्रायः लापरवाही के मामलों में प्रतिरक्षा (defence) के रूप में प्रयुक्त होता है।
यदि यह सिद्ध हो जाए कि वादी ने जोखिम को स्वेच्छा से स्वीकार किया था, तो प्रतिवादी लापरवाही के बावजूद उत्तरदायित्व से मुक्त हो सकता है।
8. Volenti और योगदानात्मक लापरवाही (Contributory Negligence) में अंतर
| आधार | Volenti Non Fit Injuria | Contributory Negligence |
|---|---|---|
| प्रकृति | पूर्ण प्रतिरक्षा | आंशिक प्रतिरक्षा |
| परिणाम | प्रतिवादी पूर्णतः मुक्त | क्षतिपूर्ति कम हो जाती है |
| आधार | स्वेच्छा से जोखिम स्वीकार | वादी की लापरवाही |
9. भारतीय विधि में सिद्धांत का स्थान
भारतीय न्यायालयों ने भी Volenti Non Fit Injuria के सिद्धांत को स्वीकार किया है और अनेक मामलों में इसे लागू किया है, विशेषकर खेल, चिकित्सा उपचार और साहसिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में।
10. आलोचना
- कई बार यह सिद्धांत प्रतिवादी को अनुचित लाभ पहुँचा देता है।
- यह सिद्ध करना कठिन होता है कि वादी ने वास्तव में जोखिम को स्वेच्छा से स्वीकार किया था।
निष्कर्ष
Volenti Non Fit Injuria का सिद्धांत अपकृत्य विधि में एक महत्वपूर्ण प्रतिरक्षा (defence) है। इसका आधार यह है कि व्यक्ति अपने कार्यों के परिणामों के लिए स्वयं उत्तरदायी है।
किन्तु इस सिद्धांत का प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए, ताकि यह पीड़ितों के अधिकारों को कमजोर न करे। आधुनिक विधि का दृष्टिकोण यह है कि केवल उन्हीं मामलों में इस सिद्धांत को लागू किया जाए, जहाँ यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो जाए कि वादी ने पूर्ण ज्ञान और स्वतंत्र इच्छा से जोखिम को स्वीकार किया था।
इस प्रकार, यह सिद्धांत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण दायित्व के बीच संतुलन स्थापित करता है।