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अपकृत्य (Tort) की परिभाषा तथा उसके आवश्यक तत्व (Essential Ingredients of Tort)

अपकृत्य (Tort) की परिभाषा तथा उसके आवश्यक तत्व (Essential Ingredients of Tort)

भूमिका

अपकृत्य (Tort) विधि का वह महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो उन नागरिक (सिविल) दायित्वों से संबंधित है, जिनमें किसी व्यक्ति के गलत कार्य या चूक के कारण दूसरे व्यक्ति को क्षति पहुँचती है। टॉर्ट विधि का मुख्य उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति (Compensation) प्रदान करना तथा समाज में न्याय और संतुलन बनाए रखना है। यह विधि अनुबंध (Contract) या अपराध (Crime) से भिन्न है, क्योंकि इसमें दंड देने की बजाय हानि की भरपाई पर बल दिया जाता है।


1. अपकृत्य (Tort) की परिभाषा

शब्द Tort फ्रांसीसी भाषा के शब्द Tortum से लिया गया है, जिसका अर्थ है – गलत या अन्यायपूर्ण कार्य।

सैलमंड (Salmond) के अनुसार
“Tort एक नागरिक अपकृत्य है जिसके लिए उपचार असंविदात्मक (Unliquidated Damages) क्षतिपूर्ति के रूप में उपलब्ध होता है।”

विनफील्ड (Winfield) के अनुसार
“Tort वह नागरिक दायित्व है जो किसी व्यक्ति के कर्तव्य के उल्लंघन से उत्पन्न होता है, जहाँ यह कर्तव्य सामान्यतः समाज के प्रति होता है।”

भारतीय संदर्भ में
अपकृत्य वह गलत कार्य या चूक है जो कानून द्वारा मान्यता प्राप्त किसी विधिक अधिकार का उल्लंघन करता है और जिसके लिए पीड़ित व्यक्ति न्यायालय से क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकता है।

सरल शब्दों में
जब कोई व्यक्ति ऐसा गलत कार्य करता है जिससे किसी दूसरे व्यक्ति को हानि पहुँचती है और कानून उस कार्य को गलत मानता है, तो वह अपकृत्य कहलाता है।


2. अपकृत्य की प्रकृति (Nature of Tort)

  1. यह नागरिक (Civil) प्रकृति का होता है।
  2. इसका उद्देश्य क्षतिपूर्ति दिलाना है, दंड देना नहीं।
  3. यह विधिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित है।
  4. इसमें अनुबंध की आवश्यकता नहीं होती।

3. अपकृत्य के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients of Tort)

किसी कार्य को अपकृत्य सिद्ध करने के लिए सामान्यतः निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है –

  1. कानून द्वारा मान्यता प्राप्त विधिक अधिकार का अस्तित्व
  2. उस अधिकार का उल्लंघन
  3. हानि या क्षति का होना
  4. प्रतिवादी का विधिक दायित्व
  5. उपचार (Remedy) का उपलब्ध होना

इन तत्वों का विस्तार से वर्णन निम्न प्रकार है –


(1) विधिक अधिकार का अस्तित्व (Existence of Legal Right)

अपकृत्य तभी बनता है जब किसी व्यक्ति के ऐसे अधिकार का उल्लंघन हो जो कानून द्वारा मान्यता प्राप्त हो। नैतिक या सामाजिक अधिकारों के उल्लंघन से अपकृत्य नहीं बनता।

उदाहरण
यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा किया जाता है, तो यह उसके विधिक अधिकार का उल्लंघन है और अपकृत्य माना जाएगा।

सिद्धांत: “Ubi Jus Ibi Remedium”
जहाँ अधिकार है, वहाँ उपचार है। अर्थात् यदि किसी का अधिकार छीना गया है, तो उसे न्यायालय से उपचार मिलेगा।


(2) अधिकार का उल्लंघन (Infringement of Right)

केवल अधिकार का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका उल्लंघन भी होना चाहिए।

उदाहरण
यदि किसी व्यक्ति को शांतिपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और कोई व्यक्ति जानबूझकर शोर मचाकर उसे परेशान करता है, तो यह अधिकार का उल्लंघन है।


(3) हानि या क्षति (Damage or Injury)

अपकृत्य में हानि का होना आवश्यक है। यह हानि दो प्रकार की हो सकती है –

  1. Injury (कानूनी हानि) – अधिकार का उल्लंघन
  2. Damage (वास्तविक क्षति) – धन, संपत्ति या प्रतिष्ठा की हानि

कुछ मामलों में केवल अधिकार का उल्लंघन ही पर्याप्त होता है, चाहे वास्तविक क्षति न हुई हो। इसे Damnum Sine Injuria कहा जाता है।

इसके विपरीत, यदि वास्तविक हानि हुई हो पर अधिकार का उल्लंघन न हुआ हो, तो इसे Injuria Sine Damnum कहा जाता है।


(4) विधिक दायित्व (Legal Duty)

प्रतिवादी पर यह कानूनी दायित्व होना चाहिए कि वह ऐसा कोई कार्य न करे जिससे दूसरे के अधिकारों को क्षति पहुँचे।

उदाहरण
ड्राइवर का यह दायित्व है कि वह वाहन सावधानी से चलाए। यदि लापरवाही से दुर्घटना होती है, तो यह अपकृत्य होगा।


(5) उपचार का उपलब्ध होना (Availability of Remedy)

यदि किसी गलत कार्य के लिए कानून कोई उपचार प्रदान करता है, तभी वह अपकृत्य कहलाएगा।

उपचार के प्रकार –

  1. क्षतिपूर्ति (Damages)
  2. निषेधाज्ञा (Injunction)
  3. पुनर्स्थापन (Restitution)

4. अपकृत्य के प्रमुख सिद्धांत

(क) लापरवाही (Negligence)

जब कोई व्यक्ति वह सावधानी नहीं बरतता जो एक सामान्य समझदार व्यक्ति बरतता, तो वह लापरवाही कहलाता है।

(ख) उपद्रव (Nuisance)

किसी व्यक्ति की संपत्ति या आराम में अनुचित हस्तक्षेप उपद्रव कहलाता है।

(ग) मानहानि (Defamation)

किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाला कथन या लेखन मानहानि है।

(घ) अतिक्रमण (Trespass)

किसी की संपत्ति में बिना अनुमति प्रवेश करना अतिक्रमण है।


5. अपकृत्य और अपराध में अंतर

आधार अपकृत्य अपराध
प्रकृति नागरिक आपराधिक
उद्देश्य क्षतिपूर्ति दंड
वादी पीड़ित व्यक्ति राज्य
परिणाम हानि की भरपाई सजा

6. अपकृत्य का महत्व

  1. व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा
  2. सामाजिक संतुलन बनाए रखना
  3. पीड़ित को न्याय दिलाना
  4. गलत कार्यों पर नियंत्रण

निष्कर्ष

अपकृत्य विधि नागरिक कानून का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है और समाज में न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाए रखता है। किसी कार्य को अपकृत्य सिद्ध करने के लिए यह आवश्यक है कि विधिक अधिकार का अस्तित्व हो, उसका उल्लंघन हुआ हो, हानि हुई हो, प्रतिवादी पर विधिक दायित्व हो तथा कानून द्वारा उपचार उपलब्ध हो। इस प्रकार, अपकृत्य विधि न केवल पीड़ित को राहत देती है, बल्कि समाज को अनुशासित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।