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लीग ऑफ नेशंस से लेकर आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तक : विकास की ऐतिहासिक यात्रा

लीग ऑफ नेशंस से लेकर आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तक : विकास की ऐतिहासिक यात्रा


प्रस्तावना

अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisations) आधुनिक विश्व व्यवस्था के अनिवार्य स्तंभ बन चुके हैं। आज वैश्विक शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार, विकास, पर्यावरण संरक्षण, व्यापार तथा स्वास्थ्य जैसे विषयों पर जो संगठित प्रयास दिखाई देते हैं, वे इन्हीं संगठनों की देन हैं। किंतु यह स्थिति अचानक उत्पन्न नहीं हुई। इसका ऐतिहासिक विकास क्रमिक रूप से हुआ है, जिसकी निर्णायक शुरुआत लीग ऑफ नेशंस (League of Nations) से मानी जाती है।

लीग ऑफ नेशंस पहला ऐसा राजनीतिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन था जिसने राज्यों के बीच स्थायी सहयोग और सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा को मूर्त रूप दिया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संगठन तथा अनेक वैश्विक और क्षेत्रीय संगठनों का विकास हुआ, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संगठन की प्रकृति, क्षेत्र और प्रभाव को व्यापक बना दिया।

इस लेख में लीग ऑफ नेशंस से आरंभ होकर आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के विकास और विस्तार का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।


1. प्रथम विश्व युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता

प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) ने मानव इतिहास को गहरे आघात पहुँचाए। करोड़ों लोगों की मृत्यु, आर्थिक विनाश और राजनीतिक अस्थिरता ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि युद्ध को रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो मानव सभ्यता का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में यह विचार उभरा कि राज्यों को एक ऐसे संगठन के अंतर्गत संगठित किया जाए, जो विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कर सके और युद्ध को रोकने के लिए सामूहिक कार्रवाई कर सके।


2. League of Nations : आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन की आधारशिला

(क) स्थापना और उद्देश्य

लीग ऑफ नेशंस की स्थापना 1920 में वर्साय संधि के अंतर्गत हुई। इसके प्रमुख उद्देश्य थे—

  • अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना
  • युद्ध की रोकथाम
  • अंतर्राष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान
  • आर्थिक, सामाजिक और मानवीय सहयोग को बढ़ावा देना

(ख) संरचना

लीग ऑफ नेशंस के प्रमुख अंग थे—

  • महासभा (Assembly)
  • परिषद (Council)
  • सचिवालय (Secretariat)

(ग) योगदान

लीग ऑफ नेशंस ने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए—

  • श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा
  • शरणार्थियों की सहायता
  • स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम

(घ) सीमाएँ और विफलता

लीग ऑफ नेशंस द्वितीय विश्व युद्ध को रोकने में असफल रहा। इसके प्रमुख कारण थे—

  • अमेरिका की सदस्यता का अभाव
  • सैन्य शक्ति की कमी
  • शक्तिशाली देशों का स्वार्थपूर्ण रवैया

फिर भी, लीग ऑफ नेशंस ने अंतर्राष्ट्रीय संगठन की अवधारणा को व्यावहारिक रूप प्रदान किया।


3. लीग ऑफ नेशंस से प्राप्त शिक्षाएँ

लीग ऑफ नेशंस की विफलता ने विश्व समुदाय को यह सिखाया कि—

  • संगठन को सार्वभौमिक सदस्यता प्राप्त होनी चाहिए
  • उसके पास प्रभावी प्रवर्तन शक्ति होनी चाहिए
  • निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और लचीली होनी चाहिए

इन शिक्षाओं के आधार पर एक नए और अधिक शक्तिशाली संगठन की परिकल्पना की गई।


4. द्वितीय विश्व युद्ध और नई अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था

द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) ने पहले से भी अधिक व्यापक विनाश किया। इसके बाद यह सर्वसम्मति बनी कि शांति बनाए रखने के लिए एक नए अंतर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना अनिवार्य है।


5. United Nations : आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन प्रणाली का केंद्र

(क) स्थापना

संयुक्त राष्ट्र संगठन की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई।

(ख) उद्देश्य

  • अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना
  • राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना
  • मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं का संरक्षण
  • सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना

(ग) संरचना

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग हैं—

  • महासभा
  • सुरक्षा परिषद
  • आर्थिक एवं सामाजिक परिषद
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय
  • सचिवालय

संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय संगठन को एक व्यापक, संगठित और प्रभावी स्वरूप प्रदान किया।


6. संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का विस्तार

संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ अनेक विशिष्ट एजेंसियाँ स्थापित की गईं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया—

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन
  • यूनेस्को
  • यूनिसेफ

इन संस्थाओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और बाल कल्याण के क्षेत्र में वैश्विक मानक स्थापित किए।


7. क्षेत्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का विकास

संयुक्त राष्ट्र के बाद क्षेत्रीय संगठनों का तीव्र विकास हुआ, जैसे—

  • यूरोपीय संघ
  • अफ्रीकी संघ
  • आसियान
  • सार्क

इन संगठनों ने क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार और सुरक्षा को बढ़ावा दिया।


8. शीत युद्ध काल और अंतर्राष्ट्रीय संगठन

शीत युद्ध (1945–1991) के दौरान अंतर्राष्ट्रीय संगठन महाशक्तियों के बीच संवाद का मंच बने। संयुक्त राष्ट्र ने कई शांति अभियानों के माध्यम से संघर्षों को सीमित करने का प्रयास किया।


9. वैश्वीकरण और अंतर्राष्ट्रीय संगठन

वैश्वीकरण के युग में अंतर्राष्ट्रीय संगठन केवल राजनीतिक नहीं रहे, बल्कि—

  • व्यापार नियमों का निर्धारण
  • पर्यावरण संरक्षण
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग
  • डिजिटल और साइबर सुरक्षा

जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय हो गए।


10. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की बढ़ती भूमिका

आज अंतर्राष्ट्रीय संगठन—

  • वैश्विक समस्याओं के समाधान में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं
  • विकासशील देशों को सहायता प्रदान कर रहे हैं
  • मानवाधिकारों की रक्षा कर रहे हैं

निष्कर्ष

लीग ऑफ नेशंस से आरंभ होकर संयुक्त राष्ट्र और उसके बाद विकसित हुए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की यात्रा यह दर्शाती है कि मानव समाज सहयोग और संवाद के माध्यम से ही अपनी समस्याओं का समाधान खोज सकता है। यद्यपि इन संगठनों में कई सीमाएँ हैं, फिर भी वे विश्व शांति, विकास और सहयोग के लिए अपरिहार्य हैं।

इस प्रकार, लीग ऑफ नेशंस से लेकर आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तक का विकास मानव सभ्यता की सामूहिक चेतना और प्रगतिशील सोच का प्रतीक है।