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लीग ऑफ नेशंस से पूर्व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का विकास : एक विस्तृत अध्ययन

लीग ऑफ नेशंस से पूर्व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का विकास : एक विस्तृत अध्ययन


प्रस्तावना

अंतर्राष्ट्रीय संगठन (International Organisation) आधुनिक विश्व व्यवस्था की एक अनिवार्य संस्था के रूप में उभर चुके हैं, परंतु इनका विकास किसी एक समय में अचानक नहीं हुआ। लीग ऑफ नेशंस (League of Nations) को सामान्यतः पहला आधुनिक राजनीतिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन माना जाता है, किंतु इसके पूर्व भी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, संधियों, सम्मेलनों और संस्थागत व्यवस्थाओं का एक लंबा इतिहास रहा है। वास्तव में, लीग ऑफ नेशंस से पूर्व के प्रयासों ने ही भविष्य के अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की नींव रखी।

इस लेख में लीग ऑफ नेशंस से पहले अंतर्राष्ट्रीय संगठनात्मक विकास की ऐतिहासिक प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप से स्पष्ट किया गया है, जिसमें प्राचीन काल से लेकर उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक की प्रमुख प्रवृत्तियों और संस्थाओं का अध्ययन किया गया है।


1. प्राचीन काल में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की अवधारणा

यद्यपि प्राचीन काल में आधुनिक अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय संगठन नहीं थे, फिर भी राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय के अनेक उदाहरण मिलते हैं।

(क) प्राचीन भारत

प्राचीन भारत में राज्यों के बीच संधि, मैत्री, युद्धविराम और गठबंधन की परंपरा विद्यमान थी। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में संधियों के प्रकार, दूतों की भूमिका और अंतर्राज्यीय संबंधों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह दर्शाता है कि राज्यों के बीच सहयोग को व्यवस्थित रूप देने का प्रयास प्राचीन काल से ही होता रहा है।

(ख) यूनानी नगर-राज्य

यूनान में विभिन्न नगर-राज्यों ने अपने धार्मिक एवं राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए संघों का गठन किया। एम्फिक्टायोनिक लीग जैसे संघ धार्मिक स्थलों की रक्षा और विवादों के समाधान हेतु बनाए गए थे। यह संघ अंतर्राष्ट्रीय संगठन की प्रारंभिक भावना को दर्शाते हैं।

(ग) रोमन साम्राज्य

रोमन साम्राज्य ने कूटनीति, दूतावास प्रणाली और संधि-निर्माण की परंपरा को विकसित किया। रोमनों की jus gentium (राष्ट्रों का कानून) की अवधारणा ने अंतर्राष्ट्रीय कानून के विकास में योगदान दिया।


2. मध्यकालीन युग में अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत प्रवृत्तियाँ

मध्यकालीन यूरोप में चर्च एक ऐसी संस्था थी जो विभिन्न राज्यों को नैतिक और धार्मिक आधार पर जोड़ती थी। पोप के निर्देश कई राज्यों के लिए बाध्यकारी माने जाते थे।

इसके अतिरिक्त, व्यापारिक गिल्ड और समुद्री संघ भी अस्तित्व में आए, जिनका उद्देश्य व्यापार को सुविधाजनक बनाना और समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना था। ये संस्थाएँ अंतर्राष्ट्रीय संगठन के प्रारंभिक स्वरूप कही जा सकती हैं।


3. वेस्टफेलिया संधि और आधुनिक राष्ट्र-राज्य प्रणाली

1648 की वेस्टफेलिया संधि को आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की आधारशिला माना जाता है। इस संधि के बाद—

  • संप्रभुता का सिद्धांत स्थापित हुआ
  • सभी राज्यों को कानूनी रूप से समान माना गया
  • गैर-हस्तक्षेप की नीति को मान्यता मिली

इन सिद्धांतों ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए स्थायी और संगठित ढाँचे की आवश्यकता को जन्म दिया।


4. 18वीं और 19वीं शताब्दी में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का युग

18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में अनेक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य युद्ध के बाद शांति व्यवस्था स्थापित करना था।

कांग्रेस प्रणाली (Congress System)

नेपोलियन युद्धों के बाद यूरोपीय शक्तियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लेने की प्रक्रिया अपनाई। इस प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें प्रमुख था—

Congress of Vienna

इस कांग्रेस का उद्देश्य यूरोप में शक्ति संतुलन स्थापित करना और स्थायी शांति बनाए रखना था। यद्यपि यह कोई स्थायी संगठन नहीं था, फिर भी इसने सामूहिक निर्णय-प्रणाली की परंपरा को मजबूत किया।


5. तकनीकी एवं प्रशासनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का उदय

औद्योगिक क्रांति के बाद व्यापार, संचार और परिवहन में तीव्र वृद्धि हुई। इससे तकनीकी मानकों और प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता उत्पन्न हुई।

(क) अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राफ संघ (1865)

इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच तार संचार को मानकीकृत करना था।

(ख) सार्वभौमिक डाक संघ (1874)

इस संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय डाक सेवाओं को सरल और व्यवस्थित बनाया।

इन संगठनों को आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अग्रदूत (forerunners) माना जाता है।


6. अंतर्राष्ट्रीय कानून और संगठनों का संबंध

19वीं शताब्दी में अंतर्राष्ट्रीय कानून का विकास हुआ, जिसने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के लिए कानूनी आधार प्रदान किया। संधियाँ, सम्मेलन और प्रथाएँ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को संस्थागत रूप देने लगीं।


7. शांति आंदोलनों और अंतर्राष्ट्रीय संगठन

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यूरोप और अमेरिका में शांति आंदोलन प्रारंभ हुए। इन आंदोलनों का उद्देश्य युद्ध के स्थान पर मध्यस्थता और पंचाट को बढ़ावा देना था।

स्थायी पंचाट न्यायालय (Permanent Court of Arbitration), 1899

हेग सम्मेलन के अंतर्गत इसकी स्थापना की गई। यह संस्था राज्यों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बनाई गई थी।


8. अंतर्राष्ट्रीय श्रम और सामाजिक संगठनों का विकास

औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप श्रमिकों की स्थिति दयनीय हो गई थी। इसके समाधान हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ा और श्रम संबंधी संस्थाएँ अस्तित्व में आईं।

इन प्रयासों ने बाद में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।


9. लीग ऑफ नेशंस से पूर्व की स्थिति का मूल्यांकन

लीग ऑफ नेशंस से पूर्व के अंतर्राष्ट्रीय संगठन—

  • सीमित दायरे में कार्यरत थे
  • मुख्यतः तकनीकी या प्रशासनिक प्रकृति के थे
  • राजनीतिक मामलों में उनकी भूमिका सीमित थी

फिर भी, इन संगठनों ने यह सिद्ध कर दिया कि राज्यों के बीच स्थायी सहयोग संभव है।


10. League of Nations के लिए आधार

लीग ऑफ नेशंस अचानक उत्पन्न नहीं हुआ, बल्कि यह पूर्ववर्ती संगठनों और सम्मेलनों के अनुभवों का परिणाम था। तकनीकी संगठनों, शांति आंदोलनों और कांग्रेस प्रणाली ने यह सिद्ध किया कि अंतर्राष्ट्रीय संगठन विश्व शांति बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।


निष्कर्ष

लीग ऑफ नेशंस से पूर्व अंतर्राष्ट्रीय संगठनात्मक विकास एक क्रमिक प्रक्रिया थी। प्राचीन काल की संधियों से लेकर 19वीं शताब्दी के तकनीकी संगठनों तक, प्रत्येक चरण ने आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन की नींव को मजबूत किया। यद्यपि इन प्रारंभिक प्रयासों की सीमाएँ थीं, फिर भी उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रों के बीच सहयोग, संवाद और संस्थागत व्यवस्था संभव है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में लीग ऑफ नेशंस और बाद में संयुक्त राष्ट्र जैसे व्यापक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का उदय हुआ।